चेन्नई

उत्तर और दक्षिण का संंबंध शरीर और आत्मा का

एसआरएम में तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू राजस्थान पत्रिका मीडिया पार्टनर बहुभाषिकता और अनुवाद का विशाल इन्द्रधनुषी क्षेत्र है भारत

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Sep 27, 2022
उत्तर और दक्षिण का संंबंध शरीर और आत्मा का

चेन्नई. भारतीय सभ्यता संस्कृति के बहुआयामी और बहुभाषी स्वरूप की चर्चा, उत्तर और दक्षिण के बीच सहकार व अंतर्संवाद, भाषा सीखने की प्रयोजनशीलता और तमिलनाडु सहित दक्षिणी राज्यों में हिन्दी के विकास व विस्तार जैसे बिन्दुओं के साथ केंद्रीय हिन्दी निदेशालय और एसआरएम आइएसटी के मानविकी संकाय के हिन्दी विभाग की तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का मंगलवार को उद्घाटन हुआ। 'दक्षिण में हिन्दी की लोकप्रियता' शीर्षक संगोष्ठी में राजस्थान पत्रिका मीडिया पार्टनर है।

बीज वक्तव्य में विक्रम विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. हरिमोहन बुधोलिया ने तमिलनाडु को संतों, पंडितों व विद्वानों की भूमि बताते हुए नमन किया। विषय की सार्थकता पर उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में जो हिन्दी में कार्य हो रहा है उसकी झलक मात्र से यह स्वत: स्पष्ट है। उत्तर और दक्षिण का संबंध शरीर व आत्मा का है। आप मातृभाषा से प्रेम रखें तो मौसी के रूप में हिन्दी के प्रति प्रेम और अनुराग बनाए रखें।

दक्षिण में शोध और साहित्य सृजन

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लेखक बी.एल. आच्छा ने कहा, भारत अपने प्रदेशों की बहुभाषिकता और अनुवाद का विशाल इन्द्रधनुषी क्षेत्र है। अंग्रेजी और पाश्चात्य सभ्यता के गहरे प्रभाव के बावजूद हिन्दी और भारतीय भाषाओं ने अपनी सांस्कृतिक जडें छोड़ी नहीं है। आज हिन्दी ने डेढ़ सौ वर्षों में वह छवि बनाई है, जिससे संयुक्त राष्ट्र की भाषा के साथ विश्वभाषा बनने की राह दिख रही है। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर हिन्दी ही नहीं भारतीय भाषाएं भी अंग्रेजी को टक्कर दे रही है। यदि साहित्य और पाठ्यक्रमों में देखा जाए तो इतना सृजन और शोध कार्य हुआ है कि दक्षिण भारत में हिन्दी साहित्य का इतिहास लिखा जा सकता है।

भाषा अंतरण पर हो कार्य

एसआरएमआइएसटी के संकाय अध्यक्ष ए. दुरैस्वामी ने भाषा के विकास विस्तार में डिजिटल मीडिया की भूमिका को रेखांकित करते हुए ऐसे ऐप्स निर्माण पर जोर दिया जो भाषा अंतरण (कन्वर्जन ऑफ लैंग्वेज) की सुविधा प्रदान करे। डिप्टी डीन डा. एस. अल्बर्ट एंथोनी राज ने कहा कि एक से अधिक भाषाएं सीखने से देश व दुनिया में रोजगार के अवसर खुलते हैं। संस्थान की हिन्दी विभागाध्यक्ष डा. एस. प्रीति ने सभी का स्वागत किया।

केंद्रीय हिन्दी निदेशालय नई दिल्ली के सहायक निदेशक (भाषा) डा. मोहम्मद नसीम, निदेशालय चेन्नई के उप निदेशक एस. श्रीनिवासन, प्रो. बहादुर सिंह परमार, प्रो. दिलीप कुमार मेधी, प्रो. जयचंद्रन रामचंद्रन, डा. रमेश यादव व डा. विष्णु कुमार राय ने भी अपने विचार रखे। राजस्थान पत्रिका चेन्नई संस्करण के प्रभारी संपादक डा. पी. एस. विजयराघवन ने तमिलनाडु सहित दक्षिण में राजस्थान पत्रिका की लोकप्रियता और प्रसार के बारे में बताया। पूर्व छात्रा हरिणी राधाकृष्णन ने भावपूर्ण भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी। विद्यार्थियों अन्वेशा दास, यशाविनी और विजय भसीन ने मंच संचालन किया और सहायक प्रोफेसर डा. एस. रजिया बेगम ने आभार माना।

Published on:
27 Sept 2022 08:13 pm
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