
विरासत वन
पर्यटक नगरी खजुराहो में अब हरियाली या पर्यटन स्थल मात्र नहीं, बल्कि बच्चों के लिए शिक्षा और अनुभव का जीवंत केंद्र बन रहा है। मध्यप्रदेश के वन विभाग ने 17 एकड़ में विकसित किया गया 'विरासत वन', जहां पेड़ों, पौधों और जैव विविधता से जुड़े रहस्य बच्चे डिजिटल तरीके से सीखेंगे। प्रत्येक पेड़ और महत्वपूर्ण स्थल पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करते ही संबंधित वेबसाइट खुल जाएगी, जिसमें स्थानीय और वैज्ञानिक नाम, औषधीय गुण और सांस्कृतिक महत्व जैसी जानकारियां डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगी।
जैसा कि अमेरिका और जापान में पेड़ों पर क्यूआर कोड लगाकर शिक्षा और पर्यावरण जागरूकता दी जाती है, मध्यप्रदेश में यह पहला ऐसा प्रयास है। बच्चों और पर्यटकों के लिए वन भ्रमण को आसान और आकर्षक बनाने हेतु पगडंडियां, साइकिल ट्रैक और मनोरंजन आधारित सीखने के क्षेत्र तैयार किए गए हैं। डीएफओ ने कहा कि यहां बच्चे केवल जानकारी नहीं लेंगे, बल्कि देख, समझ और अनुभव करके सीखेंगे।बंजर भू-भाग को किया विकसितवनमंडलाधिकारी सर्वेश सोनवानी ने बताया कि यह वन पहले बंजर रहे भू-भाग को पुनर्जीवित करने का जीवंत उदाहरण है। विरासत वन में अब तक 25,000 से अधिक पौधे और 200 से अधिक प्रजातियां लगाई जा चुकी हैं। कार्य लगभग 90 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है और शेष कार्य जल्द पूरा होगा।
विरासत वन के भीतर नवग्रह वन, नक्षत्र वन, सप्तऋषि वन, लक्ष्मी वन, औषधीय वन और जैव विविधता वन जैसे विषयगत क्षेत्र विकसित किए गए हैं। इन वनों में लगाई गई वनस्पतियां भारतीय ज्ञान परंपरा, खगोल विज्ञान, स्वास्थ्य और अध्यात्म से संबंधित हैं। डीएफओ ने बताया कि बच्चे क्यूआर कोड के माध्यम से इन पौधों और जीवों के बारे में पूरी जानकारी सीखेंगे। इसके अलावा नेचर ट्रेल भी विकसित की गई है, जिससे बच्चों को बंजर भूमि से हरित वन में परिवर्तित भूमि की कहानी प्रत्यक्ष रूप से देखने और समझने का अवसर मिलेगा।
विरासत वन का समग्र स्वरूप विश्व प्रसिद्ध कंदरिया महादेव मंदिर की स्थापत्य योजना से प्रेरित है। मंदिर की ज्यामितीय संरचना को प्राकृतिक परिदृश्य में ढालते हुए यह संदेश दिया गया है कि बुंदेलखंड में स्थापत्य और प्रकृति हमेशा जुड़े रहे हैं। बच्चों को यहां यह भी समझाया जाएगा कि हमारी सांस्कृतिक विरासत पर्यावरणीय संतुलन से कैसे जुड़ी है।
विरासत वन की नेचर ट्रेल दर्शाती है कि कैसे सुनियोजित पौधरोपण और संरक्षण से बंजर भूमि अब एक जीवंत वन गलियारे में बदल चुकी है। यह ट्रेल हरियाली की वापसी, जैव विविधता के पुनर्जीवन और प्राकृतिक संतुलन की कहानी बयां करती है। पर्यावरण शिक्षा के साथ-साथ जल संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। वर्षा आधारित तालाब, परकोलेशन पिट्स और कोमल जलधाराएं बच्चों को यह सिखाती हैं कि पानी को संजोना केवल संग्रह नहीं, बल्कि जीवन को टिकाऊ बनाने की प्रक्रिया है।
17 एकड़ में विकसित यह विरासत वन अपने अंतिम चरण में है। यह परियोजना बच्चों और नई पीढ़ी को प्रकृति और विरासत से जोडऩे के साथ-साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी की शिक्षा भी देगी। देशी-विदेशी पर्यटक यहां बुंदेली संस्कृति, चंदेल काल की स्थापत्य कला और पर्यावरण संरक्षण की समझ प्राप्त कर सकेंगे।
यह परियोजना केवल वन विकास नहीं, बल्कि बच्चों में पर्यावरणीय समझ और जिम्मेदारी विकसित करने का एक जीवंत मंच है।
सर्वेश सोनवानी, वनमंडलाधिकारी
Updated on:
20 Jan 2026 10:42 am
Published on:
20 Jan 2026 10:41 am
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