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VIDEO : हिन्दी में कुशलता खोलेगी सफलता के द्वार

विश्व युवा कौशल दिवस के उपलक्ष्य में गुरु नानक कॉलेज और राजस्थान पत्रिका की कार्यशाला

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चेन्नई. हिन्दी भाषा में निपुण होकर कैसे केंद्र सरकार के कार्यालयों व डबिंग जगत की दुनिया में अपना मुकाम बनाया जा सकता है, के बारे में अवगत होकर गुरु नानक कॉलेज (जीएनसी) में अध्ययनरत विद्यार्थियों के चेहरों पर आत्मविश्वास दिखाई दिया। विश्व युवा कौशल दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को कॉलेज प्रांगण में जीएनसी और राजस्थान पत्रिका की ओर से आयोजित ‘कौशल बढ़ाएं, संभावनाएं बनाएं’ विषयक कार्यशाला को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने उक्त विचार रखे। दीप प्रज्वलन और ज्ञानी के प्रार्थना गीत से कार्यशाला की शुरुआत हुई। प्राचार्य एम. जी. रघुनाथन ने स्वागत भाषण में हिन्दी की महत्ता को रेखांकित किया कि इस भाषा का अध्ययन ही अपने आप में कौशल विकास है।

राजस्थान पत्रिका चेन्नई के प्रभारी संपादक डा. पी. एस. विजयराघवन ने पत्रिका के रीडर्स फेस्ट की जानकारी देते हुए कहा कि यह कार्यशाला विद्यार्थियों को कॅरियर बनाने में मदद करेगी। उन्होंने समाचार गठन के पांच डब्ल्यू के फार्मूले के अनुरूप कौशल विकास के पांच तत्वों को तय करने की प्रेरणा दी।

आत्मनिर्भरता का मार्ग

डबिंग के क्षेत्र में कार्यरत डा. मंजू रुस्तगी ने बताया कि आज के परिवेश में कैसे आप अपनी भाषा और आवाज के बूते सुनहरा कॅरियर बना सकते हैं। डबिंग के क्षेत्र की बारीकियों को विस्तार से समझाते हुए रुस्तगी ने बताया कि अपनी खूबियों को पहचानें और उसमें महारत हासिल करने की कोशिश करें। इसके लिए आपको समय पाबंद, अनुशासित और नियत अभ्यास करना होगा। प्रभावी उच्चारण, निरंतर पढऩे और आत्मविश्लेषण के गुण से आप इस डबिंग के क्षेत्र में अवश्य सफल हो सकते हैं। यह वह क्षेत्र है जो आत्मनिर्भरता का मार्ग खोलता है।

हिन्दी पढ़ने वालों के लिए अधिक अवसर

दक्षिण रेलवे के पूर्व उपमहाप्रबंधक (राजभाषा) ने कहा कि अन्य विषयों की तुलना में हिन्दी पढ़ने वाले विद्यार्थियों के पास केंद्र सरकार की नौकरियों में ज्यादा अवसर होते हैं। उन्होंने विभागवार उपलब्ध अवसरों का वर्णन करते हुए भाषाई कौशल में निपुण होने की प्रेरणा दी। सिंह ने विशिष्टता हासिल करने पर बल देते हुए कहा कि आप अवसरों को पहचानेंगे तो भाषाई कौशल के साथ अपना कॅरियर बना पाएंगे।

हिन्दी विभागाध्यक्ष डा. स्वाति पालीवाल ने आभार ज्ञापित करते हुए विद्यार्थियों से कहा कि आप घर जाकर मनन करें कि आज क्या सीखा और इससे आपका कॅरियर कैसे संवर सकता है? कार्यशाला के आयोजन में हिन्दी विभाग की डा. अनिता पाटिल, डा. गुडिय़ा चौधरी, डा. डॉली और रेखा वर्मा का सहयोग रहा जिन्होंने मंच संचालन भी किया।