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मटका बनाने वाले बुजुर्ग ने कहा- 70 साल में पहली बार नहीं लगे मटके पकाने के भट्टे

सैलून कारोबार पर भी पड़ा लॉक डाउन का असर, संचालक बोले- संक्रमण फैलने के डर से लोग नहीं बनवा रहे दाड़ी-बालशादियों व कर्मकांड बंद होने से कर्मकांड कराने वाले भी हुए बेरोजगार

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Effect of lock down

Effect of lock down

छतरपुर। लॉक डाउन के चलते सभी तरह की व्यावसायिक गतिविधियां ठप पड़ी हुई हैं। परंपरागत कार्यो से अपना व परिवार का भरण पोषण करने वाले लोगों की जिंदगी पर बुरा असर पड़ा है। आमदनी हो नहीं रही है, परिवार के भरण पोषण पर रोजाना का खर्च लगा हुआ है। ऐसे में कामगार लोग थोड़ी बहुत बचाकर रखी जमा पूंजी से राशन खरीदकर परिवार पाल रहे हैं। लॉक डाउन में हालात यहां तक है कि पीढिय़ो से मिट्टी के मटका बनाने वाले बुजुर्ग कह रहे हैं कि उनकी जिंदगी में पहली बार ऐसा हुआ है, जब गर्मियों में मटके नहीं बन रहे हैं। ग्राहक आ रहे हैं, तो उन्हें लॉक डाउन के पहले बनाए गए घड़े बेचकर कुछ आमदनी हो जा रही है। लेकिन 75 फीसदी कारोबार ठप है। वहीं, लोगों के दाढ़ी-बाल बनाकर जीविका चलाने वाले सैलून संचालकर तो बचत की पूंजी से पेट पाल रहे हैं। लॉक डाउन का असर धार्मिक आयोजन और कर्मकांड़ कराने वालों पर भी पड़ा है।

लॉक डाउन के पहले बने मटके भी नहीं बिके
शहर के सटई रोड पर मटका बनाने का काम पीढिय़ों से करने वाले परिवार के 70 वर्षीय बुजुर्ग नंदी प्रजापति बताते हैं। कि उनकी जिंदगी में पहली बार ऐसा हुआ है, जब मटका बनाने का काम ठप हैं। लॉकडाउन के कारण मटके पकाने का ईधन जैसे लकडी़, कोयला के साथ ही मटके के निर्माण के काम आने वाली मिट्टी तक नहीं मिल पा रही है। गर्मी बढऩे के कारण लोग मटके खोजते हुे आते हैं, ऐसे में लॉक डाउन के पहले बनाकर रखे मटके ही बिक रहे हैं, लेकिन मटकों की संख्या कम होने से ग्राहक को च्वॉइस नहीं मिलने से कई बार ग्राहक मटका खरीदे बिना ही लौट जा रहे हैं। जितने मटके बने हैं, वे भी बिक नहीं पाए हैं। कभी-कभार जो मटके बिकते हैं, उससे मिली राशि से ही राशन खरीदकर पेट पाल रहे हैं।

लोगों के मन में बैठा है संक्रमण का डर
बजरंग नगर में सैलून का संचालन करने वाले आशीष सेन ने बताया कि एक महीने से लॉक डाउन के कारण सैलून का संचालन बंद है। जो रैग्यूलर ग्राहक हैं, वे भी दाढ़ी-बाल बनबाने नहीं आ रहे हैं। लोगों को संक्रमण की आशंका है, इसी डर से लोग बाल नहीं बनवा रहे हैं। वहीं, शादी-विवाह में सहायक का काम करने वाले भोले सेन ने बताया कि लॉक डाउन के कारण शादियां नहीं होने से बेरोजगार हो गए हैं। जो थोड़ी बहुत पूंजी बचाकर रखी थी, उसी से परिवार पाल रहे हैं। लेकिन ज्यादा दिनों तक लॉक डाउन रहा तो बड़ी मुश्लिक हो जाएगी। सैलून संचालक सुखलाल सेन ने बताया कि 42 साल की जिंदगी में पहली बार ऐसा हुआ है, जब हम लोग बेरोजगार हो गए हैं। काम-काम और आमदनी बंद है, परिवार के खर्च तो लगे ही हैं। ऐसे में लॉकडाउन के दिन जिंदगी के सबसे बुरे दिन साबित हो रहे हैं।

कर्मकांड़ ठप होने से बंद हो गई आमदनी
पंडि़त एमएल पाठक ने बताया कि लॉक डाउन के कारण शादी, मुंडन समेत सभी तरह के कर्मकांड़ नहीं हो रहे हैं। इससे जुड़े सभी लोगों के पास कोई काम नहीं है। मार्च, अप्रेल और मई जैसे सीजन में काम नहीं होने से हम लोगों की जिंदगी में 6 महीने तक आर्थिक समस्या रह सकती है। वहीं पंडि़त गुलाब रावत ने बताया कि लॉक डाउन के कारण सीजन में बेरोजगार हो गए हैं। ऐसा जिंदगी में पहली बार देखा है। ज्यादा दिनों तक ऐसा ही चला तो हमें बहुत नुकसान होगा।