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छतरपुर शहर में सडक़ निर्माण में जमीन में दफन हो गए 4 दर्जन हैंडपंप, जलसंकट गहराने लगा

सार्वजनिक हैंडपंपों की हालत बदतर हो गई है। सडक़ निर्माण और चौड़ीकरण के चलते पिछले दो वर्षों में शहर के 4 दर्जन से अधिक हैंडपंप या तो दबा दिए गए या जमींदोज हो गए, जिससे जलसंकट गहराने लगा है।

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सटई रोड पर सडक़ निर्माण के बाद खराब पड़ा हैंडपंप

शहर में पेयजल व्यवस्था को सुधारने के लिए 75 करोड़ की अमृत परियोजना के तहत पाइपलाइन बिछाकर जल आपूर्ति की महत्वाकांक्षी योजना लागू की गई थी। नगर पालिका ने दावा किया था कि शहर के 29 हजार घरों में पानी पहुंचाया जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी अलग है। आज भी करीब 10 हजार घर ऐसे हैं जहां पानी की एक बूंद नहीं पहुंची है। खासतौर पर शहर के ऊंचाई वाले इलाके, जहां पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन जल आपूर्ति आज तक शुरू नहीं हो सकी। वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक हैंडपंपों की हालत बदतर हो गई है। सडक़ निर्माण और चौड़ीकरण के चलते पिछले दो वर्षों में शहर के 4 दर्जन से अधिक हैंडपंप या तो दबा दिए गए या जमींदोज हो गए, जिससे जलसंकट गहराने लगा है।

सडक़ के नीचे दब गए हैंडपंप


शहर में सटई रोड, महोबा रोड और नौगांव रोड जैसी मुख्य सडक़ों पर निर्माण के दौरान कई सार्वजनिक हैंडपंपों को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के खत्म कर दिया गया। इन हैंडपंपों से आसपास के दुकानदारों, राहगीरों और स्थानीय लोगों की प्यास बुझती थी, लेकिन अब वे सडक़ की परतों के नीचे दफन हो चुके हैं। नपा इंजीनियरिंग विंग ने हैंडपंपों को शिफ्ट करने या उनके स्थान पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने की बजाय सीधे उनके ऊपर ही सडक़ बना दी।

40 वार्डों में 1500 हैंडपंप, आधे खराब


नगर पालिका क्षेत्र के 40 वार्डों में करीब 1500 हैंडपंप हैं। दावा किया जाता है कि इनमें से 1000 ही चालू हालत में हैं। हालांकि आधे ही चालू नजर आते हैं। अनगढ़ टौरिया, नारायण बाग, औरिया मोहल्ला और हनुमान टौरिया जैसे इलाके तो पूरी तरह हैंडपंपों पर ही निर्भर हैं। यहां अमृत योजना के तहत पाइपलाइन तो बिछाई गई, लेकिन 7 साल बाद भी नलों में पानी नहीं आ सका। नारायण बाग में 250 से अधिक घर ऐसे हैं, जिनमें पानी नहीं आता। यहां केवल एक हैंडपंप है, जिससे पूरी बस्ती की प्यास बुझाई जाती है।

कम प्रेशर और पाइपलाइन लीकेज बनी चुनौती


शहर की आधी आबादी को नल से पानी मिल रहा है, लेकिन कम प्रेशर और लगातार हो रहे पाइपलाइन लीकेज से जल वितरण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। आकाशवाणी तिराहा और महोबा रोड पर हर हफ्ते पाइप फटने की खबरें सामने आती हैं। अयोध्या बस्ती में पिछले एक साल से पानी लीकेज की समस्या बनी हुई है, लेकिन अब तक उसका समाधान नहीं हो पाया है। नगर पालिका ने शहर में चार नई पानी की टंकियां बनाई हैं, जिससे अब कुल 15 टंकियों से जल आपूर्ति की जा रही है। बजट में 5 और नई टंकियों के निर्माण की योजना बनाई गई है।

गर्मी में पानी की मारामारी


पिछले वर्षों की तरह इस बार भी गर्मी में शहरवासियों को पानी के लिए जूझना पड़ सकता है। हैंडपंपों की उपेक्षा और नल कनेक्शनों से पानी न आना लोगों के लिए दोहरी मार है। खासतौर पर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सुबह से शाम तक पानी के लिए मशक्कत करते नजर आते हैं। सीताराम कॉलोनी, चेतगिरि कॉलोनी और नारायणपुरवा जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति हर साल भयावह होती जा रही है।

सीएमओ का बयान - शिकायत करें, समाधान करेंगे


नगर पालिका की सीएमओ माधुरी शर्मा ने कहा, शहर में जब से अमृत योजना शुरू हुई है, जल संकट की स्थिति नहीं बनी है। फिर भी अगर किसी क्षेत्र में समस्या है तो वहां गर्मी में टैंकरों या अन्य साधनों से पानी पहुंचाया जाएगा। लोग शिकायत करें, हम समाधान करेंगे। हैंडपंपों को भी दुरुस्त कराया जा रहा है।

फैक्ट फाइल


नगर पालिका क्षेत्र- 40 वार्ड
कुल आबादी- 2.50 लाख
हैंडपंप- 1500
चालू हालत में- 1000
ग्रामीण अंचल में हैंडपंप- 24000
ड्राई हैंडपंप- 410
लेवल डाउन- 20 हैंडपंप

पत्रिका व्यू


छतरपुर में जल संकट एक वास्तविक और गंभीर समस्या बनता जा रहा है। एक ओर करोड़ों खर्च कर जल आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने के दावे हैं, दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि लोगों को रोज पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता है। यदि समय रहते हैंडपंपों की मरम्मत, नलों में पानी की आपूर्ति और लीकेज की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो गर्मी में यह संकट और विकराल रूप ले सकता है।

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