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दस साल में पांच सौ से अधिक स्टेज शो पर गायकी का जादू बिखेरा, नानी बाई रो मायरो की देशी अंदाज में प्रस्तुति

उभरती गायिका दीपा दाधीच से राजस्थान पत्रिका की विशेष बातचीत

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Singer Deepa Dadhich

Deepa Dadhich

चेन्नई. गुलाब गजरो यो फूलां को गजरो म्हारा..., म्हारी झोपड़ियां आओ म्हारा राम... तथा दधिमति मैया जगदम्बे तूं कितनी प्य़ारी तूं कितनी अच्छी... समेत अन्य मनमावन गीतों के जरिए उभरती गायिका दीपा दाधीच ने बहुत कम समय में गायकी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। अब तक पांच सौ से अधिक स्टेज कार्यक्रमों में गायकी से लोगों का दिल जीत चुकी दीपा ने विभिन्न जगहों पर देशी अंदाज में नानी बाई रो मायरो में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा है। वह खुद हारमोनियम बजाते हुए भी गानों की अच्छी प्रस्तुति देती है।
यहां चेन्नई में एक धार्मिक कार्यक्रम में शिरकत करने आई दीपा दाधीच ने राजस्थान पत्रिका के साथ विशेष बातचीत में कहा कि उसे बचपन से ही गाने का शौक रहा है। अक्सर बचपन में परिवार के साथ आसपास के छोटे कार्यक्रमों में जाती थी। स्कूल व कॉलेज में देशभक्ति गीतों तथा भजनों के कार्यक्रमों में भाग लिया और कई पुरस्कार भी जीते। भगवान कृष्ण, माताजी, हनुमान, गजानन, खाटूश्यामजी समेत अन्य देवी-देवताओं पर आधारित गीतों व भजनों की प्रस्तुति देती रही है। पिछले करीब दस साल में पांच सौ से अधिक स्टेज कार्यक्रम दे चुकी है। जय अम्बे म्यूजिकल ग्रुप के माध्यम से देश के तकरीबन हर बड़े शहर जिनमें मुम्बई, चेन्नई, बेंगलुरू, सूरत समेत अन्य शहरों में प्रस्तुति दी है। राजस्थान के पाली जिले के तखतगढ़ में हर साल नवरात्रि के समय अपनी प्रस्तुति देने जाती है। भीलवाड़ा के दधिमति माता प्राकट्य दिवस कार्यक्रम में भी प्रति वर्ष प्रस्तुति देती रही है।
सीखी गायन की बारीकियां
दीपा ने कहा कि संगीत की दुनिया में उनके प्रथम गुरु राजस्थान में भीलवाड़ा के प्रसिद्ध गायक घनश्याम कारिया है। उनसे म्यूजिक सीखा। बाद में भीलवाड़ा के ही विद्याशंकर से क्लासिकल संगीत तथा कंचन वाली फेम काया से प्रसिद्ध हो चुके रतनलाल प्रजापत से गायन की बारीकियां सीखीं। दादा नाथूलाल दाधीच भागवत व सत्यनारायण की कथा करते रहे हैं। उनसे भी प्रेरणा मिली। साथ ही माता सरोज दाधीच एवं पिता रामपाल दाधीच ने भी लगातार प्रोत्साहित किया। फरड़ौद (नागौर) के भजन गायक संपत दाधीच एवं जयपुर की भजन कलाकार उमा लहरी से भी वह प्रेरित रही है। य्-ट्यूब, इन्स्टाग्राम व अन्य सोशल मीडिया में भी उनके खूब गाने आ चुके हैं। एलबम भी रिलीज हो चुका है।
प्रशंसकों की तारीफ से मिलता सुकून
वे कहती हैं, स्टेज शो कार्यक्रम की समाप्ति के बाद जब प्रशंसकों की तारीफ मिलती है तो बहुत खुशी व सुकून मिलता हैं। खासकर युवा पीढ़ी उनकी अधिक प्रशंसक रही है। लोगों का प्यार एवं बड़ों का आशीर्वाद उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। चाहने वालों का प्यार ही ताकत है। बचपन से ही म्यूजिक और गाने का शौक रखने वाली दीपा ने बताया की वह गायन के क्षेत्र में ही अपना नाम करना चाहती है। गायन ही उसका जीवन है। गायन ही उसके लिए साधना है। दीपा दाधीच मूल रूप से राजस्थान के बून्दी जिले के जजावर गांव की रहने वाली है लेकिन उनका परिवार लम्बे समय से भीलवाड़ा में निवास कर रहा है। पिता रामपाल दाधीच भीलवाड़ा में निजी स्कूल चलाते हैं तथा मंच संचालक भी है। दीपा ने महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर से एमए (संगीत) तक शिक्षा हासिल की है। साथ ही संगीत में डिप्लोमा भी किया है।