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छतरपुर

गुरुदत्त मुनि सहित साढ़े आठ करोड़ मुनियों के निर्वाण की भूमि द्रोणगिरी

पहाड़ पर तीर्थंकर भगवानों के 35 मंदिर एंव 3 निर्वाण गुफाएं हैं। इसे लघु सम्मेद शिखर भी कहा जाता है। पर्वत पर जाने के लिये 170 सीढियां बनी हुई हैं। पर्वत के पास दो कुण्ड हैं जिनका जल सर्दियों में गर्म तथा गर्मियों में ठंडा रहता है। इस क्षेत्र के दोनों ओर चदांक्षीव, श्यामरी नामक दो नदियां बहती हैं।

छतरपुरJun 21, 2024 / 11:10 am

Dharmendra Singh

jain temple

द्रोणगिरी

छतरपुर. जिले के सेंधपा स्थिति दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र द्रोणगिरि में गुरुदत्त मुनि सहित साढ़े आठ करोड़ मुनियों ने निर्वाण प्राप्त किया है। पहाड़ पर तीर्थंकर भगवानों के 35 मंदिर एंव 3 निर्वाण गुफाएं हैं। इसे लघु सम्मेद शिखर भी कहा जाता है। पर्वत पर जाने के लिये 170 सीढियां बनी हुई हैं। पर्वत के पास दो कुण्ड हैं जिनका जल सर्दियों में गर्म तथा गर्मियों में ठंडा रहता है। इस क्षेत्र के दोनों ओर चदांक्षीव, श्यामरी नामक दो नदियां बहती हैं। मूलनायक भगवान आदिनाथ की संवत् 1549 की प्रतिष्ठित प्रतिमा है। गुरुदत्त निर्वाण गुफा, कांच मंदिर, चौबीसी मन्दिर, मानस्तम्भ एवं संग्रहालय आकर्षण के प्रमुख स्थल हैं।

हिल स्टेशन जैसा नजारा


माना जाता है कि यहां राजा नंगनंग कुमार ने अपने साढ़े पांच करोड़ अनुयायियों के साथ निर्वाण प्राप्त किया था। यह क्षेत्र नदी किनारे होने से हिल स्टेशन जैसा नजर आता है। तलहटी से दो मार्ग जाते हैं। एक रास्ता कुड़ी धाम की ओर जाता हैं जहां हनुमान मंदिर है एवं दूसरा पर्वत पर सीढिय़ों वाला मार्ग और सडक़ मार्ग है।

कांच की सजावट वाला मंदिर


पहाड़ी पर क्षेत्र का पहला मन्दिर सुपाŸवनाथ का कांच की अद्भुत सजावट से बना खूबसूरत मन्दिर है। दूसरा मन्दिर चंद्रप्रभु का है। तीसरा मन्दिर महत्वपूर्ण सात फनी पाŸवनाथ का है। चौथा मन्दिर आदिनाथ का है। पांचवां, छटा और सातवा मन्दिर तीन मंदिरों का एक समूह है जिसमें अजीत नाथ, आदिनाथ और पाŸवनाथ की प्रतिमाएं हैं। अन्य मंदिरों में शीतल नाथ जी, रसोइयन बाई की मरिया जो पाŸवनाथ मन्दिर है। उसके बाद नेमीनाथ एवं मंदिरों की श्रृंखला हैं। त्रिकाल चौबीसी का स्थापत्य एवं सुंदरता दर्शनीय है। इसमें बड़े हाल में तीन खडग़ासन मुद्रा की प्रतिमाएं स्थापित हैं एवं दो अलग – अलग मंजिलों पर त्रिकाल चौबीसी तीर्थंकरों की खड़ी मुद्रा में प्रतिमाएं बनाई गई हैं। इसके ऊपरी मंजिल पर शिक्षा के प्रसार को समर्पित गुरुदत्त मुनि की विशाल प्रतिमा है। त्रिकाल चौबीसी के सामने आकर्षक एवं कलात्मक कीर्ति स्तम्भ और लाल पाषाण से निर्मित चार तोरण द्वारों युक्त मान स्तम्भ है जिसके चारों ओर 12 तीर्थंकरों की प्रतिमाएं बनाई गई हैं।

आदिनाथ मंदिर समूह


एक और शांतिनाथ का कांच की सजावट से बना सुंदर मन्दिर है। तीन गुफाओं में तीसरी गुरुदत्त निर्वाण गुफा अच्छी स्थिति में दर्शनीय है। आखिर में चंद्र प्रभु मन्दिर, प्राचीन मान स्तम्भ मन्दिर और तीन मंदिरों का आदिनाथ मन्दिर समूह दर्शनीय हैं। मंदिरों के मध्य पहाड़ पर विमल सागर और ज्ञान सागर पांच समाधि स्थल और चरण चिन्ह एवं प्राचीन जैन प्रतिमाओं का एक संग्रहालय भी दर्शनीय हैं। तलहटी पर भी चार मन्दिर बने हैं। माघ शुक्ल त्रयोदशी से पूर्णिमा तक वार्षिक मेला, माघ शुक्ल पूर्णिमा पर रथ यात्रा और कार्तिक कृष्ण अमावस्या पर भगवान महावीर निर्वाण महोत्सव यहां के विशेष धार्मिक आयोजन हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश के विभिन्न क्षेत्रों से आ कर भाग लेते हैं।

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