
आनंद की अनुभूति के लिए उदारता का गुण जरूरी
चेन्नई. मैलापुर में बाजार रोड स्थित जैन स्थानक में कपिल मुनि ने कहा कि स्वयं के जीवन पथ को आलोकित करने के साथ दूसरों की जिंदगी की राहों को रोशन करना दरअसल जिन्दगी का महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। प्रत्येक इंसान को अपनी गिरेबां में झांककर देखना चाहिए कि मैं औरों की जिंदगी में सहायक बन रहा हूं या बाधक। जब भी व्यक्ति अपने आपको आगे बढ़ाने के बजाय दूसरों को पीछे खींचता है तो उस इंसान के भीतर सृजन की शक्ति नहीं बल्कि विध्वंस की शक्ति काम कर रही होती है। विध्वंस की शक्ति सक्रिय होने पर इंसान हैवान बन जाता है।
जीवन को क्षति पहुंचाने वाले दुर्गुणों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कृपणता एक ऐसा दुर्गुण है जो जीवन में उदारता के गुण को प्रकट नहीं होने देता। जहां उदारता है वहां मधुरता और सरसता का वास होता है। उदार व्यक्ति ही लोकप्रिय और भगवान की कृपा का पात्र बनता है। मुनि ने कहा कंजूस व्यक्ति उसे माना जाता है जिसके पास प्रचुर मात्रा में शक्ति और साधन होते हुए भी उपयोग और उपभोग के मौके पर दाएं-बाएं झांकता है, व्यय नहीं करने के नए-नए बहाने खोजता है और अपनी महानता को झूठे आदर्शों और सिद्धांतों के सहारे प्रकट करता है।
कंजूस व्यक्ति बड़ा शोषणकर्ता भी होता है वह धन संग्रह के लिए न्याय नीति, धर्म, कानून और मानवता सबकी बलि चढ़ा देता है। ऐसा व्यक्ति न खुद चैन से जीता है और न किसी को चैन से जीते हुए को देख पाता है। उसके सारे कृत्य जघन्य और अमानवीय बन जाते हैं। कंजूस के समान पाखंडी और कू्रर व्यक्ति ढूंढने पर भी नहीं मिलता।
उन्होंने कहा जीवन को प्रसन्नता पूर्वक जीने के लिए उदारता के गुण को अपनाना बेहद जरूरी है। इंसान को कुदरत से जो शक्ति का वरदान मिला है उसकी सार्थकता सृजन और निर्माण करने में ही निहित है। इसलिए इंसान को अपने द्वारा रचनात्मक कार्यों के माध्यम से इस दुनिया में मधुर स्मृतियों को छोड़कर कुछ पदचिन्ह बनाकर जीवन के गुणात्मक विकास की राह पर अग्रसर होना चाहिए।
संघ के अध्यक्ष शांतिलाल चोरडिया ने बताया कि रविवार को कपिल मुनि का प्रवचन सवेरे 9.15 बजे से मैलापुर जैन स्थानक में ही होगा। संघ मंत्री विमलचंद खाबिया ने धर्म सभा का संचालन किया।
Published on:
09 Dec 2018 06:51 pm
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