
चेन्नई.
कोरोना महामारी के कारण प्राणवायु के संकट के बीच मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के तुत्तुकुडी स्थित वेदांता के स्टरलाइट प्लांट में ऑक्सीजन उत्पादन करने की मंजूरी दे दी है साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञों की कमेटी का गठन भी किया है, जो तय करेगी प्लांट के भीतर कितने लोगों की जरूरत है। वेदांता इस प्लांट में मेडिकल ऑक्सीजन उत्पादन करेगा और वह मुफ्त में ऑक्सीजन मुहैया कराएगा।
अदालत ने कहा है कि स्टरलाइट अगले 10 दिनों में ऑक्सीजन उत्पादन का काम शुरू कर सकती है। साथ ही अदालत ने प्लांट को देश में मुफ्त ऑक्सीजन सप्लाई करने का निर्देश दिया है। अदालत के आदेशानुसार एक विशेषज्ञ पैनल ऑक्सीजन उत्पादन के काम की देखरेख करेगी।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि प्लांट को सिर्फ ऑक्सीजन उत्पादन के लिए खोला जा सकेगा और किसी काम के लिए नहीं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ऑक्सीजन को उत्पादन के बाद केंद्र को दिया जाए और फिर वो राज्यों को आवंटन करेगा। वेदांत की तरफ से पेश हुए वकील हरीश साल्वे ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, "हम सिर्फ ऑक्सीजन प्लांट को चलाएंगे, पावर प्लांट को नहीं। बिजली राज्य मुहैया कराएगा।
कोरोना वायरस के कारण देशभर के कई अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी होने की खबरें आई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही संज्ञान लिया था। मंगलवार को मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, ‘यह राष्ट्रीय संकट है। लोग मर रहे हैं। हमें स्थानीय समुदाय को हमारे पक्ष में लाना होगा।’ इस दौरान अदालत ने राजनीति से बचने की सलाह दी है। अदालत ने कहा ‘कोई राजनीतिक कलह नहीं होगी। हम राष्ट्रीय संकट के दौर से गुजर रहे हैं। हम यहां नागरिकों की जान बचाने के लिए हैं।
कोर्ट ने कहा कि ‘हम अदालत के तौर पर देश का समर्थन करना होगा। यह एक राष्ट्रीय आपदा है।’ दरअसल तमिलनाडु सरकार ने केंद्र सरकार पर प्लांट की मालिक कंपनी वेदांता लिमिटेड का समर्थन करने के आरोप लगाए थे। वहीं, केंद्र ने इन आरोपों का खंडन किया था।
Published on:
27 Apr 2021 03:20 pm
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