
चार के पास है पानी बेचने का लाइसेंस और 50 से अधिक चल रहे पानी के प्लांट
उन्नत पचौरी
छतरपुर। जिलेभर में कई जगहों पर अवैध रूप से ठंडा पानी बेचने का कारोबार किया जा रहा है। बगैर लाइसेंस के पानी का कारोबार कर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों पर जिम्मेदार विभाग द्वारा कोई कार्रवाई भी नहीं की जा रही है। कार्रवाई को लेकर कहा जाता है कि हमारे पास जांच का अधिकार नहीं है। हम सिर्फ उन्हीं स्थानों की जांच कर सकते है, जिनके पास पानी का पाउच व बोतल में पानी पैक करने का लाइसेंस है। जिले में गर्मी के मौसम की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में ठंडे पानी के नाम पर दूषित पानी बेचने वाले कारोबारी जिले में सक्रिय हो गए हैं। केनों के माध्यम से पानी की सप्लाई की जा रही है। बता दें कि जिलेभर में सिर्फ चार लोगों के पास ही पानी का कारोबार करने का लाइसेंस है, लेकिन ५० से अधिक जगहों पर ठंडा पानी बेचने का गोरखधंधा किया जा रहा है।
जिले में जिस रफ्तार से बोतलबंद पानी की मांग बढ़ती जा रही है, उसी रफ्तार से पानी में भी मिलावट की मनमानी बढ़ती जा रही है। आज बोतलबंद पानी नल के पानी से लगभग 10 हजार गुना ज्यादा महंगा हो चुका है। हमारे जिले में पानी के स्रोत सूखते जा रहे हैं और पानी के सौदागर मालामाल होते जा रहे हैं। जिले में लगभग ६५ प्रतिशत पानी खारा है। बाकी ३५ प्रतिशत मीठा पानी सिर्फ नदियों और भूमिगत स्रोतों में उपलब्ध है। मौजूदा जल संकट खतरे की घंटी है। यही वजह है कि पानी का कारोबार करने वाली फर्म संचालक मालामाल हो रहे हैं। पिछले कुछ ही वर्षों में बोतल बंद पानी का कारोबार का साल दर साल बढ़ता जा रहा है और संचालकों द्वारा अच्छा टर्नओवर किया जा रहा है। स्थानीस अधिकारियों अनुसार लाइसेंसशुदा बिक्री का ब्योरा रहता है लेकिन बिना लाइसेंस वाली कंपनियों कारोबार बडा होता जा रहा है।
केनों में नहीं लिखा होता नाम व पता
कार्यालय, घर व किसी भी कार्यक्रम में जिस केन से ठंडे पानी की सप्लाई की जाती है, उसमें संस्था का नाम व आईएसआई सर्टिफाइड होने का मार्का लगा होना चाहिए, लेकिन पानी की सप्लाई करने वाले अधिकांश कारोबारियों की केनों में इसका उल्लेख नहीं होता। कारोबारियों द्वारा साधारण तौर पर एक केन में पानी भर कर सप्लाई कर देते हैं। कारोबारियों द्वारा 20 रुपए में एक केन पानी दिया जाता है। हर माह पानी के धंधे से जुड़े लोग लाखों रुपये की कमाई करते है।
यहां पर संचलित हो रही पानी की का व्यापार
शहर के दर्जनों स्थानों के साथ साथ बाहरी इलाकों में लोगों द्वारा मनमाने तौर पर पानी की दुकानें चलाई जा रही है। जिसमें शहर के महलों के पास, नया मोहल्ला, सटई रोड, महोबा रोड, नारायणपुरा रोड, बगौता गांव, बगौता तिराहा के पास, ललौनी, ढडारी, सौरा, पन्ना नाका सहित कई स्थानों में लोगों द्वारा पानी की दुकानें सजाकर कारोबारी किया जा रहा है।
मिनरल वाटर बिजनेस शुरू करने से पहले बनानी होती कंपनी या फर्म
मशीनीकृत प्रक्रिया के जरिए जिस पानी को शुद्ध करके पीने लायक बनाया जाता है उसे आम भाषा में मिनरल वाटर कहते हैं। इस मिनरल वाटर को पैकेजिंग कर मार्केट में बेचना ही मिनरल वाटर बिजनेस कहा जाता है। मिनरल वाटर का बिजनेस शुरू करने के लिए पहले एक कंपनी या फर्म बनाई जाती है। कंपनी एक्ट के तहत इसका रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। कंपनी का पैन नंबर और जीएसटी नंबर आदि की भी जरूरत होती है। क्योंकि इसकी हर जगह जरूरत पड़ती है। वाटर प्लांट लगाने के लिए जमीन, बोरिंग, आरओ और चिलर मशीन व कैन आदि रखने के लिए 1000 से 1500 स्क्वायर फिट जगह तो होनी ही चाहिए। पानी के स्टोरेज के लिए टंकियां बन सकें, इसकी भी व्यवस्था हो।
