खजुराहो. जी- 20 संस्कृति समिट के लिए आए 125 प्रतिनिधियों का खजुराहो की धरती पर आखरी दिन मौज-मस्ती भरा रहा। सुबह से प्रतिनिधियों ने नमो ग्लोबल पार्क खजुराहो में पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। इसके बाद पन्ना नेशनल पार्क पहुंचकर जंगल सफारी का लुफ्त उठाया। टाइगर-पी 151 से रू-ब-रु हुए। पन्ना नेशनल पार्क के प्राकृतिक सौंदर्य की यादें तस्वीरों के रुप में मेहमान साथ भी ले गए। जाते समय खजुराहो एयरपोर्ट पर गुलाब की पंखुडिय़ों की बौछार कर उन्हें विदाई दी गई।
बाघिन से हुआ भावपूर्ण मौन संवाद
जी-20 के प्रतिनिधियों का दल शनिवार की सुबह पन्ना नेशनल पार्क पहुंचा। पन्ना टाइगर रिजर्व की प्राकृतिक सुंदरता ने विदेशी प्रतिनिधियों का मन मोह लिया, जिसकी यादें वे तस्वीरों के रुप में संजो कर साथ ले गए। प्रतिनिधियों ने जंगल सफारी का आनंद लिया और पन्ना टाइगर रिजर्व के वन्य जीवों को भी देखा। इस दौरान मेहमानों को बाघिन पी-151 मिली, लेकिन उसके शावक नजर नहीं आए। प्रतिनिधियों ने स्टेलर नोट में लिखा कि इस दौरान ऐसा दृश्य था मानो बाघिन भी मेहमानों का स्वागत कर रही हो और कह रही हो कि वीकेंड का समय है, अभी मेरे बच्चे सोकर नहीं उठे हैं। अगली बार मेरे पूरे परिवार से मिलना, जल्द ही हम दोबारा मिलेंगे।
ग्लोबल चिल्ड्रन पार्क में पौधारोपण कर यात्रा को बनाया यादगार
जी-20 के प्रतिनिधियों ने शनिवार को पन्ना नेशनल पार्क भ्रमण के पहले खजुराहो में पौधारोपण किया। प्रतिनिधियों ने खजुराहो के नमो ग्लोबल चिल्ड्रन पार्क में पौधे लगाए। अपनी खजुराहो यात्रा को यादगार बनाने के लिए प्रतिनिधियों ने पौधे लगाए और स्थानीय समाजसेवियों से मुलाकात भी की इस दौरान वह काफी प्रसन्नचित्त भी दिखाई दिए।वहीं, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने प्रतिनिधियों को भागवत गीता भेंट की।
लोकनृत्य राई पर जमकर झूमे जी-20 के मेहमान
जी- 20 समिट संस्कृति समूह की बैठक के बाद प्रतिनिधियों को फेयरवेल डिनर दिया गया। डिनर कार्यक्रम के दौरान लोकनृत्य बधाई, मटकी, राई की प्रस्तुति दी गई। बुंदेली लोकनृत्य राई की प्रस्तुति पर जी-20 प्रतिनिधि मंत्रमुग्ध हो गए। कुछ प्रतिनिधि राई की धुन पर खुद भी खूब झूमे। प्रतिनिधियों ने वहां मौजूद कलाकारों से बुंदेली राई के बारे में जानकारी भी ली। उन्हें बताया गया कि बुंदेली राई बुंदेलखंड का पारंपरिक लोक नृत्य है। राई का मतलब सरसों होता है। जिस तरीके से तश्तरी में रखे सरसों के दाने घूमते हैं, उसी तरह नर्तक भी नगाडिय़ा, ढोलक, झीका और रामतूला के पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर नाचते हैं।