
कहानी लेखन में दूरदृष्टि एवं स्वाध्याय की महत्वपूर्ण भूमिका
चेन्नई. वल्लीयम्माल कॉलेज फॉर वीमेन में कहानी लेखन और कहानी वाचन पर हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। हिंदी विभागाध्यक्ष मंजु रुस्तगी ने कहा कि हिंदी के प्रचार प्रसार में कहानियों ने एक महत्ती भूमिका निभाई है।
पंचतंत्र और हितोपदेश की कहानियों ने हमेशा ही आकर्षित किया है लेकिन परिदृश्य बदलने के कारण बच्चे पुस्तकों से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे में उनमें सृजनात्मक कौशल को विकसित करने के लिए यह कार्यशाला आयोजित की गई है। कार्यशाला की मुख्य अतिथि रही डॉ. सुधा त्रिवेदी जो एम. ओ. पी. वैष्णव कॉलेज की भाषा विभाग एवं हिंदी विभाग की अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहानियों के उद्भव और विकास को बताते हुए कहानी के छ: तत्वों को विस्तारपूर्वक समझाया। कथावस्तु, पात्र, वातावरण, भाषा शैली, संवाद और उद्देश्य घटकों के बारे में बताते हुए उन्होंने विदेशी लेखकों के भी विचार साझा किए।
उन्होंने कहा कि सशक्त विषय के साथ भाषा पात्रानुसार तथा शीर्षक आकर्षक होना चाहिए। कहानी लेखन में दूरदृष्टि एवं स्वाध्याय की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि प्रेमचन्द, फणीश्वरनाथ रेणु, चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानियां आज भी अपनी इन्हीं विशेषताओं के कारण प्रासंगिक हैं। पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के द्वारा उन्होंने पंचतन्त्र की कहानियों को दिखाया और समझाया कि आपके लेखन का उद्देश्य समाज हित होना चाहिए। यदि कहानी यथार्थ की समस्याओं को दर्शाती है तो उसमें समाधान भी निहित होना चाहिए।
कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. टी. वी.एस. पद्मजा ने मुख्य अतिथि का सम्मान किया और छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सृजनात्मक लेखन के लिए आवश्यक है कि आप अपने आस पास की चीजों को देखो, सुनो और खूब पढ़ो तभी आप एक अच्छे कहानीकार बन सकते हैं।
कार्यशाला का आरम्भ मधुमिता और मानसा की सरस्वती वंदना से हुआ, संचालन भामा मिश्रा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन माहेश्वरी ने किया। साहित्या, पूजा, नम्रता, साक्षी, दुर्गा ने विशेष रूप से सहयोग दिया।
Published on:
01 Oct 2018 05:52 pm
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