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अफॉर्डेल हाउस प्रोजेक्ट के 228 मकान बनकर तैयार, नहीं हो पा रहा आवंटन

बजट न मिलने 90 फीसदी निर्माण पूरा होने के बाद से अटका है काम ईडब्ल्यूएस के 72, एलआईजी 60 और एमआईजी 96 मकानों का मामला

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खरीददारों का भी पैसा फंसा

खरीददारों का भी पैसा फंसा

छतरपुर। सस्ते मकानों के जरिए प्रत्येक आवासहीन व्यक्ति को मिलने वाले अपने घर का सपना चकनाचूर होता नजर आ रहा है। केन्द्र सरकार से 3 साल पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने छतरपुर को इस बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट की सौगात दी थी। लेकिन जैसे ही 2 साल पहले मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ 50 करोड़ रूपये की लागत से बने भवनों का बजट कांग्रेस सरकार ने रोक दिया। बजट पर ग्रहण लगते ही नगर पालिका की प्राथमिकताएं भी बदल गईं और तब से लेकर अब तक प्रोजेक्ट अटका हुआ है।


ये है पूरा मामला
भारत सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत छतरपुर नगर पालिका को कुल 1716 आवास निर्माण कर जरूरतमंद लोगों को नो प्रोफिट-नो लोस पर बेचने के लिए अफॉर्डेबिल हाउसिंग प्रोजेक्ट (एएचपी) की स्वीकृति दी थी। इस योजना के तहत 1248 ईडब्ल्यूएस, 312 एलआईजी और 156 एमआईजी बहूमंजिला मकानों का निर्माण किया जाना था। तत्कालीन नगर पालिका की परिषद ने इस बड़े प्रोजेक्ट को हांथों-हाथ लिया और गौरईया रोड पर आवंटित जमीन को अपने कब्जे में लेकर तत्काल मकान बनाना शुरू कर दिये। पहले चरण में 72 ईडब्ल्यूएस, 60 एलआईजी और 96 एमआईजी बहूमंजिला भवनों का निर्माण 90 प्रतिशत पूर्ण हो गया लेकिन तभी मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो गया और इन 90 प्रतिशत निर्मित भवनों के पूरा होने का काम अटका गया।


ठेकेदार का पैमेंट भी रोका
सूत्र बताते हैं कि इस बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट का टेंडर झांसी के रमेश चन्द्र गुप्ता को मिला था। गुप्ता ने इन भवनों का निर्माण किया लेकिन बाद में उन्हें मिलने वाला 6 करोड़ रूपये का पैमेंट तत्कालीन कांग्रेस सरकार के जनप्रतिनिधियों ने रूकवा दिया जिस कारण ठेकेदार ने भी आगे का काम करने से मना कर दिया। अगर नगर पालिका द्वारा इस प्रोजेक्ट को निर्मित करने वाले ठेकेदार का भुगतान कर दिया गया होता तो अब तक यह भवन न सिर्फ गुलजार हो गए होते बल्कि दूसरे चरण के भवनों का निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में पहुंच गया होता।

खरीददारों का भी पैसा फंसा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस महत्वाकांक्षी योजना के शुरू होने पर खरीददारों ने रूचि ली। भवनों के निर्माण कार्य के दौरान ही लगभग 23 खरीददारों ने बुकिंग राशि जमा कर एलआईजी-एमआईजी बुक कर लिए थेे। अब उनका भी बुकिंग का पैसा फंसा हुआ है और वे नगर पालिका के चक्कर काट रहे हैं। गरीब लोगों को सस्ती में दिए जाने वाले ईडब्ल्यूएस का आवंटन भी नहीं हो पा रहा है।

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