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video-खजुराहो के डांस फेस्टिवल में मिलेगा बुंदेली फूड का जायका

बुंदेलखंड के परंपरागत मोटे अनाज को बचाने और उसका उपयोग बढ़ाने के लिए शुरू हुई अभिनव पहल

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 Innovative initiative to save the traditional coarse cereals of Bundelkhand and increase its usage

Chhatarpur

नीरज सोनी
छतरपुर। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो में इसी माह होने वाले डांस फेस्टिवल में इस बार भी बुंदेली व्यंजनों का जयका तड़का मारेगा। क्लासिकल डांस फेस्टिवल के साथ ही यहां पर पांच दिनों तक बुंदेली फूड फेस्टिवल भी मनाया जाएगा। देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए इस बार यह खास आकर्षण होगा। इसके साथ ही यहां पर बुंदेली फूड के स्टॉल के पास बुंदेलखंड के परंपरागत मोटे अनाज और उसके बीज की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। परंपरागत देशी और मोटे अनाजों को बचाने की दिशा में यह पहल की गई है। शहर के गांधी आश्रम में फूड फेस्टिवल के आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। दिल्ली की इंटक नाम की संस्था के साथ मिलकर मप्र गांधी स्मारक निधि इस आयोजन को पिछले तीन सालों करता आ रहा है।
खजुराहो डांस फेस्टिवल में पिछले साल भी लोगों ने बुंदेली व्यंजनों का स्वाद चखा था। पहली बार जब खजुराहो में बुंदेली फूड के स्टाल सजे तो लोगों को इनका स्वाद पसंद आया। देश-विदेश के लोगों ने भी बुंदेली पकवानों को खूब पसंद किया। पहली बार में ही बुंदेली खाने का स्वाद चखने पर जिला प्रशासन के अफसरों ने भी फूड फेस्टिवल को खजुराहो नृत्य समारोह के आयाम से जोड़कर इसका हिस्सा बनाने का निर्णय लिया। इस बार फूड फेस्टिवल को बड़े स्तर पर करने की योजना पर काम शुरू हो गया है। बुंदेली पकवानों में उपयोग होने वाले अनाज, सब्जियों और अन्य जिंसों का कलेक्शन इन दिनों गांधी आश्रम में किया जा रहा है। इस बार लोगों को ज्यादा से ज्यादा पकवानों का स्वाद देने के लिए आयोजकों की तैयारी है।
गांव-गांव से जुटाई रेसिपी बनाने की तरकीब :
दमयंती पाणी ने बताया कि लुप्त होते बुंदेली जायके को फिर से लोगों की जुवान तक पहुंचाने के लिए गांधी आश्रम के कार्यकर्ताओं ने जमीनी स्तर पर प्रयास किया। उन्होंने गांव-गांव जाकर बुंदेली व्यंजनों की रेसिपी का कलेक्शन किया। उनको बनाने की विधि सीखी। इसके बाद उनका टेस्ट और भी अच्छा बनाने के लिए अपने स्तर पर कुछ प्रयोग किए। सेहत और स्वाद से भरपूर बनाने के बाद व्यंजनों को एक बड़ी सूची बनाई। बाद में इन रेसिपी की एक पुस्तक भी तैयार कराई, ताकि यदि कोई उनको बनाना सीखना चाहे तो कोई दिक्कत नहीं रहे।
मोटे अनाज और बीज को बचाने के लिए शुरू किया अभियान :
सेहत और स्वाद से भरपूर बुंदेलखंड के व्यंजनों का स्वाद दुनियाभर में फैलाने के लिए छतरपुर की संस्था मप्र गांधी स्मारक निधि और दिल्ली की संस्था भारतीय सांस्कृतिक निधि इंटक ने मिलकर एक बड़ी पहल की है। इसके तहत बुंदेलखंड में पाए जाने वाले कौंदो, कुटकी, ज्वार, बाजरा जैसे मोटे अनाजों को बचाने और उनके सेवन से होने वाले फायदे से लोगों को परचित कराना चाहते हैं। इन अनाजों के बीज को बचाने के लिए भी गांधी आश्रम में बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। गांधी स्मारक निधि के सचिव संजय सिंह ने बताया कि पहले उन्होंने परंपरागत अनाज और उसके बीजों को बचाने के लिए काम शुरू किया था। इस दौरान ध्यान में आया कि यह अनाज हम बचाए तो रहेंगे, लेकिन जब तक आज के फास्ट फूड कल्चर के बीच वर्तमान पीढ़ी को इसका स्वाद नहीं लगेगा, तब तक इसका कोई फायदा भी नहीं। इसलिए पिछले साल ही बुंदेली फूड फेस्टिवल की योजना पर काम किया। पहली बार खजुराहो में यह प्रयोग किया तो सफल रहा। अब इस बार बड़े स्तर पर बुंदेली फूड फेस्टिवल का आयोजन करने जा रहे हैं।
दिल्ली में भी चार बार हो चुका फेस्टिवल :
गांधी स्मारक निधि और इंटेक संस्था के समन्वित प्रयास से देश की राजधानी दिल्ली में भी चार बार बुंदेली फूड फेस्टिवल का आयोजन हो चुका है। फूड स्टाल के साथ ही वहां पर बुंदेलखंड के मोटे अनाज के बीज और उसकी विभिन्न जिंसों की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। फूड फेस्टिवल की संयोजक दमयंती पाणी ने बताया कि दिल्ली के फेस्टिवल में लोगों ने बुंदेलखंड के गुलगुला, ठडूला, मंगौरा, बेर से लेकर कड़ी को खूब पसंद किया। वहीं खजुराहो में भी पिछले साल अफसरों से लेकर देशी-विदेशी पर्यटकों ने बुंदेली व्यंजनों का खूब लुत्फ लिया था। इस साल भी खजुराहो के बाद देश के अलग-अलग स्थानों पर बुंदेली फूड फेस्टिलव करने की योजना है।