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चेन्नई.
विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) राजेश दास की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके खिलाफ सरकार ने 6 सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया है जो उन पर महिला आइपीएस द्वारा लगाए गए यौन उत्पीडऩ के आरोपों की जांच करेगी। समिति के गठन के साथ ही दास का तबादला कर उनको प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया है।
जिला एसपी रहीं महिला पुलिस अधिकारी जब सीएम के दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था में तैनात थी। उस वक्त उनके जिले में आए विशेष डीजीपी ने शिष्टाचार के नाते कार में चढऩे को कहा। कार में कथित रूप से आरोपी अधिकारी ने महिला अफसर का यौन उत्पीडऩ किया। पीडि़ता ने इसकी शिकायत डीजीपी जेके त्रिपाठी और गृह सचिव से की।
विपक्ष ने उठाया मसला
महिला आइपीएस के समर्थन में डीएमके महिला सांसद कनिमोझी और तमिलच्ची तंगपांडियन ने आवाज उठाई। नेता प्रतिपक्ष एमके स्टालिन ने भी सरकार को ललकारा कि अगर आरोपी अधिकारी के खिलाफ जांच नहीं कराई गई तो डीएमके बड़े स्तर पर आंदोलन करेगी।
शासनादेश जारी
इस बीच गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव एस. के. प्रभाकर ने बुधवार को शासनादेश जारी किया कि कार्यस्थल पर महिला यौन उत्पीडऩ कानून 2013 के तहत छह सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है जो आवश्यक उपाय करेगी। इस समिति की पीठासीन अधिकारी नियोजन व विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव जयश्री रघुनंदन को बनाया गया है। पांच सदस्यों में चार वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सीमा अग्रवाल, ए. अरुण, बी. चामुंडेश्वरी और वीके रमेश बाबू हैं। पांचवीं सदस्य इंटरनेशनल जस्टिस मिशन की कार्यक्रम प्रबंधन हेड लॉरेट जोना हैं।
अनिवार्य प्रतीक्षा सूची में राजेश दास
जांच समिति के गठन के तत्काल बाद ही विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) राजेश दास की बदली कर दी गई और उनको अनिवार्य प्रतीक्षा सूची में रख दिया गया ताकि जांच निष्पक्ष रहे। इस बदली के साथ ही उनको दिया गया विशेष डीजीपी का दर्जा भी वापस ले लिया गया है। कानून-व्यवस्था संबंधी अधिकार पूर्ववत कर दिए गए है।
Published on:
24 Feb 2021 07:49 pm
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