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छतरपुर

आरबीआई का नियम, प्रशासन की अपील के वाबजूद बाजार में कोई नहीं ले रहा सिक्के

कोई भी खरीददारी करने पर एक-दो, तीन या चार रुपए बापस नहीं किए जा रहे हैं। उसके बदले या तो सामान या फिर चॉकलेट ग्राहकों को थमाई जा रही है।

छतरपुरJun 15, 2024 / 10:47 am

Dharmendra Singh

COIN

शुक्रवार को ये सिक्के नहीं चले छतरपुर के बाजार में

छतरपुर. जिला मुख्यालय समते पूरे जिले में एक और दो रुपए की सिक्के चलन से बाहर हो गए हैं। व्यापारी एक-दो रुपए के सिक्के नहीं ले रहे हैं। अब स्थिति ये आ गई है, कि एक और दो रुपए के सिक्के बाजार में नजर ही नहीं आते हैं। इन सिक्कों के अघोषित रुप से बंद होने से ग्राहकों को चपत लग रही है। कोई भी खरीददारी करने पर एक-दो, तीन या चार रुपए बापस नहीं किए जा रहे हैं। उसके बदले या तो सामान या फिर चॉकलेट ग्राहकों को थमाई जा रही है। सिक्के बाजार में न चलने को लेकर जिला प्रशासन ने अपील करते हुए कहा है कि 50 पैसे, 1 रुपए और 2 रुपए के सिक्के प्रचलन में हैं। सभी से सिक्के लेने की अपील भी की, लेकिन इसके वाबजूद बाजार में सिक्के नहीं चल रहे हैं।

लाइव 01


दूध डेयरी
पन्ना नाका स्थित दूध डेयरी से अमूल दही का 400 ग्राम का पैकेट लेने पर 35 रुपए मांगे गए। ग्राहक ने कहा दही के पैकेट पर अंकित मूल्य 34 रुपए हैं, तो 35 रुपए क्यों लिए जा रहे हैं। डेयरी संचालक ने कहा कि 1 रुपए का सिक्का कहां से लाएं, बाजार में सिक्का न कोई ला रहा है, न कोई दे रहा है। अंतत: ग्राहक को 34 रुपए की जगह 35 रुपए का भुगतान करना पड़ा।

लाइव 02-


दवाई दुकान
छत्रसाल चौक पर दवा दुकान से ग्राहक ने कफ सीरप खरीदी। सीरप की कीमत 118 रुपए हुई, लेकिन एक-दो रुपए के सिक्के न चलने से दुकानदार ने 120 रुपए काटे और एक-एक रुपए की दो विक्स की गोली पकड़ा दी। ग्राहक ने कहा विक्स की जरूरत नहीं है। 118 रुपए ही काटिए, तो दवा दुकानदार बोले- 2 रुपए का सिक्का कहां से लाए। आप ही 8 रुपए फुटकर दे दीजिए। अंतत ग्राहक को विक्स की दो गोली लेकर वापस जाना पड़ा।

लाइव 03-


सब्जी दुकान
रविवार बाजार ग्राउंड में लगी सब्जी दुकान से सब्जी लेने पर ग्राहक से 97 रुपए मांगे गए। ग्राहक ने 100 रुपए का नोट दिया। तो सब्जी दुकानदार ने 3 रुपए की हरी मिर्च और थमाते हुए कहा अब हिसाब बरावर हो गया। ग्राहक ने कहा हरी मिर्च की जरूरत नहीं है। तो दुकानदार ने कहा तीन रुपए कहां से लाएं। आप ही सात रुपए फुटकर दे दीजिए। एक और दो रुपए के सिक्के न दुकानदार के पास थे न ग्राहक के पास, ऐसे में हरी मिर्च लेकर ग्राहक को संतुष्ठ होना पड़ा।

