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कोरोना से 7 अधिकारी-कर्मचारियों की मौत, 3 को मदद के लिए चुना गया, सहायता किसी को नहीं

कोरोना योद्धा की मौत पर मिलने थे 50 लाख, डेढ साल बाद भी नहीं मिली फूटी कौड़ीआम लोगों को भी नहीं मिल पाई आर्थिक सहायता

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आम लोगों को भी नहीं मिल पाई सहायता

आम लोगों को भी नहीं मिल पाई सहायता

छतरपुर। जानलेवा कोरोना महामारी के दौरान आम जनता की हिफाजत में जिन कोरोना योद्धाओं ने अपने प्राणों की आहूति दे दी उनकी मदद के लिए सरकार द्वारा किए गए वादे कोरी घोषणा साबित हो रहे हैं। इन कोरोना योद्धाओं को सरकार से फूटी कौड़ी नहीं मिली है। जिले में 7 कोरोना योद्धाओं की मौत के मामले सामने आए थे। इनमें से तीन लोगों को पात्रता नियमों के मुताबिक 50 लाख की सहायता हेतु चुना गया लेकिन इन तीन मृतकों के परिवारों को भी आज तक कोई सहायता नहीं मिली है।

इन परिवारों को आज तक नहीं मिली मदद
छतरपुर जिले में कोरोना महामारी में शासन के निर्देश अनुसार विभिन्न सुरक्षा इंतजामों में प्रत्यक्ष रूप से अपनी सेवाएं देने वाले तीन शासकीय अधिकारी, कर्मचारियों की मौत के मामले चिन्हित किए गए हैं। इनमें पूर्व एसडीएम संतोष सिंह चंदेल, स्वास्थ्य विभाग के कार्यकर्ता रंजोड़ी अहिरवार और छतरपुर नगर पालिका में पदस्थ रहे कृष्णदत्त पाठक का नाम शामिल है। इन तीनों की मौत कोरोना की दूसरी लहर के दौरान संक्रमित होने के बाद हो गई थी। जानकारी के मुताबिक पिछले साल अप्रेल और मई के महीने में मौत के बाद इनके दस्तावेज राहत शाखा छतरपुर के माध्यम से भोपाल जा चुके हैं लेकिन अब तक किसी को कोई मदद नहीं मिली है। इतना ही नहीं कोरोना योद्धा के दायरे में आने वाले 7 लोगों ने मदद के लिए आवेदन किया था जिनमें से 4 आवेदनों को नियमों की आड़ में खारिज कर दिया गया।

आम लोगों को भी नहीं मिल पाई सहायता
कोरोना महामारी के दौरान जहां आम लोगों की जान गई तो वहीं सरकारी सिस्टम भी लोगों के प्रति बेरहम नजर आया। छतरपुर जिले में ही सैकड़ो लोग कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अपनी जान गवां बैठे लेकिन जिला प्रशासन ने तमाम मापदण्डों की जटिलताओं के कारण अब तक तीनों लहरों में सिर्फ 152 लोगों की मौत को ही कोरेाना से हुई मौत माना है। इसके बाद भी मरने वालों के सभी परिवारों को सरकार द्वारा घोषित 50 हजार रूपए की सहायता राशि नहीं मिल पाई है। जिले की राजस्व आंकेय शाखा से मिली जानकारी के मुताबिक अब तक जिले के 113 परिवारों को ही कोरोना से हुई मौत की सहायता राशि दी गई है। इन परिवारों को भी सहायता राशि पाने में लगभग एक साल का वक्त लग गया। 39 परिवार अब भी ऐसे हैं जिनके परिवार के सदस्य कोरोना ने छीन लिए लेकिन उन्हें शासन द्वारा दी जाने वाली सहायता राशि अब तक नहीं मिली।

नियम इतने जटिल की राशि मिलना मुश्किल
सहायता राशि की पात्रता के लिए सरकार ने इतने जटिल नियम बना रखे हैं कि कई परिवारों को यह राशि नहीं मिल पायी। मृतक के परिवार से संबंधित व्यक्ति की आरटीपीसीआर अथवा अस्पताल में की गई एंटीजन रेपिड किट की जांच रिपोर्ट मांगी गई। अस्पताल में भर्ती मरीज के दस्तावेज से लेकर संंबंधित नगर परिषद अथवा पंचायत द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र भी मांगा गया। जिन मृतकों की आरटीपीसीआर जांच नहीं हो सकी लेकिन वे सीटी स्कैैन रिपोर्ट में फेफड़ों के संक्रमण के कारण मारे गए उन्हें भी कोरोना से मृतक नहीं माना गया। मृतक के परिवारों को यह जागरूक नहीं किया गया कि उन्हें आवेदन किस कार्यालय में करने हैं। कई परिवार आवेदन ही नहीं कर सके जिसके कारण वे राशि लेने से वंचित रहे।