आरओ प्लांट के लिए कहां से लें लाइसेंस
कंपनी के रजिस्ट्रेशन और जमीन आदि की व्यवस्था के बाद मिनरल वाटर प्लाट के लिए लाइसेंस लेना होता है। इसके लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंटर्ड दिल्ली को आवेदन करना होता है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंटर्ड (आईएसआई) के अधिकारी मौके पर जांच करते हैं। पानी का नमूना लेते हैं। फिर अनुमति पत्र देते हैं। यह पत्र जिला खाद्य विभाग के यहां देते हुए आवेदन करना होता है। औषधि प्रशाधन विभाग भौतिक जांच के बाद प्लांट का लाइसेंस जारी करता है। इसके पहले वह मशीनों की गुणवत्ता, पानी की गुणवत्ता आदि जांचता है। पानी खारा न हो, बोरिंग कम से कम दो सौ फीट गहरी हो। वाटर लेविल ठीक हो। औषधि प्रशाधन विभाग के बाद जिला पंचायत या नगर पालिका से भी एनओसी लेनी होती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बाद में परेशान न करें इसलिए उनकी भी अनुमति ले लें। चूंकि श्रमिकों से काम लेना होगा इसलिए श्रम विभाग में भी पंजीकरण जरूरी है।
ये रहीं रजिस्टर्ड फर्में
जिले में मात्र चार रजिस्टर्ड फर्म हैं जिन्होंने खाद्य एवं औषधि विभाग से रजिस्ट्रेशन लिया है। जिसमें शहर के बगौता में स्थित जलनीर, केएसएम कम्पनी गल्ला मंडी, महलों के पास पावन, शहनाई गार्डन के पास सुधा इंडस्ट्रीज नाम से हैं। जिसमें से पावन पर एक केश कोर्ट में चल रहा है। इसके अलावा संचालित आरओ प्लांट और मिनरल वाटर प्लांट बिना किसी रजिट्रेशन के संचालित किया जा रहे हैं।
ये कर सकते हैं कार्रवाई
खाद्य एवं औषधि विभाग के पास दन पर कार्रवाई करने के नियम नहीं हैं। जिससे विभाग के अधिकारी कार्रवाई नहीं कर सकते। लेकिन इन कारोबारियों द्वारा खुलेआत एनजीटी के नियमों की अवहेलना की जा रही है और बिना कोई परमीशन के काम किया जा रहा है। जिसपर नगरीय प्रशासन, राजस्व विभाग द्वारा कार्रवाइ्र की जा सकती है।
हो सकते है कई प्रकार की बीमारियों के शिकार
जिला अस्पताल के डॉ. विजय पथौरिया ने बताया कि पानी के यदि गुणवत्ता की सही से जांच नहीं हो रही है और वह दूषित है, तो इस प्रकार का पानी पीने से लोग कई प्रकार की बीमारियों का शिकार हो सकते है। दूषित पानी में अमीबा नामक एक कीटाणू होता है जो आत में जाकर पेट को खराब कर देता है। इसके अलावा ई-कोलाई नामक कीटाणू से लोग डायरिया का लोग शिकार हो सकते है। साथ ही लोगों को पीलिया व टायफाइड भी हो सकता है। साथ पाचन क्रिया भी प्रभावित हो सकती है।
इनका कहना है
जिले में चार ही रजिस्टर्ड फर्म हैं, जिसमें से एक पर केश चल रहा है। इसके अलावा संचालित किए जा रहे आरओ प्लांट और मिनरल वाटर प्लांटों का रजिस्ट्रेशन नहीं हैं और यह हमारे कार्य क्षेत्र से बाहर होने के कारण कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। इसके लिए जैसे ही नए दिशा-निर्देश जारी होंगे। वैसे ही ऐसे कारोबार पर लगाम लगाई जाएगी।
संतोष तिवारी खाद्य एवं औषधि विभाग
इनका कहना है
में अभी बाहर हूं, लौटने के बाद दिखवाता हूं। बिना लाइसेंस के पानी का प्लांट नहीं लगाया जा सकता है। जिसके पास भी लाइसेंस नहीं मिलेगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।
पे्रमसिंह चौहान एडीएम
Published on:
03 Apr 2019 07:00 am
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