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खजुराहो में बिखरी नन्हे कलाकारों की स्वर्णिम आभा: मणिपुरी और भरतनाट्यम की जुगलबंदी से जीवंत हुई शास्त्रीय परंपराएं, दशावतार और नटराज स्तुति ने मोहा दर्शकों का मन

केरल, मणिपुर और उत्तराखंड की नन्ही प्रतिभाओं ने भक्ति, लय और भावपूर्ण मुद्राओं से खजुराहो के मंच पर रचा इतिहास खजुराहो नृत्य समारोह के अंतर्गत राष्ट्रीय खजुराहो बाल नृत्य महोत्सव अब अपने पूरे शबाब पर है। महोत्सव के पांचवें दिन बुधवार को नन्हे कलाकारों ने मणिपुरी और भरतनाट्यम शैलियों के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय परंपराओं […]

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प्रस्तुति देते कलाकार

केरल, मणिपुर और उत्तराखंड की नन्ही प्रतिभाओं ने भक्ति, लय और भावपूर्ण मुद्राओं से खजुराहो के मंच पर रचा इतिहास

खजुराहो नृत्य समारोह के अंतर्गत राष्ट्रीय खजुराहो बाल नृत्य महोत्सव अब अपने पूरे शबाब पर है। महोत्सव के पांचवें दिन बुधवार को नन्हे कलाकारों ने मणिपुरी और भरतनाट्यम शैलियों के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय परंपराओं का ऐसा मनोहारी प्रदर्शन किया कि दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए।

मणिपुरी नृत्य: दशावतार और कृष्ण-लीला का दिव्य चित्रण

कार्यक्रम की शुरुआत मणिपुर की 13 वर्षीय अशेम लेम्बिसाना चानु के दशावतार गायन और नृत्य से हुई, जिसमें भगवान विष्णु के दस अवतारों को बेहद सजीव ढंग से मंच पर उतारा गया। इसके बाद 12 वर्षीय लेइशेम्बी नमराम ने जयदेव के गीत गोविंद से प्रेरित हरि रीहा की प्रस्तुति दी। उन्होंने अपनी सौम्य मुद्राओं से भगवान कृष्ण और चंद्रबाली की प्रेमपूर्ण लीलाओं का जीवंत प्रदर्शन कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

भरतनाट्यम: मुद्रा, लय और भक्ति का संगम

केरल की नीतारा नायर ने भरतनाट्यम की शुरुआत अथिवो अल्लथिवो से की, जिसमें उनके नृत्य का तकनीकी पक्ष और मुद्राएं देखते ही बनती थीं। वहीं, 11 वर्षीय नतानिया सैमुअल ने नटेश कौतुवम् के जरिए भगवान शिव के नटराज स्वरूप की वंदना की। उनके त्रिशूल और डमरू को दर्शाने वाले भावों ने शास्त्रीय शुद्धता का परिचय दिया। नतानिया ने तिल्लाना की तेज गति और ऊर्जावान प्रस्तुति से अपने नृत्य कौशल की गहरी साधना का प्रमाण दिया।

समापन: भो शम्भो के साथ गूंजी शिव भक्ति

महोत्सव के पांचवें दिवस का समापन उत्तराखंड की स्वास्तिका जोशी के भरतनाट्यम से हुआ। उन्होंने गणेश श्लोकम् के साथ शुरुआत कर कीर्तनम् - भो शम्भो प्रस्तुत किया। राग रेवती में निबद्ध इस प्रस्तुति में भक्ति और अभिव्यक्ति का ऐसा सुंदर संगम दिखा, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

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