
Chhatarpur
छतरपुर। शहर से 10 किमी दूर रीवा-ग्वालियर नेशनल हाइवे पर ग्राम कदारी के पास बेशकीमती सरकारी जमीन पर रातों-रात एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग बना दिए जाने के मामले में प्रशासन शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करेगा। सरकारी जमीन पर काबिज लोगों के नाम एसडीएम ने गुरुवार को नोटिस जारी कराए हैं। अब शुक्रवार को पुलिस बल के साथ प्रशासनिक अमला सरकारी जमीन का सीमांकन करेगा। इसके बाद अगर सरकारी जमीन पर यूनिवर्सिटी बिल्डिंग बनी पाई जाएगी तो उसे जमींदोज करने की कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी। उधर इस मामले में लगातार दूसरे दिन भी एसडीएम सहित राजस्व अधिकारियों पर राजनैतिक दवाब आते रहे, लेकिन एसडीएम ने सिफारिश वाले फोन अटैंड नहीं किए। उनका कहना था कि यह कार्रवाई वे राजस्व मंत्री के निर्देश पर कर रहे हैं। जिस काम के लिए शासन ने उन्हें यहां भेजा है, उसे वह पूरी ईमानदारी से करके जाएंगे।
गौरतलब है कि जिस जमीन पर प्राइवेट यूनिवर्सिटी का भवन बनाया जा रहा है सरकारी रेकॉर्ड में करीब 100 एकड़ भूमि पहले फारेस्ट के नाम और फिर राजस्व विभाग के दर्ज है। लेकिन इसी में से 13 एकड़ पट्टे की सरकारी जमीन अपने नाम करवाकर उस पर यूनिवर्सिटी भवन बनाया जा रहा है। एसडीएम अनिल सपकाले के मुताबिक इस जमीन के खसरा नंबर 336/1 में अभय भदौरिया के द्वारा निजी यूनिवर्सिटी भवन बनाया जा रहा है जबकि यह जमीन राजस्व रेकार्ड 1956 के मुताबिक सरकारी है। उधर यूनिवर्सिटी संचालक का कहना है कि जिस जमीन पर यूनिवर्सिटी का निर्माण चल रहा है उसका खसरा नंबर 335 है एवं 336 खसरे की यह जमीन एक पूर्व सैनिक को सरकार ने पट्टे पर दी थी जिसके बाद वह जमीन लगभग पांच बार बिकी है। जमीन का 172 का डायवर्सन, रजिस्ट्री, वन विभाग की अनापत्ति सहित सभी दस्तावेज मौजूद हैं लेकिन एसडीएम पुराने राजस्व रेकार्ड के नाम पर उन्हें ब्लैकमेल कर रहे थे। वहीं एसडीएम का कहना है कि सैनिक को अस्थाई पट्टा पांच साल के लिए कृषि कार्य के लिए दिया गया था। उस जमीन को बेचा नहीं जा सकता था।
आज पुलिस बल की मौजूदगी में होगा सीमांकन :
एसडीएम अनिल सपकाले ने बताया कि गुरुवार आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम जिलेभर में था। इस कारण एक दिन के लिए कार्रवाई टाली गई है। शुक्रवार को कलेक्टर के निर्देशन में पुलिस बल के साथ राजस्व विभाग की टीम सरकारी जमीन का सीमांकन करने के लिए जाएगी। कार्रवाई के पहले संबधित काबिजदारों को नोटिस भी भेजे जा चुके हैं। अगर कार्रवाई के दौरान कोई भी व्यवधान डालता है तो उसके खिलाफ धारा ३५३ के तहत कार्रवाई की जाएगी। एसडीएम ने कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले लोग उन पर झूठे आरोप लगाकर कार्रवाई से रोकना चाह रहे हैं, लेकिन वे किसी भी दवाब में आकर कार्रवाई को नहीं रोकेंगे।
छतरपुर में सरकारी जमीनों की जमकर हुई बंदरबाट :
जिला मुख्यालय पर पहाड़ और छोटे झाड़ के जंगल के लिए आरक्षित जमीन की जमकर बंदरबाट हुई है। राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से जिला मुख्यालय पर चार इलाकों में चार बड़े सरकारी रकबा पर भूमाफियाओं ने हाथ साफ किया है। भू-माफियाओं ने सरकारी रेकॉर्ड में हेराफेरी करके कुछ वर्गफीट नहीं बल्कि 330 एकड़ जमीन का खुलेआम बंदरबाट किया है। इस दौरान कई कलेक्टर, एसडीएम व तहसीलदार आए और गए, लेकिन राजस्व के कर्मचारियों और भूमाफियाओं के गठजोड़ का ये खेल धड़्ल्ले से लगातार चलता रहा। यह पहला मामला है जब किसी एसडीएम ने आगे आकर सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराने का प्रयास किया है। अभी तक इस खेल को अंजाम देने के लिए आरक्षित जमीन को सरकारी रेकॉर्ड में पहले निजी जमीन बनाया जाता है, फिर उस पर प्लॉटिंग करके कॉलोनियां बसा दी जाती है। जबकि मध्यप्रदेश शासन के नाम से दर्ज पहाड़ और छोटे झाड़ के जंगल आरक्षित जमीन मानी जाती है। छतरपुर शहर के पलौठा और छतरपुर सदर पटवारी हल्का में इसी आरक्षित जमीन को सरकारी रेकॉर्ड में किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के बिना निजी लोगों के नाम पर चढ़ाया गया और फिर कुछ सालों तक फर्जी एंट्री लगातार रेकॉर्ड में दोहराते हुए इसे पक्का कर लिया गया। उसके बाद इन कीमती जमीनों की रजिस्ट्री करके प्लॉट के रूप में टुकड़ों में बेच दिया गया। कुछ ऐसा ही खेल कदारी तिराहा की 100 एकड़ जमीन का भी हुआ है। एसडीएम ने जब इस मामले में हाथ डाला तो उन पर पहले कार्रवाई रोकने दबाव आया, बाद में जब वे नहीं माने तो उनका तबादला करवा दिया गया। शासन स्तर पर जाकर एसडीएम ने जब अपना पक्ष रखा तो शासन से उन्हें यह कार्रवाई पूरी करने के लिए छूट दे दी गई।
Published on:
02 Aug 2019 06:00 am
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