13 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

खजुराहो के क्राफ्ट मेला में गोंडवाना पेंटिग बनीं आकर्षण का केंद्र

खजुराहो के क्राफ्ट मेला में गोंडवाना पेंटिग बनीं आकर्षण का केंद्र

2 min read
Google source verification
Center of attraction of Gondwana paintings in Kraft Fair of Khajuraho

Center of attraction of Gondwana paintings in Kraft Fair of Khajuraho

खजुराहो। विश्व पर्यटन नगरी खजुराहो के दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के शिल्पग्राम परिसर में भारत सरकार के विकास आयुक्त (आयुक्त हस्तशिल्प) वस्त्र मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित तथा संत रविदास मप्र हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम मर्यादित भोपाल द्वारा क्राफ्ट मेला का आयोजन किया गया है। इस मेले में प्रदेश सहित देश भर से उत्कृष्ट कारीगरों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प वस्तुओं की बिक्री के लिए प्रदर्शनी लगाई गई है। प्रदर्शनी में हर दिन देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचकर भारतीय लोक कला को करीब से निहार रहे हैँ।
इस प्रदर्शनी में चंदेरी, महेश्वरी, कोशा, ट्रेडिशनल, प्रिंटेड साडिय़ों के अलावा कॉटन बाग, डाबु प्रिंट साडिय़ां तथा सूट, ड्रेस मटेरियल, बेड सीट्स, रेडीमेड हैंडलूम सहित चमड़े से बने बेल्ट,जूते, सैंडल, पर्स, पत्थर से बनी मूर्तियां, बैग, डायरी, फोटो, पेंटिंग सहित अन्य मटेरियल प्रदर्शित किया गया है। उक्त प्रदर्शनी में गौंड पेंटिंग आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। शाप नंबर 18 में श्रीमती सुनयना टेकाम अपने पति सचिन टेकाम के साथ अपनी पेंटिंग लगाए हुए हैं जो पाटनगढ़ तहसील बजाग जिला डिंडोरी से आई हैं। सुनयना ने बताया कि ये कला उन्हें अपने पूर्वजों से विरासत में मिली है जिसे हम आज भी करते जा रहे हैं। उनकी दुकान में 300 से लेकर 15 हजार रुपए तक की पेंटिंग मौजूद है। वह दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता, रांची, चंडीगढ़, जयपुर , हैदराबाद, भोपाल सहित देश के अन्य शहरों में अपनी इस कला को लेकर प्रदर्शित करने जाती हैं। सुनयना के पति ने बताया कि उनके मायके तथा ससुराल में जंगल, जमीन तथा जनजाति पर आधारित पेंटिंग का कार्य पूरा परिवार करता है। हम अपनी परंपरा बचाने और रोजी रोटी के लिए ये कार्य करते हैं। हालांकि इसमें अ? काम ?? नहीं चलता तो हमारा परिवार मजदूरी भी कर लेते हैं। हमें सरकार के विभाग हस्तशिल्प एवं हथकरघा की तरफ से जब भी कहीं जाने का पत्र मिलता है तो हम चले जाते हैं। हमें इस कार्य के लिए फेब्रिक रंग और केनवास का कपड़ा भोपाल से लाना होता है। लोग हमारे काम की तारीफ तो करते हैं लेकिन खरीदने में काम दिलचस्पी दिखाते हैं लेकिन है अपना कार्य अनवरत जारी रखेंगे क्योंकि कला के कदरदान आज भी मिल ही जाते हैं।