
पहाड़ी बांध
छतरपुर. टीकमगढ़ और छतरपुर जिले में लगातार बारिश से धसान नदी का जल स्तर बढ़ गया है। बानसुजारा बांध के ऊपर धसान नदी में पानी की आवक बहुत तेजी से बढ़ रही है। बांध की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए रविवार सुबह 10 बजे बांध के सभी 12 गेट खोलकर नदी में लगभग 28 हजार क्यूसेक पानी सुरक्षित रूप से छोड़ा गया है। इससे बांध के नीचे धसान नदी में लगभग 8 से 12 फीट जलस्तर बढ़ गया है। जिला प्रशासन छतरपुर द्वारा आमजन से अपील की गई है, नदी क्षेत्र से दूर रहें और नदी के आसपास बिल्कुल नही आएं। सुरक्षित रहें सजग रहें।
टीकमगढ व छतरपुर जिलों में हो रही बारिश के कारण धसान नदी पर टीकमगढ जिला में स्थित बानसुजारा बांध के सभी 12 गेट खोलकर धसान नदी में 28000 क्यूसेक (क्यूबिक फुट प्रति सेकेन्ड) पानी छोड़े जाने से धसान नदी में आने वाले पानी की मात्रा बढ गई है। इसलिए लहचूरा बांध की सुरक्षा हेतु लहचूरा बांध के आवश्यकतानुसार फाटक खोलकर नीचे धसान नदी में लगभग 30000 से लेकर 40000 क्यूसेक तक पानी की निकासी की गई है। वर्तमान में लहचूरा बांध से निकली अर्जुन फीडर नहर को 1400 क्यूसेक जलप्रवाह से संचालित करते हुये अर्जुन बांध को भरा जा रहा है, साथ ही धसान मुख्य नहर को 400 क्यूसेक से चलाकर खरीफ फसलों हेतु सिचाई सुविधा दी जा रही है। अधिशासी अभियंता लहचूरा बांध ने बताया कि लहचूरा बांध से गेटों को खोलने की उपरोक्त स्थिति में धसान नदी किनारे बसे ग्रामों के समस्त निवासियों,चरवाहों व मछुआरों आदि सभी से अपील है कि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचने के लिये कृपया नदी से दूर रहें।सहयोग हेतु सादर अनुरोध है।
जिले में शनिवार की रात से सावन की रिमझिम बारिश का दौर शुरू हो गया, जो रविवार को भी जारी रहा। जिले के आठ वर्षामापी केंद्रों के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 24 घंटे में 1.2 इंच औसत बारिश दर्ज की गई है। जिसमें सबसे ज्यादा राजनगर इलाके में 2.5 इंच बारिश दर्ज हुई है। वहीं, बिजावर, बड़ामलहरा, बकस्वाहा इलाके में 1.3 इंच बारिश और गौरिहार में 1.1 इंच बारिश दर्ज हुई है। सबस कम बारिश लवकुशनगर में 0.9 इंच और छतरपुर में 0.6 इंच दर्ज हुई है। जिले में 1 जून से अब तक बारिश का आंकड़ा 16.8 इंच पहुंच गया है। जो पिछले साल इसी अवधि में 16.5 इंच था। गौरतलब है कि जिले की औसत बारिश 42.3 इंच है। पिछले वर्ष जिले में 33.4 इंच बारिश दर्ज हुई थी।
मौसम केंद्र खजुराहो के प्रभारी आरएस परिहार ने बताया कि अगले 2 दिन तक तेज बारिश होती रहेगी। उन्होंने बताया कि झारखंड और पश्चिम बंगाल के आसपास साइक्लोनिक सर्कुलेशन लो प्रेशर एरिया बन गया है। मानसून ट्रफ इस लो प्रेशर एरिया के केंद्र से होते हुए सीधी, ग्वालियर यानी मध्यप्रदेश के उत्तरी हिस्से से गुजर रहा है। एक अन्य ट्रफ पूर्व-पश्चिम से होकर इन्हीं क्षेत्रों में एक्टिव है। दक्षिण-पश्चिमी हवाओं की बात करें तो इससे बराबर नमी आ रही है, जो प्रदेश को प्रभावित कर रही है। आज से सिस्टम आगे बढ़ेगा। इससे दक्षिण और मध्य हिस्से को प्रभावित करेगा। इसलिए कई जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट है। लगभग पूरा प्रदेश तरबतर होगा। इस दौरान आकाशीय बिजली गिरने और बाढ़ आने की आशंका भी है।
