
डोलोमाइट खदान
जिले में खनिज उद्योग को लेकर एक नई पहल शुरू हो गई है। बड़ामलहरा क्षेत्र में 18 हेक्टेयर के डोलोमाइट प्रोस्पेक्टिंग लीज से उत्खनन शुरू हो गया है। यह कदम न केवल जिले के खनिज उद्योग को मजबूती देगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर और जिले के विकास के लिए राजस्व का नया स्रोत भी तैयार करेगा। डोलोमाइट मुख्य रूप से इस्पात उद्योग में उपयोग होता है, इसके अलावा इसे उर्वरक, सीसा, मिश्र धातु और शीशा निर्माण में भी इस्तेमाल किया जाता है। जिले में अभी प्रोस्पेक्टिंग लीज (पीएल) जारी हुई है। इसके बाद क्वेरी लीज (क्यूएल) जारी होने पर बड़े पैमाने पर उत्खनन की प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे जिले के लोगों को सीधे और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे।
जिला खनिज विभाग के अनुसार टहनगा क्षेत्र में 3.400 हेक्टयर का एरिया डोलोमाइट खदान के लिए सुरक्षित किया गया था। इसके अलावा एक अन्य खदान के लिए 15 हेक्टेयर का ब्लॉक चयनित किया गया। प्रोस्पेक्टिंग लीज की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ठेकेदार कंपनी ने कार्य शुरू कर दिया है। पीएल के बाद क्वेरी लीज जारी होगी, जिसके बाद उत्खनन और डोलोमाइट की बिक्री का काम तेजी से शुरू होगा। इस प्रक्रिया में स्थानीय लोगों के लिए कई रोजगार के अवसर खुलेंगे। ट्रांसपोर्ट, खदान संचालन, मजदूरी और तकनीकी पदों के लिए स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
भारत में डोलोमाइट के कुल भंडार लगभग 7084.20 मिलियन टन हैं। इनमें से लगभग 27 प्रतिशत यानी एक तिहाई हिस्सा मध्यप्रदेश में स्थित है। प्रदेश के मंडला, बालाघाट, छतरपुर, सागर, जबलपुर, कटनी, सीधी, नरसिंहपुर, सिवनी, झाबुआ, खंडवा और देवास जिले डोलोमाइट भंडार के लिए प्रमुख हैं। इस आंकड़े के आधार पर कहा जा सकता है कि छतरपुर का खनिज क्षेत्र देश में डोलोमाइट उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। डोलोमाइट का 90 प्रतिशत उपयोग इस्पात उद्योग में होता है। इसके अलावा इसका उपयोग उर्वरक, सीसा और मिश्र धातु निर्माण में भी किया जाता है। जिले में इससे जुड़े उद्योगों की स्थापना होने पर औद्योगिक विकास और रोजगार दोनों में वृद्धि होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस खदान से जिले को अनेक लाभ होंगे।
- खनिज उद्योग के माध्यम से रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
- खदान से राजस्व प्राप्त होगा, जिससे स्थानीय विकास और बुनियादी ढांचे में सुधार संभव होगा।
-उत्खनन करने वाली कंपनी को जिले में कुछ सामाजिक और विकास कार्यों में योगदान देना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा जिले में रॉक फॉस्फेट की खदान भी चल रही है। केंद्रीय खनिज मंत्रालय की अनुमति मिलने के बाद ऑनलाइन नीलामी कर भोपाल से जबलपुर की शोभा मिनरल्स कंपनी को 742 करोड़ रुपए में 50 साल के लिए खदान लीज पर दी गई। इसमें से 1.39 करोड़ रुपए सीधे छतरपुर डिस्ट्रिक मिनरल्स फंड में जाएंगे। इस खदान से निकलने वाले रॉक फॉस्फेट का उपयोग डीएपी उर्वरक बनाने में किया जाएगा। इससे किसानों को खाद की पर्याप्त आपूर्ति होगी और कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ेगा।
अमित मिश्रा, खनिज अधिकारी बताते हैं, पीएल की लीज के बाद कंपनी ने काम शुरू कर दिया है। अगले चरण में क्यूएल का लाइसेंस जारी होगा। डोलोमाइट का उपयोग इस्पात उद्योग, मिश्र धातु और सीसा निर्माण उद्योग में किया जाता है। यह खनिज न केवल आर्थिक लाभ लाएगा बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगा।
Updated on:
04 Sept 2025 10:38 am
Published on:
04 Sept 2025 10:38 am
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