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मंदिर की मूर्ति में ‘भगवान बुद्ध’ , पुरातत्व विभाग के हवाले किया गया हिन्दू मंदिर, पूजा पर भी रोक

हाइकोर्ट के निर्देश पर एएसआइ आयुक्त ने मंदिर मूर्ति का निरीक्षण और सावधानीपूर्वक विश्लेषण करने के बाद निष्कर्ष दिया कि इसमें भगवान बुद्ध के 'महालक्षण हैं। न्यायाधीश ने कहा कि ऐसी रिपोर्ट के बाद मंदिर के संचालन की एचआएंडसीई को अनुमति नहीं दी जा सकती। यह मामला मूर्ति की गलत पहचान का है। रिपोर्ट से स्पष्ट है कि मूर्ति में "बुद्ध" को दर्शाया गया है।

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मंदिर की मूर्ति में 'भगवान बुद्ध' , पुरातत्व विभाग के हवाले किया गया हिन्दू मंदिर, पूजा पर भी लगाई रोक

सेलम जिले में है तलैवेट्टी मुनियप्पन मंदिर

चेन्नई. सेलम जिले के तलैवेट्टी मुनियप्पन मंदिर की मूर्ति भगवान बुद्ध के होने की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की रिपोर्ट के आधार पर मद्रास उच्च न्यायालय ने यहां नैत्यिक पूजा-आराधना पर रोक लगा दी है। मंदिर का प्रशासन व स्वामित्व एएसआइ को करने का भी आदेश हुआ है। यह मंदिर तमिलनाडु हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआर एंड सीई) के स्वामित्व में था।

न्यायाधीश एन. आनंद वेंकटेश ने सेलम जिला बुद्ध ट्रस्ट की याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश दिया। याची ने एएसआई को तलैवेट्टी मुनियप्पन मंदिर में उक्त प्रतिमा का निरीक्षण करने और इसकी पहचान कर अदालत को रिपोर्ट सौंपने का आग्रह किया था। अब एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर जज ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि वह पेरियारी गांव के कोट्टै रोड की उक्त भूमि को याचिकाकर्ता ट्रस्ट को बहाल करने के उपाय करे।

भगवान बुद्ध के महालक्षण

इससे पहले हाइकोर्ट के निर्देश पर एएसआइ आयुक्त ने मंदिर मूर्ति का निरीक्षण और सावधानीपूर्वक विश्लेषण करने के बाद निष्कर्ष दिया कि इसमें भगवान बुद्ध के 'महालक्षण हैं। न्यायाधीश ने कहा कि ऐसी रिपोर्ट के बाद मंदिर के संचालन की एचआएंडसीई को अनुमति नहीं दी जा सकती। यह मामला मूर्ति की गलत पहचान का है। रिपोर्ट से स्पष्ट है कि मूर्ति में "बुद्ध" को दर्शाया गया है। अब तक यह मंदिर देवस्थान विभाग के अधीन था और देख-रेख के लिए कार्यकारी भी नियुक्त किया गया था जो अब जायज नहीं है। लिहाजा मूल स्थिति की बहाली होनी चाहिए। एचआरसीई द्वारा इसका प्रशासन बौद्ध धर्म के सिद्धांतों के खिलाफ होगा। पुरातत्व विभाग आयुक्त इसका नियंत्रण अपने हाथ में लें।

सूचना पट्ट लगाया जाए

न्यायाधीश ने आदेश दिए कि मंदिर परिसर में उक्त मूर्ति भगवान बुद्ध की होने की सूचना वाला बोर्ड लगाया जाए। जनता को दर्शन की अनुमति दी जा सकती है लेकिन यह सुनिश्चित किया जाए कि मूर्ति की कोई पूजा अथवा अन्य समारोह आयोजित नहीं हो।