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5 मिनट में हटा रहे आंखों का जाला, जिला अस्पताल में निशुल्क मिल रही सुविधा

बढ़ती उम्र में आती है धुंधला दिखने की समस्याअब तक 20 बुजुर्गो को मिला लाभ

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5 मिनट में मिलता है इलाज

5 मिनट में मिलता है इलाज

छतरपुर। आंखों से धुंधला दिखने की समस्या का इलाज जिला अस्पताल में निशुल्क किया जा रहा है। मरीजों को इसके लिए अब निजी अस्पतालों में जाने के आवश्यकता नहीं है। मोतियाबिंद ऑपरेशन कराने के बाद आंख की पुतली और लैंस के बीच जमने वाले जाले के लेजर ट्रीटमेंट की सुविधा का अबतक 20 लोगों ने जिला अस्पताल में लाभ उठाया है। जिले में पहली बार इस आधुनिक तकनीक की सुविधा सरकारी अस्पताल में उपलब्ध हुई है। मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने वाले मरीजों में से 30 से 50 फीसदी मरीजों को जाले आने की समस्या होती है। ऐसे में इन मरीजों को 2 से 5 हजार रुपए तक खर्च कर चित्रकूट, झांसी और ग्वालियर जाकर लेजर ट्रीटमेंट कराना पड़ता है। लेकिन अब ऐसे मरीजो को लेजर ट्रीटमेंट के लिए बाहर नहीं जाना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के २8 ए नंबर कमरे में मशीन का संचालन किया जा रहा है।

5 मिनट में मिलता है इलाज
डॉ. जीएल अहिरवार ने बताया कि मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद लैंस व आंख की पुतली के बीच जाले आने से मरीज को देखने में परेशानी होती है। आंखों के धुंधले पन को हटाने के लिए लेजर मशीन का प्रयोग किया जाता है। इसके लिए मरीज को मशीन के आगे बैठाया जाता है और लेजर के माध्यम से मोटी हुई झिल्ली में छेद किया जाता है जिससे आंखों में प्रकाश अच्छी प्रकार से प्रवेश कर सके और मरीज की जाले वाली समस्या यानि धुंधला पन दूर हा़े जाता है। नई तकनीक से जिला अस्पताल की आई ओपीडी में मात्र 5 मिनट में ही आंख के जाले निकल जाते हैं। जिला अस्पताल में ये सुविधा मिलने से मरीजों को अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

ये होता है जाला
उम्र बढऩे के साथ साथ आंखों की रोशनी भी कम होती जाती है और आंखों के आगे धुंधलापन आना शुरू हो जाता है। सामान्य भाषा में इसे जाला कहा जाता है। सबसे पहले आंखों के डॉक्टर इस बात का पता लगाते हैं कि आंखों में जाला यानि धुंधला पन किस वजह से रहा है। आंखों में सफेद मोतिया बनने के बाद धुंधला पन होना शुरू हो जाता है जिसको आप्रेशन के बाद खत्म किया जा सकता है लेकिन कुछ मरीजों की आंखों में ऑपरेशन के बाद भी यह समस्या रहती है। इसका कारण यह है आंख के अंदर जो झिल्ली होती है वह मोटी हो जाती है और रोशनी उसमें अच्छी तरह से प्रवेश नहीं कर पाती जिससे आंखों के आगे धुंधला पन रहना शुरू हो जाता है जिसे लोग जाला कहते हैं।