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अभाव से जूझता तिरुशूलम रेलवे स्टेशन

तिरुशूलम रेलवे स्टेशन अपना एक अलग महत्व रखता है क्योंकि इसके आसपास ही बस स्टॉप, चेन्नई हवाई अड्डा और मेट्रो स्टेशन स्थित हैं। ऐसे में...

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Thirushulam railway station battling for lack

Thirushulam railway station battling for lack

चेन्नई।तिरुशूलम रेलवे स्टेशन अपना एक अलग महत्व रखता है क्योंकि इसके आसपास ही बस स्टॉप, चेन्नई हवाई अड्डा और मेट्रो स्टेशन स्थित हैं। ऐसे में हवाई यात्री और एयरपोर्ट कर्मचारियों के लिए लोकल ईएमयू से सफर करना आसान होता है। यात्रियों की आवाजाही बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था का पूरी तरह अभाव है। न तो इस रेलवे स्टेशन पर पेयजल की व्यवस्था है और न ही शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा।

वैसे यह एक छोटा स्टेशन है जिस पर केवल टीनशेड लगाया हुआ है और उनके नीचे यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है। इस स्टेशन पर टिकट खिडक़ी भी अंडर पास में स्थित है जबकि धरातल पर कोई सुविधा नहीं है।

चेन्नई बीच एवं ताम्बरम रूट पर स्थित होने के कारण इस रेलवे स्टेशन से दिनभर में कई ईएमयू टे्रनें गुजरती हैं और बड़ी संख्या में यात्रियों का आवागमन होता है। छोटा होने के बावजूद यह स्टेशन किसी बड़े स्टेशन से कम नहीं है।

हवाई यात्रियों और हवाई अड्डे के कर्मचारियों का कहना है कि लोग रात को इस रेलवे स्टेशन पर जाने से कतराते है क्योंकि न तो सबवे पर कोई सुरक्षा की व्यवस्था है और न ही स्टेशन पर। ऐसे में रात के समय यात्रियों को हमेशा असामाजिक तत्वों का भय लगा रहता है।

दैनिक यात्री दिनेश कुुमार ने कहा कि इस स्टेशन पर सुविधाओं की कमी है और सुरक्षा की भी कोई व्यवस्था है ऐसे में यात्री रात को ट्रेन के बजाय बस से सफर करना ज्यादा मुनासिब मानते हैं। हालांकि बस में किराया अधिक देना होता है।

यात्रियों का कहना है कि वैसे यहां अंडरपास में शौचालय की व्यवस्था है लेकिन वह केवल सवेरे १० से सायं ५ बजे तक हरी खुला मिलता है। बाकी समय तो उस पर ताला लगा नजर आता है। एक महिला यात्री ने बताया कि शाम को शौचालय बंद होने से वृद्धों एवं बच्चों को बहुत परेशानी होती है।

यात्रियों की एक अन्य परेशानी यह भी है कि शौचालय का उपयोग करने वालों के लिए कोई निश्चित दर तय नहीं है उस पर रहने वाला कर्मचारी यात्रियों से पांच से दस रुपए तक वसूल लेता है। ताम्बरम निवासी सूरज ने बताया कि शौचालय जाने के लिए उनको कर्मचरी के अडिय़ल रवैये को झेलना पड़ता है।

उद्घोषणा की व्यवस्था नहीं होने के बारे में पूछे जाने पर स्टेशन के एक कर्मचारी ने बताया कि स्पीकर हैं लेकिन उद्घोषणा करने की कोई सुविधा नहीं है।नाम न छपने की शर्त पर एक रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारी ने बताया कि 30 फीसदी पद खाली हैं और यहां आरपीएफ का स्टाफ भी छोटा है। अगर ये पद भरे जाते हैं, तो हम त्रिशूलम रेलवे स्टेशन पर बेहतर सुरक्षा मुहैया करवा सकते हैं।

पार्किंग सुविधा भी नहीं

स्टेशन पर पार्किंग की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है इसलिए यात्रियों को अपने वाहन सडक़ पर ही पार्क करने पड़ते है। ऐसे में दुपहिया वाहन के चोरी होने की आशंका बढ़ जाती है। यहां आए दिन दुपहिया वाहन चोरी होने की खबरंे आती हैं। इसके साथ ही कैंटीन का अभाव और उद्घोषणा प्रणाली भी स्टेशन का उपयोग करने वाले रेल यात्रियों के संकट जैसा प्रतीत होता है।