चेन्नई. राज्यपाल आर. एन. रवि ने मंगलवार को विश्व पटल पर भारत की प्रभावी छवि पर चर्चा करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की तरफ आशावादी दृष्टि से देख रही है। भारत का भविष्य युवाशक्ति के हाथों में है। हमें लक्ष्य तय कर उसे प्राप्त करने की कोशिश करनी चाहिए। शिक्षा हमारी सबसे बड़ी ताकत है, जिसके जरिए हम लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। भारत ने ही विश्व को मानवता का पाठ पढ़ाया है जो हमारी संस्कृति में है।
वे बतौर मुख्य अतिथि तमिलनाडु हिन्दी साहित्य अकादमी एवं डी. जी. वैष्णव कॉलेज हिन्दी विभाग शिफ्ट–2 के संयुक्त तत्वावधान में विश्व फ़लक पर भारत विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे। दीप प्रज्वलन और प्रार्थना से संगोष्ठी की शुरुआत हुई। तमिलनाडु हिन्दी साहित्य अकादमी की अध्यक्ष डा. निर्मला मौर्य और कॉलेज के प्राचार्य कैप्टन डा. एस संतोष बाबू ने अतिथियों एवं आगंतुकों का स्वागत किया। राज्यपाल ने कॉलेज की हिन्दी सेवा की तारीफ की और वैश्विक परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।
जीवनोपलिब्ध सम्मान
सम्मान समारोह में निर्मल भसीन, बीपी गोस्वामी, डॉ. एम. गोविंदराजन, अलमेलु कृष्णन व रमणी भारद्वाज को जीवनोपलिब्ध सम्मान दिया गया। डॉ. संजय पंकज, कैप्टन डॉ. एस. संतोष बाबू, कॉलेज सचिव डॉ. अशोक कुमार मूंदडा, कोषाध्यक्ष अशोक केड़िया एवं डॉ. अशोक कुमार द्विवेदी को तमिलनाडु साहित्य अकादमी की तरफ से स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। अकादमी के सचिव ईश्वर करुण ने अकादमी के उपलब्धियों की चर्चा की। अकादमी और कॉलेज की ओर से राज्यपाल का सम्मान किया गया। साथ ही दो पुस्तकों का लोकार्पण भी हुआ। एनसीसी कैडेटों द्वारा राज्यपाल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। डॉ हुसैन वल्ली के आभार ज्ञापन से उद्घाटन सत्र समाप्त हुआ।
दो सत्रों में बीस प्रपत्र वाचन
संगोष्ठी के दो सत्रों में बीस प्रपत्र पढ़े गए, जिनका संचालन डॉ. सुनील पाटिल, डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र और डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कुमार अभिषेक ने दिया। संगोष्ठी और काव्य पाठ में हिन्दी विभाग के शिफ्ट- 1 के विभागाध्यक्ष डाॅ. मनोज सिंह और सहायक प्राध्यापिका डॉ. हर्षलता शाह के अलावा बड़ी संख्या में विद्यार्थी और हिन्दीसेवी मौजूद रहे।