
Antibiotics do not work in viral diseases
छतरपुर। एंटीबॉयोटिक दवाओं के बेजा इस्तेमाल से खतरनाक स्थिति उत्पन्न हो रही है। सर्दी-खांसी, फ्लू और सिर दर्द-बदन दर्द के लिए अनजाने में लोग खुद दवाएं खरीद कर खा लेते हैं। एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग से जो स्थिति बन रही है, उसे डॉक्टर बड़ी समस्या मानते हैं। एंटीबायोटिक दवाओं के लगातार दुरुपयोग से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से घट रही है। साधारण इंफेक्शन भी अब सामान्य दवाओं से ठीक नहीं हो रहा है। एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस व एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस होने से साधारण बीमारी भी भारी पडऩे लगती है। क्योंकि दवा काम ही नहीं करती है।
घट रही रोग प्रतिरोधक क्षमता
एंटीबायोटिक्स सिर्फ बैक्टीरियल इंफेक्शन से होनेवाली बीमारियों पर काम करता है। वायरल बीमारी सर्दी-ज़ुकाम, फ्लू, ब्रॉन्काइटिस, गले में इंफेक्शन आदि में ये दवा कोई असर नहीं करती है। लेकिन लोग इन बीमारियों में भी एंटबॉयोटिक का इस्तेमाल करते हैं,जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती है। इसके साथ ही दवाओं का असर होना भी बंद हो जाता है। यही वजह है कि मौसम बदलते ही बच्चे और बुजुर्ग बीमार पड़ जाते हैं। दवा का रेसिटेंट हो जाने से दो से तीन दिन में ठीक होने वाली सर्दी-खांसी और वायरल फीवर भी एक सप्ताह से 10 दिन तक के समय में ठीक हो रहा है। इन दवाओं के व्यापक दुष्प्रभाव को देखते हुए भारत सरकार ने ऐसी 344 दवाइयों पर प्रतिबन्ध लगा रखा है,जिसमे खांसी की लोकप्रिय दवा कोरेक्स, जुकाम की लोकप्रिय दवाई विक्स एक्शन 500 एक्सट्रा, सिट्रिजन, फेंसिडिल कफ सिरप, कैफीन, और रेबप्राजोल जैसी दवाएं शामिल हैं।
क्या है एंटीबॉयोटिक :
एंटीबायोटिक एक पदार्थ या यौगिक है, जो जीवाणु को मार डालता है या उसके विकास को रोकता है। प्रतिजैविक रोगाणुरोधी यौगिकों का व्यापक समूह होता है, जिसका उपयोग कवक और प्रोटोजोआ सहित सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखे जाने वाले जीवाणुओं के कारण हुए संक्रमण के इलाज के लिए होता है। एंटीबायोटिक्स को एंटीबैक्टिरियल भी कहा जाता है। जब भी हमारे शरीर पर बैक्टीरिया का आक्रमण होता है, तो सामान्य तौर पर हमारा रोग प्रतिरोधक तंत्र उस बैक्टीरिया और उसके इन्फेक्शन को नष्ट कर देता हैं। ये काम हमारे ब्लड में मौजूद व्हाइट ब्लड सेल्स करती हैं। लेकिन जब बैक्टीरिया का इन्फेक्शन बहुत गंभीर हो जाता है,तो अकेले प्रतिरोधक तंत्र के लिए उससे लडऩा आसान नहीं रह जाता। ऐसे में एंटीबायोटिक्स की मदद ली जाती है जो बैक्टीरिया को समाप्त कर देते हैं या फिर उनकी ग्रोथ को धीमा कर देते हैं।
ये है दुष्प्रभाव :
