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smartphone vision syndrome से बचने के लिए किताबें पढ़ें और फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाएं

स्मार्टफोन विजन सिंड्रॉम की वजह से छोटे बच्चों से लेकर वरिष्ठ लोगों तक की आंखों की रोशनी प्रभावित होने लगी है

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चेन्नई. राजस्थान पत्रिका की ओर से मंगलवार को आयोजित इंफ्लूएंसर्स मीट में वक्ताओं ने स्मार्ट फोन विजन सिंड्रॉम पर विचार रखे कि किताबों में दिल लगाकर और फिजिकल एक्टिविटी को बढ़ाकर मोबाइल पर बिताए जाने वाले समय को कम किया जा सकता है। गौरतलब है कि इस सिंड्रॉम की वजह से छोटे बच्चों से लेकर वरिष्ठ लोगों तक की आंखों की रोशनी प्रभावित होने लगी है। हैदराबाद में तो एक महिला की आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई।

मीट में शामिल गिरी मूंदड़ा ने कहा कि घंटों मोबाइल फोन पलक झपकाए बगैर देखना एक लत बन चुकी है। वे भी फ्रिक्वेंट यूजर थे और इस वजह से आंखों में जलन तक होने लगी थी। अब बेटर टाइम मैनेजमेंट के जरिए उन्होंने स्क्रीन देखना कम किया है। यह वह दौर है जब हम बिना फोन के नहीं रह सकते लेकिन इसके अनचाहे उपयोग को कम अवश्य कर सकते हैं।

तेजराज गहलोत ने कहा कि मोबाइल पर गेम खेलने के प्रचलन से यह समस्या और बढ़ी है। विदेशों में ऑनलाइन गेम को लेकर टाइम लिमिट है। कुछ इसी तरह का कानून देश में लागू होना चाहिए। इस तरह के प्रतिबंध से स्मार्ट फोन को बेवजह देखना कम होगा।

आकांश बरनवाल ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जीवन का अभिन्न अंग बन चुके हैं। इसके यूज को बंद करना तो अव्यावहारिक होगा। लेकिन इस पर बिताए जाने वाले समय को कम करने के लिए हमें फिजिकल एक्टिविटी बढ़ानी होगी, हॉबी को फॉलो और फोकस करना होगा तथा मनपसंद किताबें पढ़ना शुरू करना होगा।
गोविन्द मूंदड़ा ने कहा कि फिजूल के वाट्सऐप्प ग्रुप से बाहर निकलें। फैमिली के साथ एंगेजमेंट को बढ़ाएं। लगातार और अंधेरे में मोबाइल देखने की प्रवृत्ति को अवश्य टालें।