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अमृतं जलम्: संकटमोचन तालाब को गंदगी व जलकुंभी से बचाने के लिए प्रशासन, समाजसेवी और युवाओं का सामूहिक प्रयास

अमृतं जलम् अभियान के तहत अब संकटमोचन तालाब का जीर्णोद्धार करने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया गया है। जिसका उद्देश्य संकटमोचन तालाब को जलकुंभी और गंदगी से मुक्त करना है और उसके जल को फिर से जीवन से भर देना है।

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amritam jalam

अमृतं जलम्


छतरपुर. शहर में बढ़ती गंदगी, जलकुंभी से सिमटते तालाबों और हर साल गिरते जलस्तर की समस्या ने प्रशासन, समाजसेवियों और स्थानीय युवाओं को एकजुट किया है। इस समस्या से निपटने के लिए अमृतं जलम् अभियान के तहत अब संकटमोचन तालाब का जीर्णोद्धार करने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया गया है। जिसका उद्देश्य संकटमोचन तालाब को जलकुंभी और गंदगी से मुक्त करना है और उसके जल को फिर से जीवन से भर देना है।

संकटमोचन तालाब छतरपुर का एक प्रमुख जल स्रोत है, जो लगभग 13 एकड़ में फैला हुआ है। लेकिन इस समय तालाब की स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। तालाब में जलकुंभी का कब्जा हो चुका है और गंदगी भी बुरी तरह फैली हुई है। पूरे तालाब में कहीं भी पानी की झलक दिखाई नहीं देती, बल्कि केवल जलकुंभी की हरी चादर तालाब के जल पर फैली हुई है। जलकुंभी ने तालाब के जल को पूरी तरह से ढक लिया है, जिससे न सिर्फ तालाब की सुंदरता प्रभावित हो रही है, बल्कि जलाशय की उपयोगिता भी समाप्त हो रही है। ऐसे में इस तालाब को फिर से जीवन देने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता महसूस हो रही थी। छतरपुर जिले में 11 तालाब हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश तालाबों की स्थिति ठीक नहीं है। जलस्तर हर साल गिरता जा रहा है और तालाबों में पानी की कमी हो रही है। ऐसे में इस अभियान ने यह संदेश दिया है कि जल है तो जीवन है'।

लोगों का मिला जबरदस्त समर्थन

अभियान की शुरुआत संकटमोचन तालाब से जलकुंभी निकालने के साथ हुई। शहरवासियों ने इस मुहिम में बढ़-चढकऱ हिस्सा लिया और तालाब को साफ करने का काम शुरू किया। महिलाएं और पुरुषों की टीमों ने तालाब में पहुंचकर श्रमदान किया और जलकुंभी निकालने का काम शुरू कर दिया। देखते ही देखते, 5 ट्रॉली जलकुंभी तालाब से बाहर निकाली गई। इस अभियान में स्थानीय युवाओं, समाजसेवियों और प्रशासन के अधिकारियों का भी पूरा सहयोग मिला।

ये है आगे की योजना

अभियान के पहले चरण में जलकुंभी निकालने का कार्य किया जा रहा है, लेकिन इसके बाद तालाब की सफाई, निस्तार व्यवस्था और जलस्तर बढ़ाने के उपायों पर भी ध्यान दिया जाएगा। प्रशासन और समाजसेवियों के सहयोग से तालाब के जीर्णोद्धार के लिए एक ठोस योजना बनाई जाएगी ताकि भविष्य में इस तालाब की स्थिति को बनाए रखा जा सके। इस अभियान के जरिए यह संदेश दिया जा रहा है कि अगर हम मिलकर प्रयास करें, तो हमारे जलस्रोतों को बचाया जा सकता है। यह केवल एक तालाब को बचाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह हमारे जलसंसाधनों के संरक्षण का एक बड़ा उदाहरण बन सकता है।

पत्रिका व्यू

संकटमोचन तालाब का जीर्णोद्धार अभियान छतरपुर शहर के जल संकट से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। यह दिखाता है कि प्रशासन, समाजसेवी और स्थानीय लोग अगर एकजुट होकर काम करें तो बड़े से बड़े पर्यावरणीय संकट से निपटा जा सकता है। तालाबों को बचाने और जलस्तर को बनाए रखने के लिए हमें इस तरह के और अभियानों को गति देने की आवश्यकता है। जल है तो जीवन है और इस जीवन को बचाने के लिए हमें अपने जलस्रोतों की पूरी देखभाल करनी होगी।

इनका कहना है

तालाब सफाई का अभियान 30 जून तक चलाया जाएगा। जलकुंभी कचरा निकालकर तालाब को पुर्नजीवित करने के भागीरथी अभियान से सभी लोग जुड़ रहे हैं।
संजेश नायक, स्वच्छता निरीक्षक