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14.70 करोड़ की सांसद निधि में से खर्च हुए मात्र 29.3 प्रतिशत, 241 स्वीकृत कार्यों में से केवल 6 पूरे, 10.39 करोड़ बेकार पड़े

टीकमगढ़ के सांसद और मौजूदा केंद्र सरकार में समाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेन्द्र कुमार की सांसद निधि को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है।
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एआई फोटो

स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के आधिकारिक और हालिया आंकड़ों ने टीकमगढ़ लोकसभा क्षेत्र में विकास कार्यों की ज़मीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। टीकमगढ़ के सांसद और मौजूदा केंद्र सरकार में समाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेन्द्र कुमार की सांसद निधि को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इम्पॉवर्ड इंडियन के आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र के विकास के लिए कुल 14.70 करोड़ की भारी-भरकम राशि आवंटित की गई थी, अब तक इसमें से केवल 4.30 करोड़ (यानी मात्र 29.3 प्रतिशत) राशि ही धरातल पर खर्च की जा सकी है। इस सुस्त रफ्तार के बाद अब संसदीय क्षेत्र की जनता के बीच सुगबुगाहट तेज हो गई है। लोग पूछ रहे हैं कि जब विकास के लिए बजट की कोई कमी नहीं थी, तो आखिर 10.39 करोड़ की एक बड़ी राशि अब भी सरकारी खातों में अप्रयुक्त क्यों पड़ी हुई है?

बजट और खर्च का पूरा गणित- आंकड़ों की जुबानी

डैशबोर्ड से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, टीकमगढ़ लोकसभा में विकास कार्यों की वित्तीय स्थिति कुछ इस प्रकार है।कुल आवंटित या स्वीकृत निधि- 14.70 करोड़ रुपए

अब तक हुआ कुल व्यय- 4,30,60,407 (लगभग 4.30 करोड़ रुपए)

बैंकों में शेष या अप्रयुक्त राशि- 10,39,39,593 (10.39 करोड़ रुपए से अधिक)

कुल निधि उपयोग दर- मात्र 29.3 प्रतिशत

काम की ज़मीनी हकीकत- 100 में से सिर्फ 2 काम हुए पूरे

वित्तीय आंकड़ों से भी ज़्यादा निराशाजनक स्थिति विकास कार्यों की पूर्णता दर को लेकर है। सांसद निधि के तहत क्षेत्र में विकास के लिए सैकड़ों कार्यों की अनुशंसा की गई थी, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे।

कुल अनुशंसित या स्वीकृत कार्य- 241

सफलतापूर्वक पूर्ण हुए कार्य- 06

अभी भी अधूरे या प्रगतिरत कार्य- 235

कार्य पूर्णता दर- मात्र 2.4 प्रतिशत

चौंकाने वाला विश्लेषण

इस आंकड़े का सीधा और कड़वा मतलब यह है कि क्षेत्र में स्वीकृत किए गए हर 100 कार्यों में से औसतन केवल 2 काम ही पूरे हो पाए हैं। शेष 98 प्रतिशत परियोजनाएं आज भी कागजों से निकलकर पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर सकी हैं।

भुगतान और प्रगति पर खड़े हो रहे हैं गंभीर सवाल

इस पूरी रिपोर्ट में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला पहलू भुगतान का तरीका है। इम्पॉवर्ड इंडियन डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 4 करोड़ का भुगतान ऐसे कार्यों के लिए पहले ही दर्शाया जा चुका है, जो अभी तक पूरी तरह से बनकर तैयार नहीं हुए हैं। अधूरी परियोजनाओं के लिए इतनी बड़ी रकम जारी होने से कार्य की गुणवत्ता, निगरानी और पारदर्शिता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। जनता और विश्लेषक इसे एक बड़े भुगतान अंतराल के रूप में देख रहे हैं।

जो 6 कार्य पूरे हुए, उनकी कुल लागत है बेहद मामूली

प्रशासनिक दावों के मुताबिक अब तक जिन छह परियोजनाओं को पूर्ण घोषित किया गया है, वे सभी छोटे स्तर के निर्माण कार्य हैं। इन सभी 6 कार्यों की कुल मिलाकर अनुमानित लागत मात्र 27.8 लाख के आसपास है।

पूरे हुए मुख्य कार्यों की सूची इस प्रकार है।

बाउंड्री वॉल निर्माण (लागत 3 लाख)- पूर्णता तिथि 23 जनवरी 2026

रोगी आश्रय स्थल (लागत 2.4 लाख)- पूर्णता तिथि 23 जनवरी 2026

सांसद चौपाल (पत्थर कुशवाहा के बगल में) (लागत 4 लाख) पूर्णता तिथि 23 जनवरी 2026

सांसद उत्सव धाम (लागत 12 लाख) -पूर्णता तिथि 20 जनवरी 2026

पारागढ़ तलैया के घाट पर शेड निर्माण (लागत 2.5 लाख)- पूर्णता तिथि 06 नवंबर 2025

एक अन्य छोटा निर्माण कार्य।

जबकि दूसरी तरफ, चौपाल निर्माण (ग्राम कुलवारा में सामुदायिक चबूतरा) और उर्मिल नदी पर हनुमान मंदिर के समीप घाट निर्माण जैसे कई अन्य कार्य (जिनकी लागत 3 लाख से 4 लाख के बीच है) जनवरी 2026 से सिर्फ अनुशंसित या अधूरी स्थिति में लटके हुए हैं।

जनता की अदालत- केंद्रीय मंत्री से पूछे जा रहे हैं ये 4 सीधे सवाल

एक तरफ जहां केंद्र सरकार विकास को रफ्तार देने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ खुद एक केंद्रीय मंत्री के गृह क्षेत्र में सांसद निधि का 10 करोड़ से अधिक का फंड डंप पड़ा हुआ है। इस स्थिति को लेकर टीकमगढ़ लोकसभा की जनता अब मुखर हो रही है और यह सवाल किसी राजनीतिक दल के नहीं बल्कि आम नागरिकों के हैं।

सवाल 1- जब क्षेत्र में सडक़ों, पानी, शेड और अन्य बुनियादी सुविधाओं की ज़रूरत है, तो 10 करोड़ से अधिक की शेष सांसद निधि को अब तक दबाकर क्यों रखा गया? इसका उपयोग क्यों नहीं हुआ?

सवाल 2- जो 235 परियोजनाएं पिछले कई महीनों से अधूरी या कछुआ गति से चल रही हैं, उन्हें समय सीमा के भीतर पूरा क्यों नहीं कराया जा सका?सवाल 3- सरकारी सिस्टम में बैठे किन अधिकारियों या एजेंसियों की लापरवाही के कारण विकास कार्य अटके हुए हैं, और क्या उनके खिलाफ कोई जवाबदेही तय की जाएगी?

सवाल 4- टीकमगढ़ लोकसभा की जनता ने भारी बहुमत देकर अपने प्रतिनिधि को दिल्ली भेजा और वह केंद्र में मंत्री भी बने, इसके बावजूद क्षेत्र के लोगों को समय पर विकास कार्यों का लाभ क्यों नहीं मिल पा रहा है?

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