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आबादी के आंकड़ों में भारी भिन्नता से छतरपुर नगर निगम के गठन पर संकट: 20 गांवों को मिलाकर 3.62 लाख की जनसंख्या का था खाका

जनगणना के तहत शहर में किए गए मकान सूचीकरण का कार्य पूरा होने के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने जिला प्रशासन के पुराने प्रस्ताव पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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छतरपुर शहर

शहर को नगर निगम बनाने का बहुप्रतीक्षित सपना एक बार फिर प्रशासनिक उलझनों और आंकड़ों के फेर में फंसता नजर आ रहा है। जनगणना के तहत शहर में किए गए मकान सूचीकरण का कार्य पूरा होने के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने जिला प्रशासन के पुराने प्रस्ताव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नए सर्वे के आंकड़ों और पुराने प्रस्ताव में करीब 46 हजार की जनसंख्या का बड़ा अंतर सामने आया है, जिसके कारण अब नगर निगम गठन की आगामी प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।

सर्वे में मिले 61 हजार मकान, आबादी के आंकड़ों में भारी भिन्नता

मकान सूचीकरण के लिए तैनात की गई सर्वे टीम ने नगर पालिका क्षेत्र के भीतर कुल 61 हजार मकान दर्ज किए हैं। इन मकानों के आधार पर शहर की वर्तमान जनसंख्या का आकलन लगभग 2 लाख 9 हजार बताया जा रहा है। इसके विपरीत, जिला प्रशासन द्वारा पूर्व में भोपाल भेजे गए नगर निगम प्रस्ताव में छतरपुर शहर की जनसंख्या केवल 2.55 लाख दर्शाई गई थी। इस तरह पुराने सरकारी प्रस्ताव और नए जमीनी सर्वे के आंकड़ों के बीच 46 हजार का सीधा अंतर आ चुका है। जनगणना के इन नए आंकड़ों के सामने आने से भोपाल स्तर पर लंबित प्रस्ताव में भिन्नता आ गई है, जिससे शहर के लोगों में एक बार फिर निराशा बढऩे की आशंका है।

नौ माह से भोपाल के ठंडे बस्ते में पड़ी है फाइल

छतरपुर को नगर निगम बनाने की घोषणा जून 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गौरव दिवस समारोह के दौरान की थी। इस घोषणा को करीब चार वर्ष होने वाले हैं, लेकिन गठन की प्रक्रिया अभी भी प्रशासनिक मंजूरियों के बीच अटकी हुई है। जिला प्रशासन के मुताबिक, नगर निगम की संशोधित फाइल को करीब 9 महीने पहले ही नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर सचिव स्तर पर भेजा जा चुका है। आगे की प्रशासनिक स्वीकृति न मिलने के कारण यह फाइल वर्तमान में ठंडे बस्ते में पड़ी है। अपर सचिव की मंजूरी मिलने के बाद ही इस प्रस्ताव को राज्य मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा और फिर राज्यपाल की अनुमति के बाद ही गजट नोटिफिकेशन जारी हो सकेगा। इस पूरी प्रक्रिया में सामान्य तौर पर करीब एक वर्ष का समय लगता है, लेकिन वर्तमान स्थितियों को देखते हुए यह काम अधर में लटका हुआ है।

समग्र आईडी में डुप्लीकेट रिकॉर्ड और ग्रामीण क्षेत्र में गणना बनी वजह

नगर निगम के लिए तैयार किए गए प्रारंभिक प्रस्ताव में जनसंख्या का मुख्य आधार समग्र आईडी के डेटा को बनाया गया था। बाद में जब डुप्लीकेट समग्र आईडी को हटाने की कार्रवाई की गई, तो कुल आंकड़ों में बड़ी गिरावट देखी गई। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी जो मूल रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी हैं, लेकिन रोजगार या अन्य कारणों से शहर में रह रहे हैं। कई लोगों के नाम गांव और शहर दोनों स्थानों की समग्र आईडी में दर्ज थे। इसके साथ ही, मकान सूचीकरण के दौरान कई नागरिकों ने अपनी गणना शहर के बजाय अपने मूल ग्रामीण क्षेत्रों में कराई, जिससे छतरपुर शहर की जनसंख्या के आंकड़े और अधिक प्रभावित हुए हैं।

20 गांवों को शामिल कर 3.62 लाख की आबादी का है खाका

नगर निगम के नए प्रारूप के तहत छतरपुर शहर के आसपास के 20 गांवों को शामिल करने की योजना है। मकान सूचीकरण के दौरान कर्मचारियों ने जब इन क्षेत्रों में घर-घर पहुंचकर गणना की, तो कुल आबादी 3 लाख 62 हजार दर्ज की गई है। वहीं, नगर निगम गठन के लिए भेजे गए प्रस्ताव में कुल जनसंख्या 3.62 लाख दर्शाई गई थी, जिसमें छतरपुर शहर की आबादी 2.55 लाख और शामिल किए जाने वाले 20 गांवों की आबादी 1.07 लाख बताई गई थी। इस प्रस्ताव में गांवों की जनसंख्या, सर्वे नंबर, क्षेत्रफल, कोर ग्राम से दूरी, गूगल मैप, रंगीन नक्शा और पंचायत कर्मचारियों की विस्तृत जानकारी भी संलग्न की गई है। इन गांवों को शामिल करने के बाद नगर पालिका सीमा का कुल क्षेत्रफल 3171.86 हेक्टेयर से बढकऱ 20628.19 हेक्टेयर किया जाना प्रस्तावित है।

वर्ष 2027 में खत्म होगा नगर पालिका का कार्यकाल, पांच साल और बढ़ सकता है इंतजार

इस पूरी परियोजना के लटकने का एक बड़ा कारण आगामी चुनावी प्रक्रिया भी है। छतरपुर नगर पालिका का वर्तमान पांच साल का कार्यकाल वर्ष 2027 में पूरा होने जा रहा है, जिसके तुरंत बाद स्थानीय निकाय के चुनाव होने हैं। नगर पालिका चुनाव की तैयारियां करीब तीन से चार महीने पहले ही शुरू हो जाएंगी। यदि भोपाल स्तर पर लंबित पड़ी इस फाइल पर जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो चुनाव प्रक्रिया शुरू होते ही नगर निगम का यह सपना अगले पांच वर्षों के लिए पूरी तरह टल जाएगा। इसके अलावा, जिन ग्राम पंचायतों को नगर निगम क्षेत्र में शामिल किया जाना है, उनका कार्यकाल पूरा होते ही वहां भी चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद नए निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यकाल के कारण नगर निगम गठन का यह प्रस्ताव लंबे समय के लिए लटक सकता है।

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