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मप्र के इस जिले में हर पांचवां बच्चा कुपोषित

छतरपुर जिले में कुपोषित बच्चों की सर्वाधिक संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में है। जिले में बिजावर व बड़ामलरहा क्षेत्र में सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे मिल रहे

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Every fifth child in this district is malnourished

Every fifth child in this district is malnourished

छतरपुर. जिले में कुपोषण का दंश झेल रहे बच्चों की संख्या 38 हजार से ज्यादा है। शून्य से पांच वर्ष तक के 2 लाख 9870 बच्चों में ये कुपोषण की स्थिति है। जिससे साफ है कि कुपोषण का दंश मासूमों के लिए मुश्किलों का सबब बना है। हालांकि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस साल कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी आई है। लेकिन स्थिति अभी भी भयावह है। जिले में अल्प कुपोषित, अति कुपोषित व कुपोषित बच्चों की संख्या के हिसाब से से यहां औसतन हर पांचवां बच्चा कुपोषण से जूझ रहा है।
जानकारी के अनुसार जिले में कुपोषित बच्चों की सर्वाधिक संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में है। जिले में बिजावर व बड़ामलरहा क्षेत्र में सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे मिल रहे हैं। जानकारों के अनुसार गर्भावस्था में महिलाओं को पौष्टिक आहार न मिलने का असर शिशुओं में देखने को मिल रहा है। बच्चे की देखरेख का अभाव व सही पोषण न मिलने के कारण यह समस्या है। पौष्टिक आहार के अभाव बच्चों में कुपोषण की समस्या पैदा कर रहा है। यह हकीकत महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़े स्वयं बयां कर रहे हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारी मासूमों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के नाम पर कागजी कार्रवाई करने में लगे हैं। जिससे बच्चों की सेहत में ज्यादा सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 2017 में कुपोषण, अति कुपोषण व अल्प कुपोषण से 37 हजार २१३ बच्चे जूझ रहे हैं। जबकि २०१६ में ४१ हजार ८३६ मासूम कुपोषण की जद में थे। बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए कई योजनाओं का क्रियांवयन किया जा रहा है। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को पोषाहार वितरित करने का प्रावधान है। बावजूद इसके हकीकत यह है कि हालात में कोई ज्यादा परिवर्तन देखने को नहीं मिल रहा है।

अस्पताल में 20 बेड का पुनर्वास केंद्र
अतिकुपोषित बच्चों के लिए जिला अस्पताल में बीस बेड का पोषण पुनर्वास केंद्र है। वहीं जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दस-दस बेडों का पोषण पुनर्वास केंद्र है। जहां इन बच्चों का इलाज किया जाता है। यहां 14 दिन तक अतिकुपोषित बच्चों का इलाज किया जाता है। इसके बाद उन्हें चार बार जांच के लिए बुलाया जाता है।

कुपोषण से निबटने के लिए विभाग पूरा प्रयास कर रहा है। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष सुधार देखने को मिल रहा है। फिर बच्चों को पोषण आहार प्राथमिकता के साथ दिए जाने के लिए काम किया जा रहा है।
संजय जैन, महिला एवं बाल विकास अधिकारी