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किसने किया आस्था से खिलवाड़, कितना कठिन है मंदाकिनी पर्वत माला पर इस धाम पहुंचना

वन रेंज में होने से नहीं हो रहा विकास, मंदिर से जुड़ी है लोगों की आस्था

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उन्नत पचौरी /छतरपुर। एक ओर जहां देश में पर्यटन और धार्मिक स्थल को बढ़ावा देने के लिए कवाएतें की जा रही है। वहीं दूसरी ओर प्रदेश के कई ऐतिहासिक स्थान प्रशासन व सरकारों की अनदेखी का शिकार हो रहे हैं। ऐसा ही एक धाम है स्वर्गेश्वर धाम मंदिर जो मंदाकिनी पर्वत माला की चोटियों पर स्थित है जो महत्तवपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है। जिसे ऋषियों की तपोभूमि के नाम से जाना जाता है। मंदिर में यहां आश्चर्य की सबसे बडी बात है कि यहां शिवलिंग पर बर्षो से अनवरत जल की धारा लगातार बहती रहती है। चंद्रनगर बीट के दुर्गम जंगलों से घिरा क्षेत्र यहां पहुंचने वाले श्रद्वालुओं को मंत्र मुग्ध कर देता है। यहां पहुचकर कर वास्तविक प्रकृति का अभूतपूर्व अनुभव देखने को मिलता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर में रखा शिवलिंग प्राचीन काल से स्थित है। शिवलिंग पर बहता पानी 12 माह शिवलिंग का अभिषेक करता रहता है। इसकी कोई थाह नहीं है और न ही आज तक इसकी जानकारी लग सकी है। छतरपुर जिले की विश्व की पर्यटन नगरी खजुराहो से मात्र 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चंद्रनगर ग्राम के समीप वन विभाग की सीमा के अंतर्गत आने वाले पुरवा के समीप मैरागढ की पहाडियों पर पहाडों के बीच स्थित महादेव शिव का स्वर्गेश्वर महादेव का 1000 ईसवी पूर्व बना अलोकिक व अद्भुद मंदिर है। जहां साल के शुरूआत पर मकरसंक्राति के अवसर पर विशाल मेला का आयोजन किया जाता है। लेकिन वन विभाग की सीमा होने के कारण श्रद्वालुओ के पहुंचने के लिए ना तो उपयुक्त सड़क है ओर ना ही उपयुक्त व्यवस्था की जा गई है।
मध्यप्रदेश के कई ऐतिहासिक स्थान प्रशासन व सरकारों की अनदेखी का शिकार बने हुए है तो वहीं उन्ही के प्रशसनिक अधिकारियों क ी नजर अंदाजी के कारण यहां कि एक प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर एक मंदिर व स्थान अपना अस्तित्व खोता जा रहे है जिसका जीता जागता उदाहरण है चंद्रनगर के समीप स्थित स्वर्गेश्वर धाम जहां जाने के लिए ना तो सडक है ना ही कोई सुविधा यहां पहुंचने के लिए लोगों को वन विभाग से होते हुए जाना होता है। यहां मंदाकिनी पर्वत माला में पहाडों के बीच विराजे है बाबा भोलेनाथ जहां तक 380 सीढियों का दुर्गम रास्ता पार कर पहुंचा जाता है मंदिर के पुजारी से चर्चा पर पता चला कि वे अपने पूर्वजो से सुनते आ रहे है कि यह स्वर्गेश्वर महादेव का मंदिर बहुत ही प्राचीन है व यहां का मंदिर खजुराहो के मंदिरो से भी पुराना है।
बुंदेलखंड जहां एक ओर भीषण सूखे की मार झेलने के बाबजूद भी भगवान महादेव के सिर पर पानी का लगातार अभिषेक होता रहता है और यहां कभी भी पानी की कोई कमी नहीं होती यह पानी कहा से आता है इसकी कोई जानकारी अभी किसी ने नहीं कर पाई है। मंदिर के प्रागण स्थान पर श्रद्वालुओं की आस्था के चलते साल में मकरसंक्राति के अवसर पर 7 दिनों की पुराण क ा आयोजन के साथ बसंत पंचमी के दिन एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें दूर दूर से भारी में श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते है।
यहां पर कोई भी विकास कार्य नहीं होने और साल में एक बार के लिए दर्शन के लिए मंदिर का रोस्ता खोलने की परेशानी को लेकर स्थानीय लोगों ने कई बार इसकी शिकायत प्रशासन से की जा चुकी है और स्वर्गेश्वर धाम में श्रद्धालुओं को १२ माह दर्शन करने की मांग की जा चुकी है। लेकिन अभी तक न तो वहां कोई विकाश कार्य किया गया और न ही आम दिनों में दर्शन करने के लिए आने जाने की इजाजत मिली है। प्रशासन का इस तरह ध्यान न देने के कारण मंदिर को अपनी पहचान खोता जा रहा है।