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बाबा बागेश्वर पंडित धीरेन्द्र शास्त्री कराएंगे ऑनलाइन हवन

Bageshwar Dham: पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने की ऑनलाइन हवन शुरू करने की घोषणा, बोले- वैदिक परंपरा से होंगे हवन और 12 फरवरी 2026 से होगी शुरुआत।

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bageshwar dham dhirendra shastri

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Bageshwar Dham: मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बाबा बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री अब ऑनलाइन हवन कराएंगे। पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने खुद वैदिक परंपरा से ऑनलाइन हवन कराए जाने की घोषणा की है। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि जिनके घर ब्राह्मण नहीं पहुंच पाते उनके घर हम ऑनलाइन तरीके से हवन कराएंगे। ये हवन वैदिक परंपरा से कराए जाएंगे और 12 फरवरी 2026 से वैदिक परंपरा से ऑनलाइन हवन कराने की शुरुआत होगी। इस दौरान पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने ये भी कहा कि भारत को हिंदूवादी विचारधारा से भरपूर करने के लिए एक ही रास्ता है, साधु-संतों का कमंडल और बागेश्वर धाम का मंडल। देश को हम फिर से यज्ञ की तरफ, वेद की तरफ ले जाना चाहते हैं। यदि वेदों को सनातनी नहीं पढ़ेंगे, नहीं मानेंगे तो उनकी आने वाली पीढ़ियां भटक जाएंगी। इसके लिए हम वेद, यज्ञ की परंपरा शुरू कर रहे हैं।

सनातनी शिक्षा का केन्द्र बनेगा बागेश्वर धाम

पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा है कि सिद्ध पीठ बागेश्वर धाम अब केवल आध्यात्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं रहेगा, बल्कि सनातनी शिक्षा का प्रमुख केन्द्र भी बनने जा रहा है। जिले में इसी वर्ष फरवरी में आयोजित होने वाले सप्तम कन्या विवाह महोत्सव के अवसर पर बागेश्वर धाम में गुरुकुलम का शुभारंभ किया जाएगा। इस गुरुकुलम में बनारस से चयनित विद्वान शिक्षक बच्चों को शिक्षा देंगे और वैदिक परंपरा का ज्ञान फैलाएंगे। बागेश्वर धाम के पीठाधीश पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि बागेश्वर धाम में वेद, पुराण, रामायण, महाभारत, गीता जैसे ग्रंथों की शिक्षा गुरुकुलम के माध्यम से दी जाएगी। बटुक ब्राह्मणों के माध्यम से मंदिर में वेद मंत्रों की गूंज भी बच्चों और श्रद्धालुओं तक पहुंचेगी।

'भावी पीढ़ी को संस्कार व ज्ञानवान बनाना उद्देश्य'

पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मस्तक पर तिलक धारण करने, शिखा बांधने और माता-पिता, गुरु तथा भगवान को प्रणाम करने जैसे संस्कार केवल सनातनी विद्या से ही संभव हैं। अक्सर लोग सवाल करते हैं कि यज्ञ क्यों करें, मंत्र जप क्यों करें, धर्म के कार्यों में क्यों संलग्न हों। इन सभी सवालों का उत्तर गुरुकुलम में दी जाने वाली शिक्षा से बच्चों तक पहुंचेगा। गुरुकुलम का लक्ष्य केवल ज्ञानवान पीढ़ी तैयार करना नहीं है, बल्कि संस्कारवान पीढ़ी का निर्माण करना भी है।