लाइव04-


ई-रिक्शा
आजाद चौक से डाकखाना चौराहा तक यात्रा करने के बाद एक सवारी ने ई-रिक्शा चालक को 10 रुपए को नोट, 5 रुपए का सिक्का और दो रुपए को दो व एक रुपए का एक सिक्का पकड़ाया। रिक्शा चालक ने 10 रुपए और 5 रुपए तो ले लिए, लेकिन एक और दो सिक्के लेने से मना कर दिया। रिक्शा चालक बोला- एक-दो रुपए के सिक्के बाजार में कोई नहीं ले रहा, तो मैं लेकर क्या करुंगा। अंतत: ग्राहक को 5 रुपए का एक सिक्का देना पड़ा।

आरबीआई ने बंद नहीं किया है सिक्का


जबकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) ने किसी सिक्के के चलन को बंद नहीं किया है। लेकिन जिले में दुकानदारों ने स्वत: ही 1 व 2 रुपए के सिक्के को चलन से बाहर कर दिया है। यानी एक या दो रुपए के सिक्के से कोई सामान ही नहीं देता है। चिल्हर के रुप में के वल 5 रुपए का सिक्का ही बाजार में चल रहा है, लेकिन उसकी कमी हमेशा बनी रहने से लोगों को सामान खरीदने पर पांच रुपए भी अक्सर वापस नहीं किए जाते हैं, बदले में दुकानदार उन्हें सामान दे रहे हैं। ऐसे में जरुरत न होने पर भी ग्राहक को अपने रुपए निकालने के लिए दुकानदार द्वारा दी जाने वाली चॉकलेट लेना पड़ रही है। आम लोगों से लेकर व्यापारी व सरकारी विभागों के लिए मुसीबत बन गया है। रिजर्व बैंक ने सिक्का न लेने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के दिशानिर्देश जारी किए थे।

इसलिए दुकानदार सिक्के लेने से बच रहे


एक दुकानदार ने बताया कि उनके पास सिक्का आ रहे थे, लेकिन वे जब माल मंगाते हैं, तो उन्हें बड़े नोट देने पड़ते हैं। जिससे माल खरीदते हैं, वह सिक्का नहीं लेता। जब बैंक में सिक्का जमा कराने जाते हैं तो बैंक भी सिक्का लेने में आनाकानी करती है। ऐसे में सिक्कों का व्यापारी क्या करे, हमारे पास सिक्कों के ढेर लग जाते हैं, ऐसे में हमारी रकम जाम होने लगती है। इसलिए एक -दो रुपए के सिक्के लेने में परेशानी होती है। इसके अलावा नोटबंदी के बाद बाजार में सिक्के अधिक आए, जबकि पहले चिल्लर यानी खुल्ले पैसों का संकट रहता था। नोटबंदी के बाद आरबीआइ ने सिक्के बड़ी मात्रा में जारी किए, जिससे बाजार में चिल्लर ज्यादा आ गई। लेकिन बैंक चिल्लर को जमा करने में आनाकानी करते हैं, इसलिए दुकानदारों ने सिक्के लेना ही बंद कर दिया है।

डिजीटल ट्रांजेक्शन के कारण में छोटी मुद्रा का इस्तेमाल घटा


डिजीटल ट्रांजेक्शन के कारण भी सिक्कों का बाजार में इस्तेमाल घटा है। छोटे-छोटे दुकानदार भी डिजीटल ट्रांजेक्शन एक्सेप्ट करने लगे हैं। इससे भी सिक्के का इस्तेमाल घटा है। लोग डिजीटल ट्रांजेक्शन में 5 और दस रुपए के सिक्के की राशि अलावा एक और दो रुपए के सिक्के वाली राशि आसानी से भेज व ले पा रहे हैं। डिजीटल ट्रांजेक्शन करने वालों को फुटकर की समस्या नहीं आ रही, लेकिन नगद भुगतान पर सिक्के न चलने से समस्या आ रही है।

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