30 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

6 माह की बच्ची को थी सिर्फ सर्दी-खांसी, लोहे की सलाखें दागकर किया उपचार

माता पिता अपनी 6 महीने की बच्ची को एक नीम हकीम के पास लेकर पहुंच गए। हकीम ने बच्ची का उपचार करने के लिए लोहे की गर्म सलाखों से उसका पेट दाग दिया।

2 min read
Google source verification
news

6 माह की बच्ची को थी सिर्फ सर्दी-खांसी, लोहे की सलाखें दागकर किया उपचार

छतरपुर/ एक तरफ जहां भारत डिजिटल इंडिया की ओर आगे बढ़ रहा है, उसी भारत में आज भी अंधविश्वास अपने पैर पसारे हुआ है। यहां आज भी कई लोगों को ऐसा लगता है कि, किसी बीमारी का उपचार दवा से नहीं बल्कि टोटकों से होता है। अंधविश्वास का एक ऐसा हीमामला मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से सामने आया है, जहां माता पिता अपनी 6 महीने की बच्ची को एक नीम हकीम के पास लेकर पहुंच गए। हकीम ने बच्ची का उपचार करने के लिए लोहे की गर्म सलाखों से उसका पेट दाग दिया। हैरानी की बात ये है कि, बच्ची सिर्फ सर्दी और खांसी की समस्या से ग्रस्त था।

पढ़ें ये खास खबर- दुष्कर्म के मामलों में फिर अव्वल रहा मध्य प्रदेश, 6 साल से कम उम्र की मासूमों को भी नहीं बख्शा


सलाखें दागने से बिगड़ी बच्ची की हालत

बता दें कि, जिले के ईशानगर रोड स्थित गहरवार पंचायत के नवरिया गांव में सर्दी खांसी से ग्रस्त छह माह की बच्ची को उसके माता-पिता गांव के एक हकीम के पास लेकर पहुंचे। हकीम सुखलाल अहिरवार ने बच्ची की सर्दी ठीक करने का उपचार स्वरूप बच्ची के पेट को गर्म सलाखों से दागने को कहा, जिसपर माता पिता की रजामंदी थी। लोहे की सलाखों से दागे जाने पर बच्ची के पेट पर गहरे जख्म पड़ गए। जिसकी पीड़ा से छह माह की मासूम कराह रही थी। साथ ही, उसकी सर्दी खांसी में भी कोई फायदा नहीं हुआ। जिससे चिंचित माता पिता ने बच्ची को अस्पताल में दिखाने का निर्णय लिया। शुक्रवार काे माता पिता बच्ची को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. लखन तिवारी ने जब बच्ची के पेट को देखा तो हैरान रह गए पेट को सलाखों से दागा गया था। बच्ची के पेट में सलाखों से दागे जाने के गहरे निशान बन गए हैं।

पढ़ें ये खास खबर- कैलाश का फिर विवादित बयान, 'अब सरकार बनी तो अधिकारियों को मुर्गा बनाकर पूछेंगे, तेरा क्या होगा कालिया'


डॉ. ने दिया उचित उपचार

डाॅक्टर तिवारी का कहना है कि, जीवन की पहली ठंड के कारण स्वभाविक तौर पर बच्चों को सर्दी खांसी की समस्या हो जाती है, इतने दिन पर्याप्त उपचार ना मिलने से बच्ची को निमोनिया हो गया है, जिसे सामान्य दवाओं से आसानी से ठीक किया जा सकता है। पर इतनी कुरूरता से बच्ची का उपचार कराना को मानसिक कुरूरता की निशानी है। इसमें जरा सी चूक बच्ची के लिए जानलेवा भी साबित हो सकती थी। उन्होंने बताया कि, फिलहाल बच्ची को सर्दी खांसी के साथ साथ गर्म सलाखों से बने जख्मों के उपचार की भी दवा दे दी गई है। एक-दो बार ड्रेसिंग करने पर बच्ची के घाव सूख जाएंगे। फिलहाल, बच्ची के माता पिता को ऐसे नीम हकीम के पास ना जाने की समझाइश भी दी गई है।

Story Loader