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तमिल लेखक, साहित्यकार मोहम्मद मीरान का निधन

तमिल लेखक और साहित्य अकादमी पुरस्कार के विजेता मोहम्मद मीरान का तिरुनेलवेली जिले के पेट्टै में शुक्रवार को निधन हो गया। वे ७४ वर्ष के...

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Tamil writer, literary Mohammad Miran passes away

Tamil writer, literary Mohammad Miran passes away

चेन्नई।तमिल लेखक और साहित्य अकादमी पुरस्कार के विजेता मोहम्मद मीरान का तिरुनेलवेली जिले के पेट्टै में शुक्रवार को निधन हो गया। वे ७४ वर्ष के थे। वे अपने पीछे पत्नी और दो बेटे छोडक़र गए हैं। मीरान ने तमिल और मलयालम में कई उपन्यास लिखे, इनमें साएवु नारकली उपन्यास के लिए उनको वर्ष १९९७ में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

इसके अलावा उन्होंने ओरु कदलोरा, गरमत्तिन कथई, तुरैमुगम, कूनन तोप्पू और अनुज वन्नम तिरु सहित अनेक उपन्यास लिखे थे। उन्होंने अनबुक्कु मुत्तुमै इल्लै, तंगअरसु, अनंतसेयानम कालोनी, ओरु ***** तेविन वरिप्पडम, तोप्पिल मोहम्मद मीरान कथिगल और ओरु मामरमम कोंजम परवेगुलम सहित कई छोटी कहानियां भी लिखी थी। उपन्यास और कहानियों की वजह से मीरान को साहित्य अकादमी और तमिलनाडु कलै इल्किया पेरुमंतराम पुरस्कार सहित आठ पुरस्कार मिले थे।

भौतिक सुखों को छोड़ आत्मिक सुख पाने का प्रयास करें

एसएस जैन संघ, सईदापेट के तत्वावधान एवं साध्वी कंचनकुंवर एवं अन्य सहवर्तिनी साध्वीवृंद के सानिध्य में जैन स्थानक में जारी पांच दिवसीय संस्कार शिविर में साध्वी ने कहा प्रत्येक जीव सुख की अभिलाषा करता है, सुख दो प्रकार के हैं- भौतिक सुख व अध्यात्मिक सुख। भौतिक सुख यानी जिसे उत्पन्न किया जाए और जो वस्तु उत्पन्न होती है वह नाशवान तथा मात्र बाहरी सुख देने वाली है। जीव को भूख, प्यास, सुविधा, आराम आदि पाने के लिए अठारह पापस्थान का सेवन करना पड़ता है। राग-द्वेष, मोह-माया, मान-अपमान का पालन आचरण करता है, दूसरों को भी इसके कारण पीड़ा या दु:ख पहुंचे की सम्भावना होती है। लेकिन यह सिर्फ सुख का मात्र अनुभव ही है और किसी भी क्षण दु:ख में बदल सकता है, यह शाश्वत नहीं है। दूसरा सुख आध्यात्मिक व आत्मिक है जिसमें न राग है, न द्वेष।

सिर्फ आपनी आत्मा, अन्तर मन को इन्द्रियों का सहयोग द्वारा प्राप्त है। यह आत्मिक सुख शाश्वत है, मोह-माया के बंधन से मुक्त है। दूसरे को पीड़ा पहुंचाने की सम्भावना नहीं है। आप इस लोभ प्रवत्ति को छोडक़र शुभ, शुद्ध, सुन्दर, स्वच्छ व आत्मा को साता पहुंचने वाले आत्मिक सुख को आत्मसात करने का प्रयास करें, जिससे यह भव और पर भव मंगलमय हो। मोक्ष में सहायक हो। इस अवसर पर एएमकेएम चातुर्मास समिति के नवरतमल चोरडिया, पारसमल सुराना एवं शांतिलाल सिंघवी, हीरालाल पींचा उपस्थित थे। संचालन पदमचंद छाजेड़ ने किया।

साध्वी कंचनकुंवर एवं अन्य सहवर्तिनी साध्वीवृंद के सानिध्य में १२ मई को स्वामी बृजलाल एवं श्रमण संघीय प्रथम युवाचार्य मिश्रीमल ‘मधुकर’ की दीक्षा जयंती मनाई जाएगी।