एचआइवी और एंटीबॉयोटिक, दोनों मानव शरीर पर एक जैसा दुष्प्रभाव डालते हैं। एचआइवी संक्रमण होने पर शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता समाप्त हो जाती है, जिससे बीमार व्ययक्ति को छोटी सी बीमारी होने पर भी उसका ठीक होना मुश्किल हो जाता है। एंटीबॉयोटिक वे दवाएं हैं, जो हानिकारिक बैक्टीरिया को मारने के लिए रोगी को दी जाती हैं। लेकिन एंटीबॉयोटिक दवा का ओवरडोज या गलत ढ़ंग से लेने के कारण उससे बैक्टीरिया ड्रग रजिस्टेंस हो रहे हैं। लागातर सेवन से ऐसी स्थिति बन जाती है कि बैक्टीरिया पर एंटीबॉयोटिक दवाएं असर करना बंद कर देती है, तब मरीज की स्थिति एचआइवी पीडि़त की तरह हो जाते हैं। दवाएं काम नहीं करती और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। ऐसे में छोटी-छोटी बीमारी का इलाज भी संभव नहीं हो पाता है।
ऐसे पहचाने एंटीबॉयोटिक :
एंटीबायोटिक दवाओं की पहचान कोई भी खुद कर सकता है। अगर किसी दवा के पत्ते के पीछे लाल लाइन है, तो इसका मतलब है यह दवा एंटीबायोटिक है। बिना किसी परामर्श के इन दवाओं का सेवन घातक हो सकता है। इस समस्या का सबसे बड़ा कारण है, बिना किसी परामर्श के असानी से एंटीबायोटिक दवाओं का मिलना। परामर्श के बिना एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री को कम करने के लिए नियम बनाए गए हैं। लेकिन वे पूरी तरह से लागू नहीं हो पाए हैं। लोग बिना डॉक्टर के पर्चे के ही शेड्यूल एच दवा आसानी से मेडिकल स्टोर से खरीद लेते हैं।
जरूरत पर काम नहीं करेगी दवा :
बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबॉयोटिक लेने से बॉडी रेसिस्टेंस हो जाती है। बिना जरूरत खाई गई दवा के कारण जरूरत के समय ये दवाएं काम नहीं करती हैं। बैसे भी एंटीबॉयोटिक दवा हर बीमारी में नहीं ली जाती है।
- डॉ. हिमांशु बाथम,चिकित्सक जिला अस्पताल
बार-बार पड़ते हैं बीमार
एंटीबॉयोटिक का इस्तेमाल करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। हमारे पास अक्सर ऐसे मरीज आते हैं,जो एंटीबॉयोटिक ज्यादा खाने से छोटी बीमारी में भी ठीक नहीं होते। ऐसे मरीज मौसम बदलने पर बार-बार बीमार भी पड़ते हैं। होम्योपैथिक में एंटीबॉयोटिक नहीं होता है,सिमटम बेस्ड इलाज की पैथी है।
- डॉ.अब्दुल हकीम, होम्योपैथिक चिकित्सक
बढ़ती है प्रतिरोधक क्षमता
आयुर्वेद वायरल बीमारियों के इलाज के लिए कारगर पैथी है। सबसे अच्छी बात ये है कि कोई साइड इफेक्ट नहीं है। आयुर्वेद शरीर में इम्यून पावर को बढ़ाता है, जिससे रोग से लडऩे की क्षमता खुद ही डवलप हो जाती है। निरोगी काया के लिए आयुर्वेद सबसे प्राचीन व विश्वसनीय पैथी है।
डॉ. विज्ञानदेव मिश्रा, जिला आयुष अधिकारी
फैक्ट फाइल
जिला छतरपुर
जिले में एंटीबॉयोटिक का सालाना कारोबार- 20 करोड़ रुपए
जिला अस्पताल की ओपीडी- 1000 प्रतिदिन लगभग
निजी क्लीनिक के मरीज- 1500 लगभग प्रतिदिन
वर्तमान में सर्दी-खांसी के मरीज- कुल मरीज का ४0 फीसदी
Published on:
31 Oct 2019 06:00 am
बड़ी खबरें
View Allछतरपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
