
टैक्सी चालक आत्महत्या मामला डीएसपी को सौंपा
चेन्नई. ट्रेफिक पुलिस की प्रताडऩा से पीडि़त एक व्यक्ति ने कुछ दिन पहले एक टैक्सी चालक के चलती ट्रेन के सामने कूद कर जान देने के मामले को अब पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) को सौंप दिया गया है। बेस्ट जोन के संयुक्त आयुक्त बी. विजयकुमार द्वारा सौंपी गई एक रिपोर्ट के बाद सिटी पुलिस ने मामले की फाइल बंद कर दी। सौंपी गई रिपोर्ट में विजयकुमार ने कहा था कि टैक्सी चालक की आत्महत्या के पीछे न तो कानून व्यवस्था की कोई गलती है और न ही यातायात पुलिस की। चेन्नई एगमोर रेलवे पुलिस स्टेशन के डीएसपी ने ताम्बरम जीआरपी की महिला सब इंस्पेक्टर रामुताई को नोटिस भेजकर पेश होने का निर्देश दिया। रामुताई ने पोस्टमार्टम के लिए शव भेजने से पहले मृतक का मोबाइल फोन प्राप्त किया था। इतना ही नहीं बल्कि माबाइल उसमेंं आत्महत्या करने से पहले लिए गए वीडियो को उड़ा कर पीडि़त परिजनों को सौंपा था।
उल्लेखनीय है कि पुलिस की प्रताडऩा से तंग आकर कार चालक ने ट्रेन के सामने कूद कर आत्महत्या की थी। कार चालक का वीडियो सामने आने के बाद मामले का खुलासा हुआ था। मृतक की पहचान कांचीपुरम के कम्मवारपालयम निवासी राजेश मूर्ति (३८) के तौर पर हुई थी जिसने २५ जनवरी को एमएम नगर और सिंगपेरुमाल कोविल के पास रेलवे ट्रेक पर ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली थी।
सूचना पर पहुंची ताम्बरम पुलिस ने मौका मुआयना कर आत्महत्या का मामला दर्ज किया था, लेकिन परिजनों ने राजेश के मोबाइल के एक वीडियो को सोशल मीडिया पर जारी कर हकीकत को सामने ला दिया था। हालांकि पुलिस ने ही राजेश के मोबाइल को परिजनों तक पहुंचाया था पर बचने के उद्देश्य से फार्मेट कर सारी फाइलों को उड़ा दिया था।
लेकिन राजेश के एक रिश्तेदार को उसकी आत्महत्या पर संदेह हुआ तो रिकवरी सॉप्टवेयर की सहायता से मोबाइल की सारी फाइल वापस खुलवाई जिसके बाद उसमें राजेश का एक वीडियो मिला, जो उसने आत्महत्या करने से कुछ देर पहले ही बनाया था। उसमें उसने पुलिस द्वारा किए गए व्यवहार का वर्णन किया था। उसने कहा कि पुलिस ने मुझे अभद्र भाषाओं का प्रयोग करते हुए गाली दी थी। मैं इस बात से काफी चिंचित हूं। मेरे इस कदम के लिए महानगर पुलिस जिम्मेदार है।
सोशल मीडिया पर चल रहे तीन मिनट के वीडियो में पुलिसकर्मियों के व्यवहार के बारे में बताते हुए वह रो रहा था। उसने कहा कि २४ जनवरी की सुबह उसने अन्ना नगर से एक आईटी की महिला कर्मचारी को टैक्सी में बिठाया और वहीं पर कचरादपात्र के पास दूसरे कर्मचारी का इंतजार करने के लिए खड़ा था। इसी बीच पीछे से दो पुलिसकर्मी आए और गालियां देकर लाठी चलाते हुए कार को हटाने को कहा। उसके बाद मैंने कार को आगे ले जाकर एक खाली जगह पर पार्क कर दी। लेकिन फिर दोनों पुलिसकर्मी वहां आए और कार में महिला की उपस्थिति के बावजूद अभद्र भाषा का प्रयोग कर गालियां देने लगे। इसी प्रकार इससे एक दिन पहले भी तिरुवत्तीयूर सर्विस रोड के पास मैं अपनी कार में सो रहा था, तभी पुलिसकर्मी वहां आए और मुझे उठा कर ५०० रुपए का जुर्माना लगा दिया।
मैंने जुर्माना देने के बाद उनसे रसीद की मांग की तो चिल्लाने लगे। उसने कहा कि टैक्सी चलाने के बाद मैं सिर्फ तीन से साढ़े तीन घंटे ही सो पाता हूं। कार चालक के रूप में मंै रोजाना ही मरता हूं और उसके बावजूद पुलिसकर्मी आकर प्रताडि़त करते हंै। मेरी आत्महत्या की जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ चेन्नई की पुलिस है और कोई नहीं। आशा करता हूं मेरे इस कदम के बाद से लोगों को पुलिस की प्रताडऩा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
Published on:
04 Mar 2019 05:04 pm
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