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छोटी उम्र में शादी का प्रभाव: 18 से कम उम्र की बेटियां बन रहीं मां

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बाल विवाह का एक प्रमुख कारण लड़कियों का स्कूल छोड़ना है। बेटियों के ड्रॉप आउट होने के साथ मां-बाप जल्दीबाजी में हाथ पीले कर देते हैं

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छोटी उम्र में शादी का प्रभाव: 18 से कम उम्र की बेटियां बन रहीं मां

छोटी उम्र में शादी का प्रभाव: 18 से कम उम्र की बेटियां बन रहीं मां

चेन्नई. स्कूल जाने वाली उम्र मे मां बनने वाली बेटियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। यह खुलासा सूचना के अधिकार (आरटीआइ) से प्राप्त एक जानकारी में हुआ है।

स्वास्थ्य कार्यकर्ता ए वेरोनिका मैरी की ओर से दायर आरटीआइ के जवाब के अनुसार, तिरुनेलवेली जिले में 34 माह में 1448 नाबालिगों ने बच्चों को जन्म दिया है और समाज कल्याण व महिला कल्याण विभाग हाथ पर हाथ धरकर बैठा है। आरटीआइ से प्राप्त आकड़े चौंकाने वाले हैं। स्वास्थ्य कार्यकर्ता मैरी ने राज्य सरकार से बाल विवाह रोकथाम के लिए जागरूकता कार्यक्रम तेज करने और स्कूली पाठ्यक्रमों में यौन शिक्षा और कम उम्र में गर्भावस्था के अवगुणों को शामिल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि 1,448 प्रसवों में से 1,101 प्रसव ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में हुए। तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 347 बच्चों की डिलिवरी हुई। सर्वाधिक प्रसव (88) मेलपालयम के पीएचसी में हुए। इसके बाद मनुर ग्रामीण पीएचसी का नंबर आता है, जहां 44 नाबालिग मां बनीं। अधिकांश कार्यकर्ताओं का मानना कहना है कि प्रदेश में छात्राओं के साथ यौन अपराध व बाल विवाह को लेकर कम जागरूकता है। सरकार का भी इस ओर कम ध्यान है।

2012 में, राज्य सरकार ने इसी तरह के मामलों में वृद्धि के बाद छात्रों में यौन अपराधों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए मोबाइल वाहन इकाइयां शुरू करने का आदेश जारी किया था, दुर्भाग्यवश इसकी तामील नहीं की गई। बड़ी बात यह भी है कि मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार ने यह आदेश लागू नहीं किया है। अधिकांश स्कूली छात्रों को हेल्पलाइन नंबर 1098 के बारे में भी जानकारी नहीं है, जो बाल सुरक्षा के लिए है।

स्कूल ड्रॉप आउट एक बड़ा कारण

मैरी का दावा है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बाल विवाह का एक प्रमुख कारण लड़कियों का स्कूल छोड़ना है। बेटियों के ड्रॉप आउट होने के साथ मां-बाप जल्दीबाजी में हाथ पीले कर देते हैं और फिर बच्चियां वैवाहिक जीवन गुजर-बसर करना शुरू कर देती हैं। कई मामलों में प्रेम प्रसंग में लड़कियों का घर छोड़ना भी सामने आया है। अवैध उम्र में ब्याह हो जाने से उनके साथ जो होता है, वह यौन शोषण ही है और पॉक्सो एक्ट के तहत दंडनीय है।

सबसे ज्यादा बाल विवाह प. बंगाल में

बाल विवाह और किशोरियों का मां बन जाना पूरे भारत की समस्या है। आंकड़ों के अनुसार 15-29 उम्र की महिलाओं में से एक चौथाई का विवाह 18 से पहले हो जाता है, इसमें पश्चिम बंगाल (42%), बिहार (40%) व त्रिपुरा (39%) आगे हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 के अनुसार किशोरियों की प्रेग्नेंसी के मामलों में त्रिपुरा (22%), पश्चिम बंगाल (16%) और आंध्रप्रदेश (13%) है। तमिलनाडु में यह प्रतिशत 2015-16 के 5% से बढ़कर 2020-21 में 6.3% हो गया है।