9 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मंदिरों के शहर में महिलाओं का जोर

कांचीपुरम मंदिरों की नगरी है तो रेशमी साडिय़ों के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के दर्शनार्थी हो अथवा रेशम पालन का व्यवसाय दोनों में महिलाएं पुरुषों के समकक्ष...

2 min read
Google source verification
The emphasis of women in the city of temples

The emphasis of women in the city of temples

चेन्नई।कांचीपुरम मंदिरों की नगरी है तो रेशमी साडिय़ों के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के दर्शनार्थी हो अथवा रेशम पालन का व्यवसाय दोनों में महिलाएं पुरुषों के समकक्ष है। मतदाताओं में भी महिलाओं की संख्या अधिक है और मौजूदा सांसद के. मरगदम भी महिला है। कांचीपुरम पवित्र तीर्थस्थल भी है जहां बड़ी संख्या में देशी-विदेशी सैलानियों का वर्ष पर्यंत आगमन होता रहता है। कांचीपुरम लोकसभा की सीट आरक्षित है और इस सीट की आबादी का साठ फीसदी हिस्सा ग्रामीण है।

सीट का इतिहास

आरक्षित सीट के तौर पर कांचीपुरम में यह चौथा लोकसभा चुनाव है। परिसीमन के बाद पहला चुनाव २००९ में हुआ था। डीएमके-कांग्रेस गठबंधन के रूप में यह सीट राष्ट्रीय दल के खाते में गई थी। २०१४ का चुनाव डीएमके बनाम और एआईएडीएमके रहा और के. मरगदम ने डीएमके प्रत्याशी जी. सेल्वम को 1,46,866 मतों के बड़े अंतर से हराया। इस बार भी मुख्य मुकाबला इन दोनों दलों के बीच ही है। २०१४ की तुलना में इस बार दो लाख से अधिक नए मतदाता जुड़े हैं। इन मतदाताओं की सोच भी चुनाव के नतीजों को प्रभावित करेगी। वैसे इस सीट पर महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से २९ हजार से अधिक है।

चुनावी समीकरण

ग्रामीण आबादी की बहुलता वाली इस सीट में चेंगलपेट्ट, तिरुपोरूर, चैयूर (आर.) मदुरांतकम (आर.) उत्तरमेरूर और कांचीपुरम विधानसभा क्षेत्र आते हैं। तिरुपोरूर सीट फिलहाल रिक्त है जहां विधानसभा उपचुनाव होने है। जबकि अन्य सभी सीटों पर २०१६ के विधानसभा चुनाव में डीएमके प्रत्याशी जीते थे, लिहाजा मौजूदा सांसद के लिए जीत दोहराना आसान नहीं होगा। पीएमके और डीएमडीके के साथ गठबंधन का फायदा उनको अवश्य मिलेगा। इस जिले में वन्नियर समुदाय के वोट निर्णायक भूमिका में है। कांचीपुरम में ब्राह्मणों की संख्या अच्छी है लेकिन बीस से अधिक फीसदी मतदाता दलित हैं जिनको रिझाने की द्रविड़ दलों द्वारा कोशिश होगी। पिछले चुनाव में एमडीएमके प्रत्याशी सीई सत्या को दो लाख से अधिक वोट मिले थे। एमडीएमके इस बार डीएमके गठबंधन में है। ऐसे में मतों के अधिक बिखराव की स्थिति इस सीट पर नहीं दिखाई दे रही है।

सांसद के. मरगदम का रिपोर्ट कार्ड

खुला विवि से एमए पास मौजूदा सांसद के. मरगदम ने २०१४ की जीत पर कहा था कि यह केवल जे. जयललिता की वजह से संभव हो पाया। इस बार उनके प्रचार के लिए जयललिता नहीं हैं। लोकसभा में उनकी उपस्थिति 321 में से 263 दिन रही। लेकिन उन्होंने केवल 512 सवाल ही पूछे और सिर्फ 41 बहसों में हिस्सा लिया। वे सांसद निधि कोष का भी केवल ७२.८८ प्रतिशत ही उपयोग कर पाईं।

प्रमुख उम्मीदवार

के. मरगदम एआईएडीएमके
जी. सेल्वम डीएमके
एम. तंगराज मक्कल नीदि मय्यम
ए. मुन्नुसामी एएमएमके (निर्दलीय)
विधानसभा क्षेत्रवार मतदाता
सीट मतदाता
चेंगलपेट्ट 388782
तिरुपोरूर 265,166
चैयूर(एससी) 213963
मदुरांतकम (एससी) 216310
उत्तरमेरूर 244,702
कांचीपुरम 290,395
कुल मतदाता 1619318