
बीज निगम की मऊसहानियां स्थित जमीन
छतरपुर. मऊसहानियां स्थित मध्यप्रदेश राज्य बीज एंव फॉर्म विकास निगम के कृषि फॉर्म की १३९ एकड़ जमीन की बिक्री हो गई। प्रशासन की जानकारी में मामला आने के बावजूद तीन साल में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सरकारी जमीन पर किसानों के नाम दर्ज कर जमीन की खरीद बिक्री की गई। इसकी जानकारी होने पर बीज निगम ने रिकॉर्ड सुधार के लिए राजस्व विभाग को पत्र भी लिखे, लेकिन रिकॉर्ड सुधार नहीं हुआ और धीरे-धीरे जमीनों पर काबिज किसानों के नाम दर्ज होते गए और फिर जमीन की खरीद बिक्री होने लगी।
जिला योजना समिति की बैठक में उठा था मुद्दा
जमीन बेचने के मामले में तात्कालीन प्रभारी मंत्री बृजेन्द्र सिंह राठौर ने 7 दिन में जांच करने के आदेश दिए हैं। प्रभारी मंत्री ने ये आदेश टीकमगढ़ सांसद डॉ. वीरेन्द्र कुमार के प्रतिनिधि एडवोकेट धीरेन्द्र नायक द्वारा जिला योजना समिति की बैठक में मुद्दा उठाने के बाद अधिकारियों के प्रतिवेदन पर जारी किए हैं। प्रभारी मंत्री ने कलेक्टर मोहित बुंदस को सात दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। सांसद प्रतिनिधि धीरेन्द्र नायक ने इस मामले में बीज निगम के अधिकारियों, तहसीलदार नौगांव और पटवारी मउसहानियां द्वारा मिलीभगत से बीज निगम की जमीन बेचने का आरोप लगाया था।
यद्द है पूरा मामला
वर्ष 1954 में नौगांव के मऊसहानियां में मध्यप्रदेश राज्य बीज एवं फॉर्म विकास निगम के कृषि फॉर्म की स्थापना की गई थी। इसके लिए डिप्टी कमिश्नर छतरपुर ने डायरेक्टर एग्रीकल्चर विन्ध्यप्रदेश रीवा और अतिरिक्त अस्सिटेंट डायरेक्टर एग्रीकल्चर नौगांव को बीज फॉर्म के लिए ली जाने वाली जमीन के खसरा नंबर और किसानों के नाम प्रस्तावित करते हुए कृषि विभाग को भूमि सौंपी थी। बीज निगम को सौंपी गई 151 हेक्टेयर जमीन में पटवारी मौजा मऊ की 127.25 एकड़ भूमि और पटवारी मौजा नयागांव की 245.91 एकड़ जमीन शामिल थी, जिसमें कुछ जमीन सरकारी भी थी। बीज फॉर्म की स्थापना के बाद मौज मऊ के किसानों की भूमि शासन के नाम हो गई, लेकिन मौजा नयागांव के किसानों की भूमि जो उस समय गैर हकदार(कब्जेदार) थे, उनकी जमीन शासन के नाम ट्रांसफर नहीं हो सकी। वर्ष 1978 में 24 नवंबर को नयागांव पटवारी ने 28 किसानों की सूची सहित 56.404 हेक्टेयर लगभग 139.37 एकड़ जमीन का ब्यौरा बीज निगम को सौंपा। सूची के आधार पर बीज निगम के अधिकारियों ने किसानों का नाम हटाकर बीज निगम का नाम दर्ज करने के लिए राजस्व विभाग से कई बार पत्राचार किया गया। लेकिन लापरवाही के चलते जमीन शासन के नाम दर्ज नहीं हो सकी। जिसका लाभ लेकर किसानों ने राजस्व, बीज निगम के अधिकारियों से मिलीभगत कर जमीन को अपने नाम हकदार दर्ज करा लिया और शासन की 56 हेक्टेयर जमीन की खरीद-बिक्री कर दी गई।
अधिकारियों पर ये है आरोप
शिकायतकर्ता का कहना है कि शासन की जमीन की खरीद बिक्री में बीज निगम के अधिकारियों, तहसीलदार और पटवारी की मिलीभगत रही है। अधिकारियों ने जानबूढकर शासन की जमीन पर किसानों को हकदार बनाकर जमीन की खरीद बिक्री होने दी। उन्होंने ये भी आरोप लगाया है कि वर्तमान में एक कॉलोनाइजर की कॉलोनी के लिए बीज निगम की जमीन से रास्ता तक दी गई है। शासन की जमीन की बिक्री के बारे में जिला योजना समिति में मुद्दा उठाने के बाद प्रभारी मंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि बीज निगम द्वारा बीज तैयार करने वाले फॉर्म की जमीन को अधिकारियों ने खुर्द-बुर्द कर दिया है।
Published on:
16 Nov 2022 06:35 pm
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