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प्रतिबंधित प्लास्टिक की थैलियों व पॉलीथिन पर रोक लगाने में नाकाम जिला प्रशासन

- ८-१० कार्रवाई के बाद सिमटा अभियान

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District administration failed to ban banned plastic bags and polythene

District administration failed to ban banned plastic bags and polythene

छतरपुर। सरकार द्वारा प्लास्टिक की थैलियों व सिंगलयूज पॉलीथिन पर पूरी तरह से रोक लगाने को लेकर छतरपुर सहित सभी जिलों में आदेश जारी किए गए थे। जिसके बाद कलेक्टर द्वारा राजस्व, नगर निकाय और पुलिस प्रशासन को इसकी जिम्मेदारी सौपी गई थी। आदेश के बाद टीम द्वारा शहर के कुछेक स्थानों में पहुंचकर कार्रवाई की गई। लेकिन इसके बाद फिर से यह अभियान ठंडा पडऩे लगा। जिसके नतीजन बाजारों में खुलेआम अमानक प्लास्टिक की थैलियों व सिंगलयूज पॉलीथिन का उपयोग किया जा रहा है। लेकिन इसे देखकर भी प्रशासन द्वारा कार्रवाई नहीं की जा रही है।
राज्य सरकार ने पॉलीथिन पर रोक लगा दी है, लेकिन जिला प्रशासन ने अभी तक इस पर पूरी तरह से बैन नहीं लगाया है। लिहाजा जिले में बेरोकटोक पॉलीथिन का उपयोग किया जा रहा है। साल 2011 में केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर 40 माइक्रॉन से कम मोटाई वाली प्लास्टिक पॉलीथिन के उपयोग पर रोक लगा रखी है। इसके बाद शहर में कुछ दिनों तक अभियान चलाकर भी दुकानों पर से पॉलीथीन जब्त करने की कार्रवाई की गई थी लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया। इसके बाद साल 2017 में भी 1 मई को एक बार फिर मप्र शासन द्वारा प्लास्टिक पॉलीथिन के उपयोग पर पूरी तरह से रोक लगाने की घोषणा की गई थी। लेकिन वर्तमान में पॉलीथीन पर रोक लगाए जाने को लेकर कोई मुहिम शुरू होती दिखाई नहीं दी। इसके बाद फिर से अमानक पॉलीथिन पर प्रतिबंध के लिए सरकार द्वारा आदेश जारी किया है। जिससे जिले में नगर पालिका द्वारा कार्रवाई की गई। लेकिन जिम्मेदारों द्वारा मात्र ८-१० दुकानदारों पर कार्रवाई करते के बाद अभियान को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। जिसके चलते यहां अभी तक पूर्ण रूप से पाबंदी नहीं पाई है। शहर के बाजारों में खुलेआम पॉलीथिन का उपयोग दुकानदार और आमलोग कर रहे हैं।

जीव-जंतुओं के लिए है हानिकारक
अमानक पॉलीथिन के उपयोग न करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा कई नियम बनाए गए हैं। भारत सरकार के ठोस अपशिष्ट निवारण अधिनियम के तहत 40 माइक्रॉन से कम के मानक की पॉलीथिन पर्यावरण को प्रदूषित करती है। जानकारों का कहना है कि इस पॉलीथीन को रिसाइकल नहीं किया जा सकता है। जिससे यह प्रदूषण का कारण बनती है। सबसे ज्यादा नुकसान आवारा मवेशियों और जीव.जंतुओं को उठाना पड़ता है। पॉलीथिन में खाद्य सामाग्री ले जाने के बाद उसे सड़कों पर फेंक दिया जाता है। जिस वजह से उसे आवारा मवेशी खा लेते हैं। जो कि नुकसानदायक होता है।

सजा का है प्रावधान
अधिनियम की धारा 9 के तहत आवश्यक कार्यवाही किए जाने का प्रावधान है। नियमों की अवहेलना करने वाले व्यक्ति को एक माह की सजा या जुर्माना अथवा दोनों व इसकी पुनरावृत्ति करने पर तीन माह की सजा अथवा पांच हजार रुपये का जुर्माना या दोनों से दंडित किए जाने का प्रावधान है।

फाइल फैक्ट
जिले में थोक की बडी दुकानें- १५
जिले में थोक की छोटी दुकानें- ८०
जिले में फैरी लगाकर बाजारों में बेचने वालों की संख्या- २५०

इनका कहना है
हमारी ओर से लगाता अमानक पॉलीथिन के उपयोग पर पाबंदी लगाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हाल में जारी हुए आदेश के बाद करीब ८ से १० कार्रवाईयां की गई हैं।
संजेश नायक, स्वच्छता प्रभारी, नगर पालिका छतरपुर