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आधार कार्ड जैसे बनेगा फार्मर कार्ड, ऋण, फसल बीमा और आपदा के नुकसान का वास्तविक आंकलन हो सकेगा

किसानों की फॉर्मर आईडी आधार कार्ड जैसी होगी। यूनिक आईडी से किसानों का फसल बीमा, कृषि ऋण और आपदा में क्रॉप की नुकसानी का वास्तविक आंकलन किया जाएगा।

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भू-अभिलेख शाखा छतरपुर

छतरपुर. जिले में किसानों की 12 डिजिट की फॉर्मर यूनिक आईडी बनाने के लिए प्रशासन द्वारा डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। भू-अभिलेख की जानकारी के अनुसार पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिले में अब तक तीन हजार किसानों का आईडी का डाटा एकत्रित हो चुका है। किसानों की फॉर्मर आईडी आधार कार्ड जैसी होगी। यूनिक आईडी से किसानों का फसल बीमा, कृषि ऋण और आपदा में क्रॉप की नुकसानी का वास्तविक आंकलन किया जाएगा।

डिजीटल पहचान मिलेगी


केंद्र सरकार ने फॉर्मर आईडी के लिए 2024-25 तक लक्ष्य निर्धारित किया है। किसानों के यूनिक कार्ड से रजिस्ट्री के अलावा उनके गांव के जमीन के नक्शे की जानकारी आईडी में रहेगी। इस कार्ड से संबंधित किसान की जमीन का रिकॉर्ड रहेगा । इसके साथ ही उसके पास कितने मवेशी हैं और उसने किस फसल की खेती की है, इसकी पूरी जानकारी रहेगी। इस कार्ड के जरिए किसानों को एक विश्वसनीय डिजिटल पहचान उपलब्ध कराया जाएगा। कृषि के क्षेत्र में किसानों की महत्वपूर्ण पहचान और डिजिटल आईडी तैयार की जाएगी। किसानों को फसल बीमा और फसल लोन जैसी सेवाओं का लाभ उठाने में किसी प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

बोई गई फसल की जानकारी भी होगी


इसके साथ ही किसानों द्वारा बोई गई फसल की जानकारी दर्ज होगी। डिजिटल कृषि मिशन नामक योजना के तहत केंद्र सरकार ने पहले किसानों का डिजिटल पहचान बनाने की योजना बनाई है। केंद्र का प्रयास है कि अगले साल के अंत तक किसानों को यह सुविधा मिल जाएगी। गौरतलब है कि पीएम सम्मान निधि पात्र 2.15 लाख किसानों का पहले से ही डेटा जिला प्रशासन के पास उपलब्ध है। डिजिटल फसल सर्वेक्षण से जो डाटा प्राप्त होगा, किसान उसका इस्तेमाल वैज्ञानिक रूप से फसलों की कटाई के लिए कर सकेंगे। इससे उत्पादन का सटीक अनुमान मिलेगा। इससे कृषि उत्पादन की सटीकता बढ़ेगी। प्राकृतिक आपदा के दौरान हुए फसल नुकसान का भी सटीक आंकलन किया जाएगा। जमीनी सर्वेक्षण करने का खर्च बचेगा और किसानों को सही समय पर नुकसान का मुआवजा मिल सकेगा।

गिरदावरी में होगी आसानी


डिजिटल फसल सर्वेक्षण से किसानों को कई फायदे होते हैं। इससे किसानों को अपनी गिरदावरी तक पहुंचने में मदद मिलती है। फसल के नुकसान की स्थिति में तत्काल बीमा की राशि का भुगतान होगा है। इससे किसान क्रेडिट कार्ड पाने में भी मदद मिलेगी। किसान अपनी जमीन के रिकॉर्ड की समीक्षा कर सकते हैं और जरूरत पडऩे पर आपत्ति उठा सकते हैं। सैटेलाइट इमेज से संभावित फसलों के बारे में जानकारी मिलती है। जिले में 2024-25 के दौरान जिले में डिजिटल फसल सर्वेक्षण करने पूर्ण होने की उम्मीद जताई जा रही है। डिजिटल फसल सर्वेक्षण, डिजिटल कृषि मिशन का हिस्सा है।

इनका कहना है


छतरपुर जिला किसानों के डिजिटल सर्वे में प्रदेश में टॉप टेन में शामिल है। उम्मीद की अगले साल के अंत तक किसानों का यूनिक आईडी जारी हो जाएगी।
आदित्य सोनकिया, अधीक्षक, भू-अभिलेख