
tender coconut price rises in TN
तिरुचि.
स्वास्थ्य के लिहाज से कच्चे नारियल का पानी काफी महत्वपूर्ण है। यहीं कारण है कई रोगों में चिकित्सक रोगी को नारियल-पानी पीने की सलाह देते हैं। लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों के कारण इन दिनों यह आम आदमी की पहुंच से दूर होता जा रहा है।
हालत यह है कि इन दिनों पके नारियल की तुलना में कच्चे नारियल की कीमत डेढ़ गुनी अधिक चल रही है। अस्पताल के आस-पास एवं शहर के विभिन्न इलाकों के कच्चे नारियल विक्रेताओं ने कीमतें बढऩे के पीछे कई कारणों का हवाला देते हुए कहा कि आस-पास के नारियल की खेती वाले इलाके तेजी से आवासीय भूखंडों में बदलते जा रहे हैं।
बीमार बेटी को नारियल की जगह पिला रहे छाछ
अस्पताल में अपनी बेटी का इलाज करा रहे वाई. मुरुगप्पा ने बताया कि बाजार में पके हुए नारियल की अधिकतम कीमत 40 रुपए है जबकि कच्चा नारियल 50 से 60 रुपए में बिक रहा है। ऐसे में वह अपनी बीमार बेटी के लिए कच्चे नारियल का पानी नहीं खरीद सकता और इसके स्थान पर वह उसे छाछ पिला रहा है।
खेत न बेचा होता तो ये स्थिति न होती
महात्मा गांधी मेमोरियल सरकारी अस्पताल के पास नारियल-पानी बेचने वाले जे. फिलिप ने कहा कि स्थानीय खेतों पर इमारतें बन जाने के कारण उन्हें नारियल खरीदने के लिए पोल्लाची जाना पड़ रहा है। दूर से नारियल मंगाने के कारण परिवहन लागत एवं अन्य खर्चे बढ़ गए हैं। यहीं कारण है कि कच्चे नारियल कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर उनलोगों ने अपना खेत बचाया होता तो ऐसी स्थिति नहीं आती। इस समय वे खुद 38 से 42 रुपए की दर से कच्चा नारियल खरीद रहे हैं।
कर्ज चुकाने की चिंता में डूबे फुटकर व्यापारी
इस प्राकृतिक पेय के धंधे में कई बार विक्रेताओं को घाटे का सामना भी करना पड़ता है। स्थिति यह है कि साहूकारों से कर्ज लेकर व्यापार करने वाले नारियल विक्रेताओं को कर्ज अदायगी की चिंता खाए जा रही है।
वीरामनि नामक एक नारियल विक्रेता ने बताया कि औसतन हर रोज वह 20 नारियल बेच लेता है लेकिन कीमत बढऩे के कारण उसे इतना भी लाभ नहीं मिल पा रहा है कि वह अपना कर्ज लौटा सके।
कमोवेश यहीं हाल हर फुटकर विक्रेता की है। आने वाले दिनों में इसकी कीमत और अधिक बढऩे की उम्मीद है। अधिकांश विक्रेताओं का दावा है कि आने वाले दिनों में ये कीमतें और बढ़ेंगी। शहर में इन दिनों नारियल-पानी और भर पेट भोजन की कीमत लगभग बराबर होने के चलते लोग नारियल-पानी की जगह भोजन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
स्थानीय निवासी विजयलक्ष्मी ने बताया कि स्वास्थ्य के लिए अच्छा होने के बावजूद इन दिनों यह पैसे वालों का पेय-पदार्थ बन कर रह गया है। जब तरबूज एवं अन्य जूस 10 रुपए में उपलब्ध है तो कोई 50-60 रुपए खर्च करके नारियल पानी क्यों खरीदेगा।
Published on:
17 Feb 2018 09:05 pm
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