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बकस्वाहा हीरा खदान पर्यावरण में अटकी, छतरपुर व पन्ना जिले के बीच हीरा उत्खनन का कॉरिडोर के नहीं हुए टेंडर

बकस्वाहा की बहुचर्चित बंदर हीरा खदान पर्यावरण की अनुमति के लिए अटक गई है। वहीं, पन्ना और छत्तरपुर जिले के के बीच पन्ना-अजयगढ़ प्रोजेक्ट हर्षा वन और छतरपुर के राजनगर में हर्षा-2 के बीच कॉरिडोर बनाने की योजना भी अटकी हुई है।

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बंदर हीरा खदान कंपाउंड

छतरपुर. बकस्वाहा की बहुचर्चित बंदर हीरा खदान पर्यावरण की अनुमति के लिए अटक गई है। वहीं, पन्ना और छत्तरपुर जिले के के बीच पन्ना-अजयगढ़ प्रोजेक्ट हर्षा वन और छतरपुर के राजनगर में हर्षा-2 के बीच कॉरिडोर बनाने की योजना भी अटकी हुई है। टेंडर नहीं होने से योजना का काम आगे नहीं बढ़ पा रही है। कॉरिडोर बनने से पन्ना के बाद अब छतरपुर जिले की पहचान भी हीरा उत्पादन के लिए होगी। जीएसआई (जियोलॅजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) के सर्वे राजगनर तहसील इलाके में हीरा मिलने के बाद प्रोजेक्ट के क्षेत्र की गूगल मैपिंग कराई गई थी। उसके बाद से फाइल आगे नहीं बढ़ी है।

राजनगर के 6 गांव में हीरा


जीएसआई (जियोलॅजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) के सर्वे में जिले के राजनगर के 6 गांवों में हीरे का भंडार पाया गया है। राजनगर तहसील में हर्षा-2 डायमंड प्रोजेक्ट के लिए एरिया को खनिज विभाग ने सुरक्षित किया है। जीएसआई के सर्वे में जिले के बमनौरा, मऊमसनिया, धवाड़, महलवार, बेनीगंज, बरखेड़ा की सर्वाधिक 1612. 710 हेक्टेयर राजस्व भूमि प्रभावित होगी। इसके साथ इस प्रोजेक्ट में 58.290 हेक्टेयर वन भूमि जाएगी।

पिछले साल हुए टेंडर में नहीं हुआ कोई भी शामिल


मिनरल्स रिसोर्स डिपार्टमेंट ने छतरपुर व पत्रा के हर्षा वन और टू ब्लॉक के लिए ऑनलाइन टेंडर बुलाया है। जिले के राजनगर में डायमंड प्रोजेक्ट में 6 गांवों की 1666 हेक्टेयर जमीन को चिंहित किया गया है। छतरपुर और पन्ना डायमंड प्रोजेक्ट के लिए मिनरल्स रिसोर्स डिपार्टमेंट ने रिजर्व प्राइज डिपॉजिट और ऑक्शन के रिकॉर्ड जमा करने के लिए 9 अगस्त को तारीख निर्धारित की गई। लेकिन टेंडर में कोई पार्टी शामिल नहीं हुई। इसके बाद दोबारा टेंडर किए जाने थे, लेकिन अब तक टेंडर नहीं हुए हैं।

बकस्वाहा में एस्सेल को मिला था टेंडर


साल 2019 में ब्लॉक की नीलामी की गई। इसमें कई कंपनियों ने हिस्सा लिया। ब्लॉक में मध्य प्रदेश सरकार को 30.05 पर्सेंट रेवेन्यू हिस्सेदारी की बोली मिली। 19 दिसंबर 2019 को ज्यादा बोली लगाने वाले एस्सेल को एलओआई जारी किया गया। पर्यावरण में होने वाले कुल उत्सर्जन को कम करने के लिए हालांकि 954 हेक्टेयर क्षेत्र को कम कर के 364 हेक्टेयर की माइनिंग लीज कर दी गई। इसमें 3.4 करोड़ कैरेट्स हीरा शामिल है। अनुमान है कि यहां हर साल 30 लाख कैरेट्स कच्चे हीरे मिलेंगे। हालांकि बक्सवाहा में 4 लाख पेड़ काटकर हीरा खदान शुरु करने और जंगल में पाए गए 25 हजार वर्ष पुराने रॉक पेंटिंग को बचाने भी मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिस पर हाईकोर्ट ने खनन पर स्टे आदेश जारी किया है।

इनका कहना है


जीएसआई के सर्वे में जिले के राजनगर तहसील के 6 गायों में हीरा पाए जाने की पुष्टि के बाद एरिया की गूगल मैपिंग कराई गई। डायमंड प्रोजेक्ट के लिए राजस्व और फॉरेस्ट एरिया को चिह्नित किया गया है। हीरा खदान के लिए भोपाल से ऑक्शन की प्रक्रिया होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अमित मिश्रा, खनिज अधिकारी

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