
बस स्टैंड पर खड़ी खटारा बसें
जिले में सडक परिवहन व्यवस्था की बदहाली किसी से छिपी नहीं है, लेकिन इन दिनों स्थिति और भी भयावह हो चुकी है। शहर और ग्रामीण इलाके के रूटों पर दौड़ रही अनफिट, जर्जर और खटारा बसें यात्रियों की जान को सीधा खतरा पहुंचा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि इसी भयावह स्थिति के बीच परिवहन विभाग इन बसों को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी कर रहा है। सवाल यह है कि जब बसों के फर्श फट चुके हों, इमरजेंसी गेट रस्सियों से बंधे हों, छतें टपक रही हों और बॉडी हिल रही हो, तो आखिर कौन-से मानकों पर इन्हें फिट माना जा रहा है।
छतरपुर बस स्टैंड पर खड़ी कई बसों की स्थिति देखकर कोई भी समझ सकता है कि इन वाहनों को सडकों पर दौडऩा नहीं चाहिए। कई बसों की बॉडी इतनी कमजोर हो चुकी है कि तेज मोड़ों पर पूरी बस हिलने लगती है। इन सबके बावजूद बस ऑपरेटरों की मनमानी और परिवहन विभाग की अनदेखी मिलकर यात्रियों की सुरक्षा को मजाक बना रही है।
-गेट ठीक से लॉक नहीं होते-सीढिय़ां टूटी हुई हैं
-फर्श में चौड़ी दरारें हैं
-छतें जंग खाकर पतली हो चुकी हैं
-कई जगहों पर सीटों के नीचे से सडक साफ दिखती है
फायर फाइटिंग सिस्टम एक्सपायर
- प्राथमिक उपचार किट भी नहीं
अधिकांश बसों में न तो फस्र्ट-एड किट है और न ही चालू स्थिति में फायर फाइटिंग सिस्टम। कई बसों में अग्निशमन सिलेंडर जरूर लगे हैं, लेकिन उन पर एक्सपायरी डेट महीनों पहले ही खत्म हो चुकी है। ऐसे में किसी भी आकस्मिक दुर्घटना में ये बसें यात्रियों के लिए चलते-फिरते खतरे का सबब बन सकती हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ग्रामीण इलाके में दौड़ रही कुछ बसों में इमरजेंसी गेट पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। कुछ बसों में गेट को रस्सियों से बांध दिया गया है कहीं गेट के सामने सीटें ठूंस दी गई हैं। कई बसों में गेट पर ताला लटका मिला। ऐसे में किसी हादसे या आग लगने की स्थिति में यात्रियों के पास बचकर निकलने का कोई रास्ता नहीं रहेगा।किन रूटों पर दौड़ रही सबसे ज्यादा खटारा बसेंछतरपुर बस स्टैंड से संचालित कई रूटों पर अनफिट बसों का संचालन हो रहा है।
- सरवई
-महाराजपुर
-महोबा
-चंदला
-नौगांव
-राजनगर
-किशनगढ़
-घुवारा
इसके अलावा बड़ामलहरा, ईशानगर, लवकुशनगर, बिजावर, बकस्वाहा, दमोह और सागर रूट पर भी पुरानी और जर्जर बसें लगातार दौड़ रही हैं। स्थानीय सूत्र बताते हैं कि चेकिंग टीमों को पहले से सूचना मिल जाती है, जिससे बस संचालक कार्रवाई से बचने के लिए अपना रूट या स्टॉप बदल लेते हैं।
जब भी इन खटारा बसों को लेकर सवाल पूछे जाते हैं, विभाग के अधिकारी गोलमोल जवाब देकर पल्ला झाड़ लेते हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यही है , अगर बसें इतनी ही खराब हैं, तो उन्हें फिटनेस प्रमाणपत्र दिया कैसे जा रहा है? क्या फिटनेस जांच सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है या इसमें कोई मिलीभगत हो रही है?
Published on:
21 Jan 2026 10:53 am