शनिवार की रात को शुरु हुआ रिमझिम बारिश का दौर रविवार को दिन भर चला। बारिश के इस सीजन का यह पहला दिन था जब इतने लंबे समय तक लगातार बारिश हुई। इस बारिश के साथ जिले के तमाम छोटे-बड़े नदी-नाले उफान पर आ गए हैं, वहीं शहरी इलाकों की गलियों से पानी भरे होने की खबरें सामने आई हैं।
जिले के ज्यादातर इलाकों में रविवार को दिन भर कभी तेज तो कभी रिमझिम बारिश होने का सिलसिला जारी रहा। अलसुबह से शहर में रिमझिम बारिश होती रही, जिसके चलते पूरा शहर बारिश से तरबतर हो गया। आसमान में काले बादल छाए रहे और बारिश के चलते मौसम में ठंडक घुल गई। उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले ही मौसम विभाग ने जिले में बारिश का अलर्ट जारी किया था, जो कि सही साबित हुआ है। लगातार हुई बारिश के बाद न केवल लोगों को गर्मी से निजात मिली, बल्कि किसानों के चेहरे पर भी खुशी का भाव है। छतरपुर शहर में बारिश के चलते बस स्टैंड के पास स्थित गुप्ता लॉज के आसपास पानी भर गया था, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होती रही और लोग इसे नगर पालिका की लापरवाही बताते रहे। देर शाम तक बारिश का दौर जारी रहा और संभावना है कि आने-वाले एक-दिनों तक जिले में इसी तरह का मौसम रहेगा।
शनिवार की रात से लेकर रविवार को दिन भर हुई बारिश के चलते जिले भर के तमाम छोटे-बड़े नदी नाले उफान पर आ गए। ईशानगर कस्बे के पास से निकली धसान नदी के पचेर घाट पर नदी का जल स्तर काफी बढ़ा हुआ था जिसे देखने के लिए यहां के नवनिर्मित पुल के ऊपर दिन भर लोगों की भीड़ जमा रही। हालांकि जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को नदी के पास न जाने की सलाह दी थी लेकिन मौके पर कोई रोकने वाला न होने के कारण लोग नदी का रौद्र रूप देखने यहां पहुंचते रहे। इतना ही नहीं कुछ स्थानीय मछुआरे जान जोखिम में डालकर नदी के किनारों पर मछली पकड़ते हुए भी नजर आए। वहीं दूसरी ओर बमीठा क्षेत्र की बन्ने नदी के उफान पर होने के कारण रनगुवां-काबर मार्ग का पुल डूब गया। हालांकि पुल डूबने के बावजूद लोग अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन करते रहे।
लगातार हो रही बारिश के चलते आकाशीय बिजली गिरने का खतरा बढ़ गया है, जिसको दृष्टिगत रखते हुए जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया के माध्यम से आकाशीय बिजली से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है। जारी एडवाइजरी में लोगों से अपील की गई है कि जैसे ही बादल की गरज सुनाई दे, तुरंत अपने आसपास के लोगों से दूरी बनाते हुए, अपने हाथों से कान को बंद करें। बिजली चमकने के दौरान आप खुले आसमान के नीचे हैं तो सबसे पहले नीचे झुककर पैरों और घुटनों को जोडकऱ बैठ जाएं, जमीन पर न लेटें और न ही जमीन पर हाथ लगाएं।
Published on:
05 Aug 2024 10:50 am
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