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एक साल में 251 मरीज घटे लेकिन अब भी फाइलेरिया के 681 सक्रिय मरीज

ग्रामीण इलाके में मिल रहे मरीज, मच्छरजनित बीमारी को लेकर जागरुकता की कमी

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ग्रामीण इलाके में मिल रहे मरीज

ग्रामीण इलाके में मिल रहे मरीज

छतरपुर। जिले में फाइलेरिया के मरीजों की संख्या पिछले एक साल में घटी है। जिले में सक्रिय 932 मरीजों में से अब 681 केस ही एक्टिव हैं, एक साल में 251 मरीज कम हुए हैं। लेकिन अभी भी मच्छर जनित इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरुकता की कमी है। जिसके चलते पूरे जिले में ग्रामीण इलाके में फाइलेरिया के मरीज मिल रहे हैं। हालांकि जिले में केवल सटई क्षेत्र ही एक ऐसा इलाका है, जहां फाइलेरिया का एक भी मरीज नहीं है। जबकि जिले के छोटे छोटे गांवों में मरीज मिल रहे हैं।

मच्छर से फैल रही बीमारी
फाइलेरिया मच्छरों के जरिए फैलता है। खासकर परजीवी क्यूलैक्स फैंटीगंस मादा मच्छर के काटने से हाथी पांव यानि फाइलेरिया होता है। जब ये मच्छर फाइलेरिया से ग्रस्त मरीज को काटेगा तो वह संक्रमित हो जाता है और स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो फाइलेरिया के विषाणु उसके रक्त के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते है और संक्रमित कर देते हैं। इस बीमारी में एक खास बात और है कि ज्यादातर संक्रमण का लंबे समय बाद पता चलता है। बीमारी के कोई लक्षण साफतौर पर दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन बुखार, बदन में खुजली और पुरुषों के जननांग और उसके आसपास सूजन व दर्ज की समस्या दिखाई देने लगती है। इसके अलावा पैरों और हाथों में सूजन, हांथी पाव, और हाईड्रोसिल अंडकोषों की सूजन भी इसके मुख्य लक्षणों में शामिल हैं। इस बीमारी की रोकथाम ही बीमारी का इलाज है।

जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. जीएल अहिरवार का कहना है कि फाइलेरिया से बचाव के लिए मच्छरों से बचे। इसके लिए घर के आसपास व अंदर साफ सफाई रखे। पानी जमान न होने दें। समय समय पर कीटनाशक का छिड़काव करें और सोते समय हाथ और पेरौं पर सरसों या नीक का तेल लगाएं।

फैक्ट फाइल
गौरिहार में सबसे ज्यादा मरीज

नौगांव 13
ईशानगर 114
छतरपुर शहर 87
बड़ामलहरा 47
बकस्वाहा 49
राजनगर 67
लवकुशनगर 81
गौरिहार 156