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चेन्नई।स्पेस टेक्नोलॉजी एंड एजूकेशन के तत्वावधान में मईलापुर और चेटपेट स्थित स्कूलों में अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय कार्यक्रम उत्तरायण (सॉलिसिट्स) मनाया गया। वर्ष में दो बार अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संस्थाओं द्वारा यह दिवस मनाया जाता है।
21 जून को सबसे बड़े दिन और 25 दिसंबर को सबसे छोटे दिन के रूप में इसका आयोजन किया जाता है। स्पेस टेक्नोलॉजी के फ्लैगशिप प्रोजेक्ट 'प्रोजेक्ट परिधिÓ के अंतर्गत मईलापुर स्थित विद्या मंदिर और चेटपेट स्थित एमसीसी हायर सेकण्ड्री स्कूल के ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने वैज्ञानिक प्रयोगों के जरिए इस दिवस के समय की गणना की। कार्यक्रम में कुल 148 से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए जिनमें शिक्षक और कर्मचारियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
साउथ जोनल बिजनेस मैनेजर एस. वेंकट नारायण ने कहा कि विज्ञान और खगोलीय विज्ञान के विकास में स्पेस संस्था का बहुत बड़ा योगदान है। स्पेस टेक्नोलॉजी की ओर से विद्यार्थियों को विज्ञान व खगोल शास्त्र से जुड़ी प्रत्येक घटना दिखाने की व्यवस्था की जाती है।
इसके साथ ही सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दिखाने की भी व्यवस्था होती है। स्पेस से जुड़े खगोलशास्त्रीय प्रभाकरण ने बताया कि जब सूर्य अपनी पूर्ण अवस्था में पहुंच जाता है तो उत्तरायण होता है। यह 21 जून को सबसे बड़े दिन और 25 दिसंबर को सबसे छोटे दिन के रूप में होता है।
Published on:
25 Jun 2016 03:08 am
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