
चेन्नई. कोविड-19 महामारी एवं आर्थिक संकट के बीच अमरीकी सरकार ने एक झटका देते हुए भारतीय आईटी इंडस्ट्री के एच1बी वीजा के साथ ही विदेशी कार्य वीजा पर आगामी 31 दिसंबर तक रोक लगा दी है। इससे निश्चित ही भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। नेशनल को-ऑर्डिनेशन कमेटी आफ आईटी एंड आईटीज एम्प्लॉईज यूनियन ने इस पर विरोध जताया है। यह यूनियन कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, केरल, महाराष्ट्र व एनसीआर में आईटी व आईटीज सेवाओं के कर्मचारियों के मुद्दों का प्रतिनिधित्व करती है। इसका 190 बिलियन डालर का कारोबार है। इससे यूएस व भारत में आईटी प्रोफेशनल्स की बेरोजगारी बढ़ेगी। इससे उन आईटी कंपनियों पर भी असर पड़ेगा जिन्होंने अक्टूबर 2021 तक एच-1बी वीजा जारी किए।
1.7 लाख आईटी कर्मचारी
अमरीका में 1.7 लाख भारतीय आईटी कर्मचारी हैं जिनमें चार शीर्ष कंपनियों में 50 फीसदी कर्मचारी वीजा पर हैं। भारतीय आईटी कंपनियों के लिए अमरीका सबसे बड़ा बाजार है। वीजा पर प्रतिबंध से दिक्कत आ सकती है। यह एक नई चुनौती होगी। इसके साथ अन्य भी प्रभावित होंगे जो अस्पताल, दवा, बायोटेक, वित्तीय संस्थान, तकनीकी समेत अन्य बिजनेस में अमरीका में कार्यरत हैं। यहां तक कि सिलिकॉन वैली में अमरीकन कंपनियों ने भी इसका विरोध किया है। उन्हें लगता है इससे विदेश से कर्मचारियों को लाने में दिक्कत होगी।
2018 में भी लगाया था प्रतिबंध
डोनाल्ड ट्रंप ने 2018 में भी एच-1बी वीजा पर प्रतिबंध लगा दिया था। समिति ने इस मुद्दे के समाधान के लिए हस्तक्षेप की मांग की है। नेशनल को-ऑर्डिनेशन कमेटी आफ आईटी एवं आईटीज एम्प्लॉईज यूनियन ने भी कड़ी निंदा की है। नेसकॉम ने सनसेट क्लाज लागू करने के लिए भारतीय श्रम कानूनों को लचीला बनाने की मांग की है। इससे कंपनिया प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र होंगी। भारतीय श्रम मंत्रालय को जल्द देश में कंपनियों को श्रम कानून लागू करने की सलाह देनी चाहिए।
Published on:
26 Jun 2020 09:40 pm
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