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गर्रोली में आज लगेगा मेला, होगा ताड़का वध, वर्ष 1812 से चली आ रही परंपरा

गर्रोली रियासत के राजा कराते थे प्रतियोगिता, एक माह चलता था आयोजन800 फीट उंचे पहाड़ पर राजा ने शारदा माता की मूर्ति की कराई थी स्थापना

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tradition since 1812

tradition since 1812

बजीर खान
नौगांव। वर्ष 1812 में गर्रोली रियासत के राजा ने चैत्र नवरात्र पर गर्रोली की शारद माता के मंदिर परिसर में ताड़का वध प्रतियोगिता का आयोजन कराया था। इसके बादये कार्यक्रम परंपरा अनुसार चलता रहा और आज भी ताड़का वध का आयोजन किया जाता है। रियासत काल में ये प्रतियोगिता एक माह तक चलती थी, जिसमें 18 गांव के जमींदार और जनता शामिल होती थी। हालांकि अब ये प्रतियोगिता केवल एक दिन चैत्र नवरात्र की दशमीं पर कराई जाती है। जिसका आयोजन इस बार सोमवार को किया जा रहा है। इसके लिए पिछले कई दिनों से बबलू रेकवार द्वारा ताड़का का पुतला बनाने का काम किया जा रहा था, जो अब पूरा हो गया है। इस आयोजन में आसापास के क ई गांव के लोग शामिल होंते हैं।
हाथी-धोड़े भी होते हैं शामिल
रियासत काल की परंपरा अनुसार इस मेले में आसपास के सभी गांव के घोड़े-हाथी शामिल होते हैं, ताड़का वध देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती है। सोमवार को राम,लक्ष्मण और सीता की झांकी के साथ हाथी-धोड़ों का दल मेला स्थल पर पहुंचेगा। दल के साथ बैंड बाजा और डीजे भी रहेगा। परंपरा अुनसार हाथी ताड़का का वध करता है। मेला में आने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस व्यवस्था भी की जाती है।
800 फीट उंचाई पर है मंदिर
गर्रोली में लगभग 800 फीट ऊंचे पहाड़ पर मां शारदा का मंदिर है। इस मंदिर परिसर में इतनी उंचाई पर एक जल कुंड़ भी बना हुआ है। इस मंदिर परिसर में ही ताड़का वध का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही मेला का आयोजन होती है। ग्राम गर्रोली से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर 800 फीट ऊंचे पहाड़ की 740 सीढिय़ों को चढ़कर लोग इस मेला में शामिल होने आते हैं। पहाड़ की उंचाई से धसान नदीं का दृश्य और प्राकृतिक नजारा पतझड़ में भी मन मोह लेता है।
गर्रोली के राजा ने कराया था निर्माण
गर्रोली के रियासत दीवान बहादुर गोपाल सिंह जूदेव को सनद के अनुसार 1812 में अंग्रेजों द्वारा गरौली रियासत मिली थी। दीवान बहादुर गोपाल सिंह जूदेव 1812 मैं पन्ना से गर्रोली आए और अंग्रेजो द्वारा 18 गांव पुतरिया, पचवारा , कुलवारा, कारतोल, गंज, करारा, रानीपुरा, भडियापुरा, गर्रोली, सालाक, वनचोर, भटेरा, अमानपुरा, रिछारा, सिलारपुरा,सतोरा, पडरिया और कनेरा मिले थे।
रियासत मिलने के बाद दीवान बहादुर गोपाल सिंह जूदेव और उनके पुत्र पारीछत मैहर से मां शारदा को लाए और गर्रोली के 800 फीट उंचे पहाड़ पर मंदिर निर्माण कराकर स्थापना कराई थी।