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बच्चों में शिक्षा के साथ संस्कारों का बीजारोपण जरूरी

श्री खेतेश्वर बाल संस्कारशाला का शुभारम्भ

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sanskar shala

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बच्चों में शिक्षा के साथ ही संस्कारों का भी बीजारोपण होना चाहिए। संस्कारों के बिना शिक्षा अधूरी है। आज के इस भौतिक युग में संस्कार शाला का संचालन होना अत्यंत आवश्यक है।
वेदांताचार्य डॉ. ध्यानाराम महाराज ने यह बात कही। वे यहां साहुकारपेट तिरुपल्ली स्ट्रीट स्थित राजपुरोहित ट्रस्ट भवन में श्री खेतेश्वर बाल संस्कारशाला के शुभारम्भ मौके पर वर्चुअल उद्भोधन दे रहे थे। वेदांताचार्य ने कहा कि बच्चों में नैतिक शिक्षा डालने का जो कार्य शुरू किया गया है, वह बहुत ही सराहनीय है। आज के इस बदलते परिवेश में समय निकालकर बच्चों को संस्कारवान बनाना यज्ञ करने के समान है। यह हमारे लिए गौरव की बात है। आदर्श समाज की स्थापना संस्कार से ही शुरू हो सकती है और संस्कार जन्म से ही डाला जा सकता है। वेदांताचार्य ने कहा कि शिक्षा से पहले संस्कार की आवश्यकता है। बच्चों को घरों से ही संस्कार देना शुरू कीजिए। बच्चे के बड़े होने पर संस्कार देना मुश्किल हो जाता है इसलिए बाल्यावस्था से ही संस्कार का बीज बोना अति आवश्यक है। संस्कारशाला को नई पीढ़ी नई चेतना प्रदान करने की दिशा बताया।
प्रारम्भ में राजपुरोहित ट्रस्ट के अध्यक्ष रमेशकुमार मादा, उपाध्यक्ष मनीष तोलियासर, सचिव दातारसिंह करमावास एवं कोषाध्यक्ष लक्ष्मणसिंह वारका ने मां सरस्वती, संत खेतेश्वर व संत आत्मानन्द महाराज की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन किया। शिवनारायणसिंह पिलोवनी, अशोकसिंह मोहराई, सुखदेवसिंह पिलोवनी व मुकेशसिंह पिलोवनी ने संस्कारशालाकी उपादेयता पर प्रकाश डाला। संचालन मदनसिंह वरकाणा ने किया। इस अवसर पर बच्चों को स्टेशनरी का वितरण भी किया गया। बाल संस्कारशाला हर रविवार को सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक संचालित की जाएगी। पांच वर्ष से 18 वर्ष आयुवर्ग की बालक-बालिकाएं इसमें शामिल हो सकेंगे। इस संस्कारशाला में बच्चों का खेल-खेल में शिक्षा के माध्यम से मानसिक, शारीरिक व बौद्धिक विकास किया जाएगा। संस्कार शाला के लिए पंजीयन शुरू है।